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ग्रामीण हाट मेले में ऊँटनी के दुग्ध उत्पादों की बिक्री
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बीकानेर 07 जून, 2019 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा ग्रामीण हाट में चल रहे मेले में ऊँटनी के दूध व इससे निर्मित दुग्ध उत्पादों आदि की बिक्री की जा रही है। यह मेला जिला प्रषासन, जिला उद्योग केन्द्र, बीकानेर की ओर से ग्रामीण हाट में 06 से 10 जून, तक आयोजित किया जा रहा है।
केन्द्र निदेषक डाॅ.आर.के.सावल ने केन्द्र द्वारा ऊँट के विविध पहलुओं पर किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्याें एवं इस मेले में केन्द्र गतिविधियों पर कहा कि ऊँटनी के दूध व इससे संबद्ध उत्पादों के प्रति आमजन में अभी भी जागरूकता लाई जानी अपेक्षित है, क्योंकि अधिकांष जन इसे केवल बोझा ढोने वाला पशु ही मानते हैं जबकि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने ऊँटनी के दूध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर परखते हुए इस पशु को एक दूधारू पशु के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई है। केन्द्र नियमित रूप से अपने प्रक्षेत्र में उष्ट्र डेयरी का संचालन करता है तथा मिल्क पार्लर पर वैज्ञानिकों की देखरेख में ऊँटनी के दूध से विभिन्न स्वादिष्ट दुग्ध उत्पाद जैसे-कुल्फी, आइसक्रीम, खीर, चाय, काॅफी, सुगन्धित दूध, लस्सी, पेड़ा आदि तैयार किए जाते हैं।
डाॅ.सावल ने कहा कि ऊँटनी के दूध पर एनआरसीसी व वैष्विक शोध इस बात की मांग करती हैं कि आमजन को इस औषधीय गुणों से भरपूर दूध का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि यह विभिन्न मानवीय रोगों यथा-मधुमेह, टी.बी. आॅटिज्म, बच्चों की भोजन-एलर्जी, खून में काॅलेस्ट्राॅल कम करने, सोरायसिस (अपरस), हेपेटाइटिस ‘सी‘ एवं ‘बी‘, कैंसर आदि के प्रबंधन में कारगर साबित हुआ है। साथ ही ऊँटनी का दूध मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में लाभदायक है।
केन्द्र में ऊँटनी के दूध पर अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिक डाॅ.देवेन्द्र कुमार ने कहा कि इस मेले में एनआरसीसी को ऊँटनी के दूध की बिक्री हेतु स्टाॅल के माध्यम दुग्ध उत्पादों एवं दुग्ध उत्पादों का विक्रय किया जा रहा हंै। विनोद कुमार यादव, तकनीकी सहायक ने बताया कि केन्द्र की स्टाॅल में उष्ट्र मींगणी से निर्मित वर्मी कम्पोस्ट भी बिक्री हेतु उपलब्ध है।
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ग्रामीण हाट मेले में ऊँटनी के दुग्ध उत्पादों की बिक्री
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ग्रामीण हाट मेले में ऊँटनी के दुग्ध उत्पादों की बिक्री
केन्द्र निदेषक डाॅ.आर.के.सावल ने केन्द्र द्वारा ऊँट के विविध पहलुओं पर किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्याें एवं इस मेले में केन्द्र गतिविधियों पर कहा कि ऊँटनी के दूध व इससे संबद्ध उत्पादों के प्रति आमजन में अभी भी जागरूकता लाई जानी अपेक्षित है, क्योंकि अधिकांष जन इसे केवल बोझा ढोने वाला पशु ही मानते हैं जबकि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने ऊँटनी के दूध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर परखते हुए इस पशु को एक दूधारू पशु के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई है। केन्द्र नियमित रूप से अपने प्रक्षेत्र में उष्ट्र डेयरी का संचालन करता है तथा मिल्क पार्लर पर वैज्ञानिकों की देखरेख में ऊँटनी के दूध से विभिन्न स्वादिष्ट दुग्ध उत्पाद जैसे-कुल्फी, आइसक्रीम, खीर, चाय, काॅफी, सुगन्धित दूध, लस्सी, पेड़ा आदि तैयार किए जाते हैं।
डाॅ.सावल ने कहा कि ऊँटनी के दूध पर एनआरसीसी व वैष्विक शोध इस बात की मांग करती हैं कि आमजन को इस औषधीय गुणों से भरपूर दूध का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि यह विभिन्न मानवीय रोगों यथा-मधुमेह, टी.बी. आॅटिज्म, बच्चों की भोजन-एलर्जी, खून में काॅलेस्ट्राॅल कम करने, सोरायसिस (अपरस), हेपेटाइटिस ‘सी‘ एवं ‘बी‘, कैंसर आदि के प्रबंधन में कारगर साबित हुआ है। साथ ही ऊँटनी का दूध मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में लाभदायक है।
केन्द्र में ऊँटनी के दूध पर अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिक डाॅ.देवेन्द्र कुमार ने कहा कि इस मेले में एनआरसीसी को ऊँटनी के दूध की बिक्री हेतु स्टाॅल के माध्यम दुग्ध उत्पादों एवं दुग्ध उत्पादों का विक्रय किया जा रहा हंै। विनोद कुमार यादव, तकनीकी सहायक ने बताया कि केन्द्र की स्टाॅल में उष्ट्र मींगणी से निर्मित वर्मी कम्पोस्ट भी बिक्री हेतु उपलब्ध है।
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