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कल्पसूत्र जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख-साध्वीश्री शशि प्रभाजी
🙏
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
फोटो कैप्शन-
1. साध्वीश्री शशिप्रभा जी म.सा. के सान्निध्य मंें बुधवार को ढढ्ढा कोटड़ी में कल्प सूत्र का वांचन करते हुए साध्वीश्री सौम्यगुणाजी
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कल्पसूत्र जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख-साध्वीश्री शशि प्रभाजी. म.सा.
के.यू.की तीन टीमों ने 24 वृृद्धजनों के घर जाकर करवाई देव वंदना व पूजा
बीकानेर, 28 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.ने मंगलवार को रांगड़ी चैक के सुगनजी महाराज के उपासरे व बागड़ी मोहल्ले की ढढ्ढा कोटड़ी में पर्युषण पर्व के तीसरे जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख ’’कल्पसूत्र’ का वाचन विवेचन शुरू किया। ढढ्ढा कोटड़ी में साध्वी सौम्यगुणा, जैन श्वेताम्बर तपागच्छीय पौषधशाला में साध्वीश्री श्रमणी प्रज्ञा, दस्साणी चैक के नवंकार भवन में साध्वीश्री संवेग प्रज्ञा और उदयरामसर के जैन मंदिर में संयम प्रज्ञा ने प्रवचन व कल्पसूत्र का वर्णन किया ।
सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार को कल्पसूत्र का वांचन करते हुए साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने कहा कि जैन धर्म के 45 आगमों में यह प्रमुख धर्मशास्त्र है। पर्युषण पर्व के दौरान जैन मुनि व साध्वीवृृंद इसका वाचन-विवेचन कर तीर्थंकरों की स्तुति वंदना व जिनशासन की प्रभावना करते है। श्रावक-श्राविकाएं पूर्ण धार्मिक भावना के साथ इसका श्रवण करते है। इसमें जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के जीवन व संदेश, आदर्श के साथ अनेक कथानकों, के माध्यम से आत्म कल्याण का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब ढाई सौ साल जैन धर्म के पहले 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के छठे उतराधिकारी भ्रदबाहु स्वामी ने प्राकृत भाषा में इसकी रचना की। इसकी रचना शैली मधुर तथा इसकी पदावली ललित-कोमल है। जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक श्रावक-श्राविकाओं अन्य कई गच्छ व समुदाय के मुनि व साध्वीवृंद, श्रावक-श्राविकाएं आत्मीय भाव से श्रवण करते है।ं
प्रवर्तिनी साध्वीश्री बताया हजारों की संख्या में कल्पसूत्र की प्राचीन हस्तलिखित प्रतियां आज भी ज्ञान भंडारों में सुरक्षित है। बीकानेर के राजस्थान राज्य अभिलेखगार, प्राच्य विद्यापीठ, अभय जैन ग्रंथालय, कई उपासरों और मंदिरों में ताड़पत्र, भोजपत्र, कागज पर अंकित किए हुए कल्पसूत्र विद्यमान है। कल्पसूत्र में सोने व चांदी की स्याही का उपयोग करते हुए परमात्मा के जीवन आदर्शों का चित्रांकन भी किया हुआ है। पुरातत्व दृृष्टि से महत्वपूर्ण अत्यंत मूल्यवान कल्पसूत्र की हस्त लिखित प्रतियां भारतीय जैन इतिहास व धर्म-संस्कृति की अक्षुण व अनमोल धरोहर है। उन्होंने कहा कि केवल पर्युषण पर्व के दौरान केवल कल्पसूत्र के श्रवण करने तक ही सीमित नहीं रखे। इस महान ग्रंथ के उदाहरणों व संदेशों को आत्मसात करते हुए आत्म परमात्मा की साधना करें। कर्मबंधन से बचे तथा सत्य, अहिंसा, अचैर्य, अस्तेय व ब्रह्मचर्य पांच महाव्रतों की पालना करें। जप,तप व स्वाध्याय, देव, गुरु व धर्म की आराधना करते हुए मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ें।
सुगनजी महाराज के उपासरे में कल्पसूत्र वांचन-विवेचन का लाभ गंगाशहर के शांतिलाल, प्रदीप व पवन बैद ने लिया। वहीं पांच ज्ञान-मतिज्ञान, श्रुत ज्ञान, अवधिज्ञान, पर्यवज्ञान व केवल्य ज्ञान की बोलियां लगाई गई।
के.यू.प. की तीन टोलियों ने करवया वृृद्धजनों को पूजन
खरतरगच्छ युवा परिषद के पदाधिकारियों व सदस्यों की तीन टोलियों के लगभग दो दर्जन श्रावकों ने बुधवार को कोचरों का चैक, छबीलीघाटी, दस्सानी चैक, सुराणों का चैक व गोलछा मोहल्ले में 24 घरों में जाकर लाचार, बीमार व वृद्ध तथा किसी कारण से मंदिर व उपासरे में नहीं आ पाने वाले बुजुर्गों को परमात्मा का पूजन करवाया। के.यू.के. सदस्यों की भक्ति भाव से करवाई जा रही पूजा से अनेक वयोवृृद्ध व लाचार श्रावक-श्राविकाओं ने आत्मीय भाव से प्रभु का स्तवन व वंदन और पूजन किया तथा के.यू.के.सदस्यों के नवाचार की भरपुर अनुमोदना की।
कल्पसूत्र जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख-साध्वीश्री शशि प्रभाजी
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1. साध्वीश्री शशिप्रभा जी म.सा. के सान्निध्य मंें बुधवार को ढढ्ढा कोटड़ी में कल्प सूत्र का वांचन करते हुए साध्वीश्री सौम्यगुणाजी
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कल्पसूत्र जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख-साध्वीश्री शशि प्रभाजी. म.सा.
के.यू.की तीन टीमों ने 24 वृृद्धजनों के घर जाकर करवाई देव वंदना व पूजा
बीकानेर, 28 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवर्तिनी वरिष्ठ साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा.ने मंगलवार को रांगड़ी चैक के सुगनजी महाराज के उपासरे व बागड़ी मोहल्ले की ढढ्ढा कोटड़ी में पर्युषण पर्व के तीसरे जैन धर्म के 45 आगमों में प्रमुख ’’कल्पसूत्र’ का वाचन विवेचन शुरू किया। ढढ्ढा कोटड़ी में साध्वी सौम्यगुणा, जैन श्वेताम्बर तपागच्छीय पौषधशाला में साध्वीश्री श्रमणी प्रज्ञा, दस्साणी चैक के नवंकार भवन में साध्वीश्री संवेग प्रज्ञा और उदयरामसर के जैन मंदिर में संयम प्रज्ञा ने प्रवचन व कल्पसूत्र का वर्णन किया ।
सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार को कल्पसूत्र का वांचन करते हुए साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने कहा कि जैन धर्म के 45 आगमों में यह प्रमुख धर्मशास्त्र है। पर्युषण पर्व के दौरान जैन मुनि व साध्वीवृृंद इसका वाचन-विवेचन कर तीर्थंकरों की स्तुति वंदना व जिनशासन की प्रभावना करते है। श्रावक-श्राविकाएं पूर्ण धार्मिक भावना के साथ इसका श्रवण करते है। इसमें जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के जीवन व संदेश, आदर्श के साथ अनेक कथानकों, के माध्यम से आत्म कल्याण का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब ढाई सौ साल जैन धर्म के पहले 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के छठे उतराधिकारी भ्रदबाहु स्वामी ने प्राकृत भाषा में इसकी रचना की। इसकी रचना शैली मधुर तथा इसकी पदावली ललित-कोमल है। जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक श्रावक-श्राविकाओं अन्य कई गच्छ व समुदाय के मुनि व साध्वीवृंद, श्रावक-श्राविकाएं आत्मीय भाव से श्रवण करते है।ं
प्रवर्तिनी साध्वीश्री बताया हजारों की संख्या में कल्पसूत्र की प्राचीन हस्तलिखित प्रतियां आज भी ज्ञान भंडारों में सुरक्षित है। बीकानेर के राजस्थान राज्य अभिलेखगार, प्राच्य विद्यापीठ, अभय जैन ग्रंथालय, कई उपासरों और मंदिरों में ताड़पत्र, भोजपत्र, कागज पर अंकित किए हुए कल्पसूत्र विद्यमान है। कल्पसूत्र में सोने व चांदी की स्याही का उपयोग करते हुए परमात्मा के जीवन आदर्शों का चित्रांकन भी किया हुआ है। पुरातत्व दृृष्टि से महत्वपूर्ण अत्यंत मूल्यवान कल्पसूत्र की हस्त लिखित प्रतियां भारतीय जैन इतिहास व धर्म-संस्कृति की अक्षुण व अनमोल धरोहर है। उन्होंने कहा कि केवल पर्युषण पर्व के दौरान केवल कल्पसूत्र के श्रवण करने तक ही सीमित नहीं रखे। इस महान ग्रंथ के उदाहरणों व संदेशों को आत्मसात करते हुए आत्म परमात्मा की साधना करें। कर्मबंधन से बचे तथा सत्य, अहिंसा, अचैर्य, अस्तेय व ब्रह्मचर्य पांच महाव्रतों की पालना करें। जप,तप व स्वाध्याय, देव, गुरु व धर्म की आराधना करते हुए मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ें।
सुगनजी महाराज के उपासरे में कल्पसूत्र वांचन-विवेचन का लाभ गंगाशहर के शांतिलाल, प्रदीप व पवन बैद ने लिया। वहीं पांच ज्ञान-मतिज्ञान, श्रुत ज्ञान, अवधिज्ञान, पर्यवज्ञान व केवल्य ज्ञान की बोलियां लगाई गई।
के.यू.प. की तीन टोलियों ने करवया वृृद्धजनों को पूजन
खरतरगच्छ युवा परिषद के पदाधिकारियों व सदस्यों की तीन टोलियों के लगभग दो दर्जन श्रावकों ने बुधवार को कोचरों का चैक, छबीलीघाटी, दस्सानी चैक, सुराणों का चैक व गोलछा मोहल्ले में 24 घरों में जाकर लाचार, बीमार व वृद्ध तथा किसी कारण से मंदिर व उपासरे में नहीं आ पाने वाले बुजुर्गों को परमात्मा का पूजन करवाया। के.यू.के. सदस्यों की भक्ति भाव से करवाई जा रही पूजा से अनेक वयोवृृद्ध व लाचार श्रावक-श्राविकाओं ने आत्मीय भाव से प्रभु का स्तवन व वंदन और पूजन किया तथा के.यू.के.सदस्यों के नवाचार की भरपुर अनुमोदना की।




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