अच्छे व पवित्र भाव से की गई साधना, आराधना, भक्ति व जप-तप अधिक फलदायी - साध्वीश्री शशि प्रभा
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अच्छे व पवित्र भाव से की गई साधना, आराधना, भक्ति व जप-तप अधिक फलदायी-साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.
बीकानेर, 27 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.ने मंगलवार को रांगड़ी चैक के प्राचीन सुगनजी महाराज के उपासरे में पर्युषण पर्व प्रवचन में कहा कि संयम, त्याग, तपस्या के साथ मोक्ष के लिए आत्म भाव जरूरी है। साधना, आराधना व सभी धार्मिक क्रियाएं अच्छे भाव से अधिक सफल होती है ।
उन्होंने कहा कि भाव जगत अच्छा रहने पर भव सुधर जाता है। आत्मिक पवित्र भाव सही नहीं होने पर लौकिक धार्मिक-आध्यात्मिक साधना, आराधना व भक्ति के सार्थक परिणाम नहीं आते । पवित्र व शुद्ध आत्मिक भाव से की गई लघु धार्मिक क्रिया व साधना अधिक फलदायी रहती है। पर्युषण पर्व के दौरान वर्षभर के दौरान आत्मा पर आई कालिमा को जप,तप, साधना, आराधना व भक्ति तथा मन से क्षमापना से दूर करें। सांसारिक जगत को छोड़कर आत्म व अपने आप में रमण करें।
ढढ्ढा कोटड़ी में साध्वीश्री सौम्यगुणा ने कहा कि श्रावक के पांच कर्तव्यों का वर्णन करते हुए कहा कि साधर्मिक भक्ति, देव, गुरु व धर्म की आराधना, दिल से क्षमा आदि कर्तव्यों का निर्वहन सही तरीके से करें। पांच कर्तव्यों की पालना में दिखावा या आडम्बर से नहीं होना चाहिए। पर्युषण पर्व के दौरान अपनी कमजोरियों व दुर्गुणों को दूर करें। उन्होंने कहा कि चैत्य परिपाटी के कर्तव्य के तहत सभी श्रावक-श्राविकाओं का नैतिक दायित्व है कि वे मंदिरों में नियमित दर्शन करने जाएं तथा भगवान की भक्ति करें । बीकानेर प्राचीन जैन मंदिरों के लिए जग में प्रसिद्ध है, लेकिन वर्तमान में कई मंदिरों में दर्शन व पूजा अर्चना करने वालों की गिनती नाम मात्र है। यह बात जिन शासन के श्रावक-श्राविकाओं के लिए शोभा जनक नहीं है। इससे शासन की प्रभावना कम होती है। जिन शासन की प्रभावना को बढ़ाने के लिए अधिकाधिक जिनालयों में पूजा अर्चना, दर्शन करने नियमित जाएं। मंदिर के विकास व जीर्णोंद्धार में तन, मन व धन से सहयोग करें।
रांगड़ी चैक की तपागच्छीय पौषधशाला में प्रवर्तिनी शशि प्रभा जी.सा की शिष्या साध्वी श्रमणी प्रज्ञा ने कहा कि पर्युषण का पावन पर्व अपने आप का आत्म परीक्षण करने, कर्मबंधनों से बचने और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का संदेश देता है। पर्युषण जप, तप व साधना करने, दिल से क्षमापना करने से मुक्ति के द्वार खुल जाते है। पर्व ही नहीं हमेशा साधना, आराधना व भक्ति के मार्ग पर बढ़ना है, कर्मबंधनों व पापों से बचना है तथा सभी तरह के जीवों को अभय दान देना है।
लाचार बीमार श्रावक श्राविकाएं देव दर्शन से हुए अभिभूत
खरतरगच्छ युवा परिषद के अध्यक्ष राजीव खजांची व सचिव मनीष नाहटा के नेतृृत्व में टीम के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कोचरों का चैक, बांठियों का चैक व खजांची मोहल्ला और अन्य जैन बहुल्य मोहल्लों में वृृद्ध, लाचार श्रावक-श्राविकाओं को देव पूजन व दर्शन करवाएं । चैत्य वंदन के दौरान भगवान महावीर की प्रतिमा का पूजन नवंकार महामंत्र और स्तवन ’वीर प्रभु स्वीकार करो, प्रणाम मेरा’’ आदि स्तवनों से करवाया गया। कोचरों के चैक में शांति देवी कोचर व अन्य वयोवृद्ध श्राविकाएं के पूजन के वक्त भाव विभोर हो गई। उनके नैन खुशी व भक्ति से छलक गए। उन्होंने के.यू.प. के सदस्यों व जिन शासन की सराहना करते हुए देव, गुरु व धर्म की वंदना करते हुए उसे सर्वोपरि बताया। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय विजय चंद खजांची की 81 धर्मपत्नी की किरणदेवी खजांची भगवान की पूजा के दौरान कुछ वर्षो से शारीरिक अवस्था के कारण सुषुप्त धार्मिक-आध्यात्मिक चेतना पुनः जागृृत हो गई। उन्होंने प्रभु के स्तवन को साथ में गुनगुनाकर प्रभु भक्ति की। इसी तरह वृृद्धावस्था में बिस्तर पर पिछले कुछ वर्षो से जीवन गुजार रहीं वृृद्धा ने कहा कि सपने में भी नहीं सोचा था कि इस तरह के.यू.प. के सदस्य प्रभु की पूजा उनको करवाएंगे। उन्होंने परमात्मा, साध्वीवृृंद व के.यू.प. के सदस्यों की भावना की अनुमोदना मन के अंतर भावों से की। उनके परिजनों ने भी के.यू.के. इस कार्य की सराहना व अनुमोदना की।




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