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साफ कहना, सुखी रहना : आचार्यश्री रामलालजी म.सा.
बीकानेर। त्याग और सत्य के संकल्प के साथ सेठिया कोटड़ी में हर्ष-जय के स्वर सुनाई दिए। शनिवार सुबह आचार्यश्री रामलाल जी म.सा. ने अपने प्रवचन के दौरान त्याग व सत्य बोलने का संकल्प दिलवाया। आचार्यश्री ने कहा कि झूठा डरता है, झूठा झरता है। 'साफ कहना, सुखी रहनाÓ पंक्ति के साथ उपस्थितजनों को झूठ न बोलने की सीख प्रदान की गई।
आचार्यश्री ने बताया कि इंद्रियरामी व आत्मरामी दो प्रवृत्तियां होती हैं। जो शब्द, स्पर्श, रूप, रंग और गंध की इंद्रियों में रमण करता है वह इंद्रियरामी होता है। ऐसे व्यक्तियों के प्रयास केवल इंद्रियों के सुख भोगने और इंद्रियों की तृप्ति तक ही रहते हैं। इंद्रियरामी से व्यक्ति खिन्न रहता है क्योंकि जो आज सुगन्ध वाला है वह कल दुर्गन्ध में परिवर्तित हो जाएगा। आत्मा में रमण करने वाला न कभी रीझता है न कभी खीजता है। वह संतोषी प्रवृत्ति का होता है। जिस रूप-रंग पर आज आप गर्व कर रहे हैं वह लम्बे समय तक नहीं रहने वाला, बदल जाएगा इसलिए अभिमान मत करो। इंद्रियरामी की दृष्टि इंद्रियों की तृप्ति तक ही सीमित रहती है।
आचार्यश्री ने कहा कि ईश्वर कभी नहीं कहता कि आप एक समय भोजन करो या चार समय भोजन करो लेकिन इंद्रियों की भूख को नहीं, आत्मा का तृप्त करो। मानव जीवन में धर्म-आराधना तथा सेवा आदि कार्य करने के लिए शरीर स्वस्थ रहना चाहिए। स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक भोजन करना चाहिए। स्वाद, सुगन्ध व रस के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भोजन आवश्यक है। शरीर के लिए ममत्व नहीं बल्कि पोषण के लिए आहार लेना जरूरी है। आचार्यश्री ने संतों को भी गोचरी (भोजन) देते समय विशेष नियमों की जानकारी बताई।
भागना नहीं, बदलना होगा
आचार्यश्री रामलाल जी म.सा. ने कहा कि गृहस्थ की जिम्मेदारियों व पारिवारिक दायित्वों से भागना नहीं चाहिए। हमें भागने की नहीं बदलने की विचारधारा रखनी चाहिए। गृहस्थ जीवन में भी कर्तव्यों और दायित्वों का पालन करके श्रेष्ठ श्रावक जीवन की परिभाषा को साकार किया जा सकता है। अपने विचारों को दूसरों पर न थोपें, छोटा हो या बड़ा सबके विचारों का सम्मान करें। आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य से ज्यादा तो पशु कीमती होता है, जो जीवित रहता है तब भी लोगों के काम आता है और मृत्यु के बाद भी फायदा पहुंचाता है। मनुष्य जीवन मिला है तो उसका सद्पयोग करो।
इससे पूर्व श्री संजय मुनिजी म.सा ने कहा कि बीकानेर धर्मनगरी है और समय-समय पर यहां आचार्य महापुरुष आते रहते हैं इसलिए बीकानेर ने अपनी धार्मिक पहचान बनाई है।
श्री वीरेन्द्र मुनि जी म.सा. ने गीतिका प्रस्तुत की तथा साध्वीश्री कृतज्ञताश्री जी म.सा. ने कहा कि जो मद नहीं रखता उसकी सब मदद करते हैं। साध्वीश्री ने सेवा व सहायता का महत्व बताया। संघ के सुशील बैद ने रविवार का प्रवचन गंगाशहर स्थित जैन पब्लिक स्कूल में होने की संभावना जताई।
इन्होंने लिए तपस्या के प्रत्याख्यान- खुश्बू डागा-11, शिल्पा बोथरा-7, ज्योति नौलखा-7, सरिता सुराणा-7, अमित गोलछा-6, जया गोलछा-6, पूजा देवी सुराना-4 ने तपस्या के प्रत्याख्यान लिए।
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