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चांदवानी के रूप में एक प्रदीप्तवान सितारा दूरगामी हुआ किंतु उनकी ज्ञानज्योतिर्मयी गंगा सदैव प्रवाहमान रहेगी - लक्ष्मण भम्भाणी
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चांदवानी के रूप में एक प्रदीप्तवान सितारा दूरगामी हुआ किंतु उनकी ज्ञानज्योतिर्मयी गंगा सदैव प्रवाहमान रहेगी - लक्ष्मण भम्भाणी
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चांदवानी के रूप में एक प्रदीप्तवान सितारा दूरगामी हुआ किंतु उनकी ज्ञानज्योतिर्मयी गंगा सदैव प्रवाहमान रहेगी - लक्ष्मण भम्भाणी
सिंधी साहित्याकाश के मौन साधक थे राधाकिशन चांदवानी - मोहन थानवी
भारतीय सिन्धु सभा ने दी साहित्यकार राधाकिशन चांदवानी को श्रद्धांजलि
बीकानेर । भारतीय सिन्धु सभा की ओर से सिंधी हिंदी राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं गुजराती के अनुवादक 86 वर्षीय राधाकिशन चांदवानी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई । दो मई 1933 को रोहिड़ी सिन्ध ( अब पाक) में जन्मे चांदवानी जी का निधन 5 जून 2019 को हुआ तथा अंतिम संस्कार 6 जून 2019 को परदेसियों की बगेची में किया गया । उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाज सेवी, व्यापारी, बीमा कर्मियों सहित साहित्यकारों संस्कृति कर्मियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। चांदवानी के पुत्र रवि ने मुखाग्नि दी। विश्व प्रसिद्ध पत्रिका सुरभि के संपादक वरिष्ठ रंगकर्मी लक्ष्मण भम्भाणी (जयपुर) ने अपने शोक संदेश में कहा कि शिक्षा व साहित्य जगत से चांदवानी के रूप में एक प्रदीप्तवान सितारा दूरगामी हुआ किंतु उनकी ज्ञानज्योतिर्मयी गंगा सदैव प्रवाहमान रहेगी। दूसरी ओर, व्यास कॉलोनी में विश्वास वाचनालय संसथापक अध्यक्ष बहुभाषी साहित्यकार मोहन थानवी, सिंधी टीकाकार हासानंद मंघवानी के सान्निध्य आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पदाधिकारियों एवं साहित्य प्रेमियों ने चांदवानी के निधन को भारतीय सिन्धु सभा और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया । मंघवानी ने कहा कि चांदवानी जी ने राजस्थान राज्य पुस्तक मंडल जयपुर की सिन्धी पाठ्य पुस्तकें 03 का संपादन कर सिंधी भाषा माध्यम से शिक्षण को सरल सहज बनाने का सराहनीय कार्य किया जिसे बिसराया नहींं जा सकता। संभाग संरक्षक श्याम आहूजा ने कहा कि चांदवानी जी ने सिंधी अध्यापक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई तथा अपने परिश्रम से वे शिक्षा विभाग में उच्चाधिकारी पद तक पहुंच कर सेवानिवृत्त हुए। समाज के वरिष्ठ हीरालाल खतूरिया ने कहा कि साहित्य सृजन और भाषा साहित्य के परस्पर अनुवादक के रूप में वे अंतिम समय तक सक्रिय रहे । सिंधी सेंट्रल पंचायत अध्यक्ष कमलेश सत्यानी, सभा पदाधिकारी देवीचंद खत्री अशोक वासवानी अनिल डेम्बला गणेश सदारंगानी मानसिंह मामनानी किशन सदारंगानी टीकम पारवानी आरके बोस राजेश खेशकवानी ने भी चांदवानी जी की साहित्यिक उपलब्धियों को रेखांकित किया। हेमंत गोरवानी अशोक गोरवानी केशव खत्री विवेक आहूजा आदि सिन्धु सभा के सदस्यों - पदाधिकारियों ने चांदवानी जी के अध्यापन काल की यादें ताजा कराते कहा कि उन्होंने छात्र छात्राओं को सिंधी भाषा में शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा देने का काम किया जिसे आने वाली पीढ़ियों तक भुलाया न जा सकेगा। मोहन थानवी ने चांदवानी जी के साथ बिताए समय के प्रेरक संस्मरण साझा किए तथा कहा कि चांदवानी जी प्रचार-प्रसार से दूर रहते हुए भी ख्यातनाम थे, उन्होंने हिंदी सिंधी राजस्थानी और गुजराती साहित्याकाश में एक मौन साधक के रूप में साधना की। सभा के अंत में चांदवानी जी के परिजनों को राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी और डॉ प्रदीप गेहानी के प्रेषित शोक संदेश का वाचन तेजप्रकाश द्वारा किया गया । शोक सभा के बाद एक प्रतिनिधि मंडल ने चांदवानी जी के निवास पर जाकर परिजनों व पुत्र रवि चांदवानी को शोक जताया व सांत्वना दी।
संक्षिप्त परिचय
राधाकृण चांदवाणी हीरानंद चांदवाणी
जन्म - 2 मई 1933 रोहिड़ी सिन्ध में
प्रकाशित पुस्तकें -- सिन्धी से हिन्दी में अनूदित 13 पुस्तकें
गुजराती से सिन्धी में अनूदित कहानी संग्रह 01
सिन्धी कहानी संग्रह 02
राजस्थानी कहानी संग्रह 01
बाल साहित्य पर पुस्तकें 08
संपादन : राज राज्य पुस्तक मंडल जयपुर की सिन्धी पाठ्य पुस्तकें 03
सम्मान-पुरस्कार सिन्धी अकादमी जयपुर, नगर विकास न्यास बीकानेर, सुरभि जयपुर सहित विभिन्न संस्थाओं से सम्मानित-पुरस्कृत
सेवाएं : शिक्षा प्रसार अधिकारी सतर्कता अनुभाग आरईएस पद से निदेशक प्रा मा शिक्षा राजस्थान बीकानेर से 31 5 1991 को सेवानिवृत्त
राधाकृण चांदवाणी हीरानंद चांदवाणी
जन्म - 2 मई 1933 रोहिड़ी सिन्ध में
प्रकाशित पुस्तकें -- सिन्धी से हिन्दी में अनूदित 13 पुस्तकें
गुजराती से सिन्धी में अनूदित कहानी संग्रह 01
सिन्धी कहानी संग्रह 02
राजस्थानी कहानी संग्रह 01
बाल साहित्य पर पुस्तकें 08
संपादन : राज राज्य पुस्तक मंडल जयपुर की सिन्धी पाठ्य पुस्तकें 03
सम्मान-पुरस्कार सिन्धी अकादमी जयपुर, नगर विकास न्यास बीकानेर, सुरभि जयपुर सहित विभिन्न संस्थाओं से सम्मानित-पुरस्कृत
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