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ऊँट अनुसंधान केन्द्र ने ग्रामीण अंचल में किया पशुओं का इलाज
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बीकानेर,29 जून। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) ने शनिवार को जोड़बीड़ ग्रामीण अंचल कोटड़ी गांव में पषु स्वास्थ्य षिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत रखे गए इस षिविर में 127 महिला एवं पुरुष पशुपालक गाय, भैंस, ऊँट, भेड़ व बकरी कुल 654 पशुधन सहित पहुंचे। इन पशुओं का स्वास्थ्य जांच कर इलाज व दवा आदि का वितरण किया गया।
इस अवसर पर ग्रामीण पशुपालकों से चर्चा के दौरान केन्द्र के निदेषक डाॅ.आर.के.सावल ने पशुधन को पशुपालकों की आजीविका का मुख्य साधन बताते हुए कहा कि पशुओं के उचित प्रबंधन आदि की जानकारी से पशुधन स्वस्थ रहेगा तो पर्याप्त उत्पादन लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार निरंतर ऐसी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है ताकि पशुपालक इनका लाभ उठाते हुए अपने जीवन स्तर में सुधार ला सके। उन्होंने पशुपालकों की पशुधन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को सुनते हुए आष्वस्त किया कि एनआरसीसी प्रदेष के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य कैम्प व संवाद आदि कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालकों से जुड़े हुए हैं। साथ ही किसानों के लिए विषयवस्तु विषेषज्ञ पशुओं के इलाज एवं प्रबंधन आदि हेतु केन्द्र में उपलब्ध रहते हैं।
केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.सुमन्त व्यास ने पशुओं के प्रजनन आदि से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक जानकारी दी। वहीं डाॅ.एफ.सी.टुटेजा, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने पशुओं में पाए जाने वाले थनैला, पांव, खुजली आदि के लक्षणों पर अपनी बात रखी।
अनुसूचित जाति उपयोजना के नोडल अधिकारी डाॅ.काषीनाथ ने कार्यक्रम संबंधी जानकारी देते हुए कहा कि कोटड़ी एवं आस-पास क्षेत्र के पशुधन में मुख्यतः चीचड़, पेट में कीड़े होने, दस्त, खुजली, घाव, कमजोरी आदि की समस्याएँ पाई गई जिनका इलाज कर बचाव हेतु उचित समाधान भी बताया। पशुधन में उत्पादकता बढ़ाने हेतु केन्द्र निर्मित ‘करभ पशु आहार‘ व खनिज मिश्रण का भी वितरण किया गया। प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.राकेष रंजन ने पशुओं में पाए जाने वाले विभिन्न रोगों के निदान हेतु दवा व उचित खुराक के बारे में जानकारी दी।
शिविर में लाए गए कमजोर व बीमार पशुओं का डाॅ. बी.एल.चिरानियां, डाॅ.काषीनाथ, राधाकृष्ण आदि ने इलाज किया तथा उन्हें मल्टीविटामिनयुक्त इंजेक्षन भी लगाए गए। किसानों के पंजीयन, दवा व पशु आहार आदि वितरण में मनजीत सिंह, नेमीचंद व अमित आदि ने सक्रिय योगदान दिया।
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बीकानेर,29 जून। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) ने शनिवार को जोड़बीड़ ग्रामीण अंचल कोटड़ी गांव में पषु स्वास्थ्य षिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत रखे गए इस षिविर में 127 महिला एवं पुरुष पशुपालक गाय, भैंस, ऊँट, भेड़ व बकरी कुल 654 पशुधन सहित पहुंचे। इन पशुओं का स्वास्थ्य जांच कर इलाज व दवा आदि का वितरण किया गया।
इस अवसर पर ग्रामीण पशुपालकों से चर्चा के दौरान केन्द्र के निदेषक डाॅ.आर.के.सावल ने पशुधन को पशुपालकों की आजीविका का मुख्य साधन बताते हुए कहा कि पशुओं के उचित प्रबंधन आदि की जानकारी से पशुधन स्वस्थ रहेगा तो पर्याप्त उत्पादन लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार निरंतर ऐसी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है ताकि पशुपालक इनका लाभ उठाते हुए अपने जीवन स्तर में सुधार ला सके। उन्होंने पशुपालकों की पशुधन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को सुनते हुए आष्वस्त किया कि एनआरसीसी प्रदेष के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य कैम्प व संवाद आदि कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालकों से जुड़े हुए हैं। साथ ही किसानों के लिए विषयवस्तु विषेषज्ञ पशुओं के इलाज एवं प्रबंधन आदि हेतु केन्द्र में उपलब्ध रहते हैं।
केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.सुमन्त व्यास ने पशुओं के प्रजनन आदि से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक जानकारी दी। वहीं डाॅ.एफ.सी.टुटेजा, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने पशुओं में पाए जाने वाले थनैला, पांव, खुजली आदि के लक्षणों पर अपनी बात रखी।
अनुसूचित जाति उपयोजना के नोडल अधिकारी डाॅ.काषीनाथ ने कार्यक्रम संबंधी जानकारी देते हुए कहा कि कोटड़ी एवं आस-पास क्षेत्र के पशुधन में मुख्यतः चीचड़, पेट में कीड़े होने, दस्त, खुजली, घाव, कमजोरी आदि की समस्याएँ पाई गई जिनका इलाज कर बचाव हेतु उचित समाधान भी बताया। पशुधन में उत्पादकता बढ़ाने हेतु केन्द्र निर्मित ‘करभ पशु आहार‘ व खनिज मिश्रण का भी वितरण किया गया। प्रधान वैज्ञानिक डाॅ.राकेष रंजन ने पशुओं में पाए जाने वाले विभिन्न रोगों के निदान हेतु दवा व उचित खुराक के बारे में जानकारी दी।
शिविर में लाए गए कमजोर व बीमार पशुओं का डाॅ. बी.एल.चिरानियां, डाॅ.काषीनाथ, राधाकृष्ण आदि ने इलाज किया तथा उन्हें मल्टीविटामिनयुक्त इंजेक्षन भी लगाए गए। किसानों के पंजीयन, दवा व पशु आहार आदि वितरण में मनजीत सिंह, नेमीचंद व अमित आदि ने सक्रिय योगदान दिया।
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