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चिकित्सक मरीजों से रखे मित्रवत व्यवहार
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चिकित्सक मरीजों से रखे मित्रवत व्यवहार
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चिकित्सक मरीजों से रखे मित्रवत व्यवहार
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चिकित्सक मरीजों से रखे मित्रवत व्यवहार
बीकानेर। चिकित्सक को मरीज के ईलाज के सारे रिस्क व उपलब्ध उपचार के बारे में समझाकर ही मरीज का उपचार करना चाहिए। ताकि मरीज सन्तुष्ट व दिमागी तौर पर परिपक्व हो जाएं। ये उद्गार लीवर ट्रांसप्लाट सर्जन डंा. अंकुर अटल गुप्ता ने लालगढ़ पैलेस में आयोजित चिकित्सकों की सेमीनार में कहे।
डां. गुप्ता मेडिकल बज पत्रिका के दूसरे वार्षिक कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेडिको लीगल केसेस की संभावना कम करने के लिए डॉक्टरों को मरीजों से हर समय कम्यूनिकेशन बना के रखना चाहिए। कागजी कार्यवाही भी पूर्ण होना चाहिए। मरीज के परिजनों को मरीज की स्थिति के बारे में हर थोड़े समय में अवगत कराकर और इलाज के डिस्कशन में मरीज को साथ लेकर चलने से ऐसे केसेज होने की संभावना को कम किया जा सकता है।
डां. अंकुर ने बाताया की आज के युग में जो डॉक्टर्स के साथ हिंसा हो रही है यह विचारणीय है।
इसको रोकने के लिए डाक्टर्स को मरीज के साथ शुरुआत से ही दोस्ताना व्यवहार करके उसके ईलाज के सभी पहलुओं व जोखिमों के बारे मे समझा देना चाहिये। उसके बचने के चांस के बारे मरीज व परीजनों दोनों को सही से समझा देना चाहिये। डां. अंकुर ने बताया की डॉक्टर्स को मरीज के ईलाज के साथ उससे संबधित कागजी कार्यवाही भी पूरी करनी चाहिये। व कभी भी मरीज को ओवर प्रोमिस नहीं करना चाहिये बल्की डाक्टर्स को ओवर प्राफार्म करना चाहिये जिससे मरीज का ईलाज जल्दी व अच्छा हो सके। मरीज को उसके उपचार के बारे में उपलब्ध सभी ऑपशन व होने वाले सारे रिस्क समझाते हुये कार्य करना चाहिये। इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ अरूण मित्रा,विशिष्ट अतिथि डॉ अमीलाल भट्ट,डॉ एस एन हर्ष सहित अनेक वक्ताओं ने विचार व्यक्त किये। इस दौरान अनेक चिकित्सकों का सम्मान किया गया। सेमीनार के दौरान आयोजित पांच सत्रों में राज्यभर से आए चिकित्सकों ने अपने विचार रखे।
बीकानेर। चिकित्सक को मरीज के ईलाज के सारे रिस्क व उपलब्ध उपचार के बारे में समझाकर ही मरीज का उपचार करना चाहिए। ताकि मरीज सन्तुष्ट व दिमागी तौर पर परिपक्व हो जाएं। ये उद्गार लीवर ट्रांसप्लाट सर्जन डंा. अंकुर अटल गुप्ता ने लालगढ़ पैलेस में आयोजित चिकित्सकों की सेमीनार में कहे।
डां. गुप्ता मेडिकल बज पत्रिका के दूसरे वार्षिक कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेडिको लीगल केसेस की संभावना कम करने के लिए डॉक्टरों को मरीजों से हर समय कम्यूनिकेशन बना के रखना चाहिए। कागजी कार्यवाही भी पूर्ण होना चाहिए। मरीज के परिजनों को मरीज की स्थिति के बारे में हर थोड़े समय में अवगत कराकर और इलाज के डिस्कशन में मरीज को साथ लेकर चलने से ऐसे केसेज होने की संभावना को कम किया जा सकता है।
डां. अंकुर ने बाताया की आज के युग में जो डॉक्टर्स के साथ हिंसा हो रही है यह विचारणीय है।
इसको रोकने के लिए डाक्टर्स को मरीज के साथ शुरुआत से ही दोस्ताना व्यवहार करके उसके ईलाज के सभी पहलुओं व जोखिमों के बारे मे समझा देना चाहिये। उसके बचने के चांस के बारे मरीज व परीजनों दोनों को सही से समझा देना चाहिये। डां. अंकुर ने बताया की डॉक्टर्स को मरीज के ईलाज के साथ उससे संबधित कागजी कार्यवाही भी पूरी करनी चाहिये। व कभी भी मरीज को ओवर प्रोमिस नहीं करना चाहिये बल्की डाक्टर्स को ओवर प्राफार्म करना चाहिये जिससे मरीज का ईलाज जल्दी व अच्छा हो सके। मरीज को उसके उपचार के बारे में उपलब्ध सभी ऑपशन व होने वाले सारे रिस्क समझाते हुये कार्य करना चाहिये। इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ अरूण मित्रा,विशिष्ट अतिथि डॉ अमीलाल भट्ट,डॉ एस एन हर्ष सहित अनेक वक्ताओं ने विचार व्यक्त किये। इस दौरान अनेक चिकित्सकों का सम्मान किया गया। सेमीनार के दौरान आयोजित पांच सत्रों में राज्यभर से आए चिकित्सकों ने अपने विचार रखे।




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