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विश्वविद्यालयों की स्थिति ठीक नहीं है : नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई
राजस्थान विधानसभा में नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन ) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लिया
राज्य विधानसभा में आज राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पेश किया गया । सरकार द्वारा प्रस्तुत बिलों के प्रस्तावित किए गए ड्राफ्ट पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने कहा कि हमारे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विश्वविद्यालयों की स्थिति ठीक नहीं है ।
उच्च-शिक्षण संस्थानों में ज्यों-ज्यों सरकारी दखल बढ़ता जा रहा है, ये संस्थान अपनी रंगत खोते जा रहे हैं । उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस यूनिवर्सिटी में 25 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हों, वहां महज 5 विदेशी छात्र अध्ययनरत है, इससे जाहिर होता है कि दुनिया हमारे विश्वविद्यालयों की कितनी प्रतिष्ठा बची है ?
बिश्नोई ने कहा कि प्रस्तुत बिल में इन संस्थानों की स्वायत्ता को और कम करते हुए इनमें सरकारी दखल बढ़ाने की कोशिशें प्रस्तावित की गई हैं । कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च पद होता है, उसकी गरिमा को कैसे कम किया जाए, ऐसे प्रावधानों को सम्मिलित किया गया है, अतः हम इस बिल का विरोध करते हैं ।
*तकनीकी विश्वविद्यालय में सरकार का क्या योगदान ?*
श्री बिश्नोई ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालयों में सरकार का क्या योगदान है ? यह तो स्व-वित्तपोषित संस्थान है, इनमें सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने पर सरकार क्यों आमादा है, यह समझ से परे है ।तकनीकी विश्व विद्यालय में कुलपति के रूप में नियुक्ति किये जाने के संबंध में संशोधन प्रस्तावित किया है उनमें किसी प्रतिष्ठित शोध या शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन में किसी समकक्ष पद को परिभाषित नहीं किया गया है ।
यह मालूम ही नहीं होता है कि प्रख्यात शिक्षाविद् कौन होगा और कौन सक्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिक आचार वाला व्यक्ति होगा ? इससे सम्बन्धित मानक बिल में स्पष्ट नहीं है । इससे जाहिर होता है कि प्रख्यात शिक्षाविद् का निर्धारण केवल सरकार की मर्जी से ही किया जाएगा और यह संशोधन कत्तई उचित नहीं है । उन्होंने आसन के माध्यम से सरकार को सुझाया कि समकक्ष पद अर्थात जिनका वेतनमान प्रोफेसर ग्रेड के बराबर हो ।
प्रतिष्ठित शोध और शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन का मतलब CSIR शोध संगठन या केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शोध संगठन या राज्य सरकार द्वारा स्थापित शोध संगठन या संसद/विधान सभा द्वारा स्थापित शोध संगठन, केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन या राज्य सरकार द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन या संसद/विधान सभा द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन, प्राइवेट शोध या शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन नहीं । महाविद्यालय भी नहीं क्योंकि UGC रेगुलेशन में महाविद्यालय का नाम नहीं हैं ।
*कृषि विश्व विद्यालय पर भी चिंता करें सरकार*
श्री बिश्नोई ने कहा कि स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर की भी सरकार को चिन्ता करनी चाहिए । इस विश्वविद्यालय की क्या स्थिति है ? उसको संसाधन उपलब्ध करवाने की बात हो, कृषि विश्वविद्यालय पर रिटायर्ड लोग हुए उनकी पेंशन का भार लाद दिया गया । कृषि विश्व विद्यालयों के वित्तीय-संसाधन सीमित है । क्योंकि इनके पांच-पांच टुकड़े कर दिये गए, इन बातों पर चिन्ता करते तो अच्छा रहता ।
श्री बिश्नोई ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी(नियुक्ति के लिये चयन) में जो प्रावधान लाए गए हैं, उनमें 1974 के राजस्थान अधिनियम स. 18 की धारा 10 के स्थान पर सुसंगत विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और पदों का आरक्षण ऐसा होगा जैसा कि राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों और पदों के आरक्षण से सम्बंधित तत्समय प्रवृत किसी विधि के द्वारा या अधीन विनिर्दिष्ट किया जाए ।
विधायक बिश्नोई ने सुझाव दिया कि इस अधिनियम के प्रावधान संसद द्वारा पारित अधिनियम स. 10, जो कि भारत के राजपत्र में 9 जुलाई 2019 को प्रकाशित हुआ और यूजीसी के आदेश स. F1-5/2006(SCT)8.3.2019 के खिलाफ है । इस अधिनियम स. 10 (वर्ष 2019) और यूजीसी के आदेश के अनुसार यूनिवर्सिटी /संस्था को एक इकाई मानकर सभी आरक्षित वर्गों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए । श्री बिश्नोई ने उपरोक्त विधेयकों को असवैधानिक बताते हुए कहा कि इन विधेयकों को पारित नहीं किया जाए तथा इसे जनमत जानने के लिए भेजा जाना उचित रहेगा ।
*राजस्थान विधानसभा में नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन ) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लिया *
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राजस्थान विधानसभा में नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन ) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लिया
राज्य विधानसभा में आज राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पेश किया गया । सरकार द्वारा प्रस्तुत बिलों के प्रस्तावित किए गए ड्राफ्ट पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने कहा कि हमारे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विश्वविद्यालयों की स्थिति ठीक नहीं है ।
उच्च-शिक्षण संस्थानों में ज्यों-ज्यों सरकारी दखल बढ़ता जा रहा है, ये संस्थान अपनी रंगत खोते जा रहे हैं । उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस यूनिवर्सिटी में 25 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हों, वहां महज 5 विदेशी छात्र अध्ययनरत है, इससे जाहिर होता है कि दुनिया हमारे विश्वविद्यालयों की कितनी प्रतिष्ठा बची है ?
बिश्नोई ने कहा कि प्रस्तुत बिल में इन संस्थानों की स्वायत्ता को और कम करते हुए इनमें सरकारी दखल बढ़ाने की कोशिशें प्रस्तावित की गई हैं । कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च पद होता है, उसकी गरिमा को कैसे कम किया जाए, ऐसे प्रावधानों को सम्मिलित किया गया है, अतः हम इस बिल का विरोध करते हैं ।
*तकनीकी विश्वविद्यालय में सरकार का क्या योगदान ?*
श्री बिश्नोई ने कहा कि तकनीकी विश्वविद्यालयों में सरकार का क्या योगदान है ? यह तो स्व-वित्तपोषित संस्थान है, इनमें सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाने पर सरकार क्यों आमादा है, यह समझ से परे है ।तकनीकी विश्व विद्यालय में कुलपति के रूप में नियुक्ति किये जाने के संबंध में संशोधन प्रस्तावित किया है उनमें किसी प्रतिष्ठित शोध या शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन में किसी समकक्ष पद को परिभाषित नहीं किया गया है ।
यह मालूम ही नहीं होता है कि प्रख्यात शिक्षाविद् कौन होगा और कौन सक्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिक आचार वाला व्यक्ति होगा ? इससे सम्बन्धित मानक बिल में स्पष्ट नहीं है । इससे जाहिर होता है कि प्रख्यात शिक्षाविद् का निर्धारण केवल सरकार की मर्जी से ही किया जाएगा और यह संशोधन कत्तई उचित नहीं है । उन्होंने आसन के माध्यम से सरकार को सुझाया कि समकक्ष पद अर्थात जिनका वेतनमान प्रोफेसर ग्रेड के बराबर हो ।
प्रतिष्ठित शोध और शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन का मतलब CSIR शोध संगठन या केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शोध संगठन या राज्य सरकार द्वारा स्थापित शोध संगठन या संसद/विधान सभा द्वारा स्थापित शोध संगठन, केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन या राज्य सरकार द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन या संसद/विधान सभा द्वारा स्थापित शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन, प्राइवेट शोध या शैक्षणिक प्रशासनिक संगठन नहीं । महाविद्यालय भी नहीं क्योंकि UGC रेगुलेशन में महाविद्यालय का नाम नहीं हैं ।
*कृषि विश्व विद्यालय पर भी चिंता करें सरकार*
श्री बिश्नोई ने कहा कि स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर की भी सरकार को चिन्ता करनी चाहिए । इस विश्वविद्यालय की क्या स्थिति है ? उसको संसाधन उपलब्ध करवाने की बात हो, कृषि विश्वविद्यालय पर रिटायर्ड लोग हुए उनकी पेंशन का भार लाद दिया गया । कृषि विश्व विद्यालयों के वित्तीय-संसाधन सीमित है । क्योंकि इनके पांच-पांच टुकड़े कर दिये गए, इन बातों पर चिन्ता करते तो अच्छा रहता ।
श्री बिश्नोई ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी(नियुक्ति के लिये चयन) में जो प्रावधान लाए गए हैं, उनमें 1974 के राजस्थान अधिनियम स. 18 की धारा 10 के स्थान पर सुसंगत विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और पदों का आरक्षण ऐसा होगा जैसा कि राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों और पदों के आरक्षण से सम्बंधित तत्समय प्रवृत किसी विधि के द्वारा या अधीन विनिर्दिष्ट किया जाए ।
विधायक बिश्नोई ने सुझाव दिया कि इस अधिनियम के प्रावधान संसद द्वारा पारित अधिनियम स. 10, जो कि भारत के राजपत्र में 9 जुलाई 2019 को प्रकाशित हुआ और यूजीसी के आदेश स. F1-5/2006(SCT)8.3.2019 के खिलाफ है । इस अधिनियम स. 10 (वर्ष 2019) और यूजीसी के आदेश के अनुसार यूनिवर्सिटी /संस्था को एक इकाई मानकर सभी आरक्षित वर्गों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए । श्री बिश्नोई ने उपरोक्त विधेयकों को असवैधानिक बताते हुए कहा कि इन विधेयकों को पारित नहीं किया जाए तथा इसे जनमत जानने के लिए भेजा जाना उचित रहेगा ।
*राजस्थान विधानसभा में नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन ) विधेयक 2019, विश्वविद्यालयो की विधियां (संशोधन) विधेयक 2019 एवं राजस्थान विश्वविद्यालयो के अध्यापक तथा अधिकारी (नियुक्ति के लिये चयन) (संशोधन) विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लिया *



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