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Khabron Me Bikaner 🎤
रायुलेसं प्रज्ञालय में कवि बोले - बारिश में पता चले है, अपने किरदार का
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
✍️
बारिश में पता चले है, अपने किरदार का
बीकानेर रविवार 23 जून 2019 ।
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं
राजस्थानी युवा लेखक संघ के साझा
साहित्यिक मासिक आयोजनों की
शृंखला के तहत 'कवि बनाम कविता
कार्यक्रम की चौथी कड़ी हिन्दी-
राजस्थानी के वरिष्ठ कवि, कथाकार
प्रमोद शर्मा के मुख्य आतिथ्य एवं
राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल
रंगा की अध्यक्षता में नालन्दा पब्लिक
सी.सै. स्कूल के सृजन सदन में
आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रमोद
शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन के
माध्यम से नगर की काव्य चेतना और
नव काव्य सृजन को नए आयाम मिल
रहे हैं। इस अवसर पर प्रमोद शर्मा ने
बरसात पर केन्द्रित अपनी हिन्दी गजल
के उम्दा शेर 'बारिश है क्या, पता आए न
आए/बारिश में पता चले है, अपने
किरदार का के माध्यम से बरसात को
एक नई रंगत देते हुए बादल और बारिश
की कैमिस्ट्री को नई व्यंजना से श्रोताओं
को रोमांचित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते
हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार
कमल रंगा ने कहा कि 'बरसात को
लेकर हिन्दी, राजस्थानी और उर्दू की एक
से एक उम्दा रचनाओं का वाचन होना
और साथ ही 'बरसात को विभिन्न कोणों
से देखते हुए 'बरसात संग बादलों की
संवेदना और वेदना को बेहतरीन ढंग से
कविता में ढालना बीकानेर की काव्य
परंपरा में एक नव पहल तो है ही साथ ही
काव्य को लेकर एक सार्थक उपक्रम भी
है। इस अवसर पर रंगा ने 'बरसात पर
केन्द्रित अपनी ताजा राजस्थानी रचना
'घाता सागी र मत, करां बिरखा साचे
परेम री/आव चौफेर सींचा बूंद-बूंद परेम
राग की प्रस्तुति देकर राजस्थानी की
मठोठ और मिठास से श्रोताओं को
आनंदित किया। वरिष्ठ शायर जाकिर
अदीब ने 'बरसात पर केन्द्रित अपनी
नई गजल की उम्दा शेर 'अब उजाला
कहाँ है बारिश का, किन अंधेरों में खो
गई बारिश... की प्रस्तुति देकर वाहवाही
लूटी। 'कवि बनाम कविता में 'बरसात
का रस बहाती काव्यधारा में युवा शायर
कासिम बीकानेरी ने अपनी ताजा गजल
के शेर 'या रब तू कर दे फिर से अता
मौसमे बरसात के माध्यम से 'बरसात
के कई रंगों की रंगत बिखेरी। तो युवा
कवि पुखराज सोलंकी ने अपनी नई
रचना 'जाने किसने घोल दी शराब इन
बौछारों में के माध्यम से बरसात को
अलग कोण से देखते हुए अपनी बात
कही। कवि राजाराम स्वर्णकार ने बरसात
पर केन्द्रित राजस्थानी में हाइकू की
प्रस्तुति दी 'बिरखा गीत छम-छम संगीत,
गावे है बूंदा, 'बरसात की विभिन्न
स्थितियों-परिस्थितियों को अपनी काव्य
रचना में ढाला। कवि हनुमन्त गौड़ ने
अपनी ताजा गजल के उम्दा शेर 'मेरे
लिए ये बारिश... पेश कर गजल की
सौरम को बिखेरा
शायर सागर सिद्दीकी, माजिद खां गौरी,
बी.डी. हर्ष, तामेश्वर शुक्ल 'तारक ने
प्रभावी प्रस्तुति दी तो वरिष्ठ कवयित्री डॉ.
कृष्णा आचार्य ने अपनी सस्वर प्रस्तुति
देते हुए राजस्थानी में 'बरसो रे बरसो
हारे मरुधर देस बाळा बादळिया जी के
माध्यम से राजस्थान में बरसात के महत्त्व
को उजागर किया। हास्य कवि बाबूलाल
छंगाणी ने 'महलों में जहाँ हर्ष रहे, झोंपड़ी
रही सुस्ताय के माध्यम से बरसात को
लेकर मानवीय असमानता को सामने
किया। वहीं कवि मईनुद्दीन 'नाचीज ने
अपनी रचना 'बूंद-बूंद से धरती को नमन
कर के माध्यम से बरसात और धरती
की महत्ता को उजागर किया।कार्यक्रम में
शिवशंकर भादाणी, गिरिराज पारीक,
हरिनारायण व्यास, प्रेमनारायण व्यास,
बी.डी. भादाणी, राजेश रंगा, हरिनारायण
आचार्य, भवानीसिंह, डॉ. अजय जोशी,
आशीष रंगा, कार्तिक मोदी आदि सुधि
श्रोताओं ने अपनी बात रखते हुए
'बरसात पर केन्द्रित कविताओं का यह एक
अनूठा आयोजन बताया। कार्यक्रम का
संचालन कासिम बीकानेरी ने किया।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
🙏
रायुलेसं प्रज्ञालय में कवि बोले - बारिश में पता चले है, अपने किरदार का
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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बारिश में पता चले है, अपने किरदार का
बीकानेर रविवार 23 जून 2019 ।
बीकानेर। प्रज्ञालय संस्थान एवं
राजस्थानी युवा लेखक संघ के साझा
साहित्यिक मासिक आयोजनों की
शृंखला के तहत 'कवि बनाम कविता
कार्यक्रम की चौथी कड़ी हिन्दी-
राजस्थानी के वरिष्ठ कवि, कथाकार
प्रमोद शर्मा के मुख्य आतिथ्य एवं
राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल
रंगा की अध्यक्षता में नालन्दा पब्लिक
सी.सै. स्कूल के सृजन सदन में
आयोजित की गई। मुख्य अतिथि प्रमोद
शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन के
माध्यम से नगर की काव्य चेतना और
नव काव्य सृजन को नए आयाम मिल
रहे हैं। इस अवसर पर प्रमोद शर्मा ने
बरसात पर केन्द्रित अपनी हिन्दी गजल
के उम्दा शेर 'बारिश है क्या, पता आए न
आए/बारिश में पता चले है, अपने
किरदार का के माध्यम से बरसात को
एक नई रंगत देते हुए बादल और बारिश
की कैमिस्ट्री को नई व्यंजना से श्रोताओं
को रोमांचित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते
हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार
कमल रंगा ने कहा कि 'बरसात को
लेकर हिन्दी, राजस्थानी और उर्दू की एक
से एक उम्दा रचनाओं का वाचन होना
और साथ ही 'बरसात को विभिन्न कोणों
से देखते हुए 'बरसात संग बादलों की
संवेदना और वेदना को बेहतरीन ढंग से
कविता में ढालना बीकानेर की काव्य
परंपरा में एक नव पहल तो है ही साथ ही
काव्य को लेकर एक सार्थक उपक्रम भी
है। इस अवसर पर रंगा ने 'बरसात पर
केन्द्रित अपनी ताजा राजस्थानी रचना
'घाता सागी र मत, करां बिरखा साचे
परेम री/आव चौफेर सींचा बूंद-बूंद परेम
राग की प्रस्तुति देकर राजस्थानी की
मठोठ और मिठास से श्रोताओं को
आनंदित किया। वरिष्ठ शायर जाकिर
अदीब ने 'बरसात पर केन्द्रित अपनी
नई गजल की उम्दा शेर 'अब उजाला
कहाँ है बारिश का, किन अंधेरों में खो
गई बारिश... की प्रस्तुति देकर वाहवाही
लूटी। 'कवि बनाम कविता में 'बरसात
का रस बहाती काव्यधारा में युवा शायर
कासिम बीकानेरी ने अपनी ताजा गजल
के शेर 'या रब तू कर दे फिर से अता
मौसमे बरसात के माध्यम से 'बरसात
के कई रंगों की रंगत बिखेरी। तो युवा
कवि पुखराज सोलंकी ने अपनी नई
रचना 'जाने किसने घोल दी शराब इन
बौछारों में के माध्यम से बरसात को
अलग कोण से देखते हुए अपनी बात
कही। कवि राजाराम स्वर्णकार ने बरसात
पर केन्द्रित राजस्थानी में हाइकू की
प्रस्तुति दी 'बिरखा गीत छम-छम संगीत,
गावे है बूंदा, 'बरसात की विभिन्न
स्थितियों-परिस्थितियों को अपनी काव्य
रचना में ढाला। कवि हनुमन्त गौड़ ने
अपनी ताजा गजल के उम्दा शेर 'मेरे
लिए ये बारिश... पेश कर गजल की
सौरम को बिखेरा
शायर सागर सिद्दीकी, माजिद खां गौरी,
बी.डी. हर्ष, तामेश्वर शुक्ल 'तारक ने
प्रभावी प्रस्तुति दी तो वरिष्ठ कवयित्री डॉ.
कृष्णा आचार्य ने अपनी सस्वर प्रस्तुति
देते हुए राजस्थानी में 'बरसो रे बरसो
हारे मरुधर देस बाळा बादळिया जी के
माध्यम से राजस्थान में बरसात के महत्त्व
को उजागर किया। हास्य कवि बाबूलाल
छंगाणी ने 'महलों में जहाँ हर्ष रहे, झोंपड़ी
रही सुस्ताय के माध्यम से बरसात को
लेकर मानवीय असमानता को सामने
किया। वहीं कवि मईनुद्दीन 'नाचीज ने
अपनी रचना 'बूंद-बूंद से धरती को नमन
कर के माध्यम से बरसात और धरती
की महत्ता को उजागर किया।कार्यक्रम में
शिवशंकर भादाणी, गिरिराज पारीक,
हरिनारायण व्यास, प्रेमनारायण व्यास,
बी.डी. भादाणी, राजेश रंगा, हरिनारायण
आचार्य, भवानीसिंह, डॉ. अजय जोशी,
आशीष रंगा, कार्तिक मोदी आदि सुधि
श्रोताओं ने अपनी बात रखते हुए
'बरसात पर केन्द्रित कविताओं का यह एक
अनूठा आयोजन बताया। कार्यक्रम का
संचालन कासिम बीकानेरी ने किया।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️




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