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दृष्टि बदलेगी तभी प्रवृत्ति बदलेगी : आचार्यश्री रामलाल जी म.सा.
शुक्रवार को सूर्योदय बीकानेरवासियों के लिए धर्म की छटा बिखेर रहा था, चेहरे पुलकित और हर्षाए थे। मरोठी सेठिया मोहल्ला स्थित अगरचन्द भैरोदान सेठिया कोटड़ी में आचार्य प्रवर श्री रामलाल जी महाराज साहिब के दर्शन से सुमुचित जैन समाज के श्रावक व श्राविकाएं स्वयं को धन्य मान रहे थे। आचार्यश्री रामलाल जी म.सा. ने अपनी मंगलवाणी सुनाते हुए लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने और प्रवृत्ति सुधारने की बात कही। आचार्यश्री ने कहा कि पुनरोअपि जन्म-मरण के चक्र को हमें विराम देना है, यदि यह चक्र चलता रहेगा तो हमें कभी मुक्ति नहीं मिल पाएगी। इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाने के लिए सबसे पहले दृृष्टि को सुधारना होगा। दृष्टि सुधरेगी तो प्रवृत्ति सुधर जाएगी और प्रवृत्ति सुधरेगी तो हमें मुक्ति मिलेगी। दृष्टि को आत्मा में केन्द्रित करना ही अध्यात्म है। धर्म की पौशाक पहनने से कोई धर्मात्मा नहीं बन सकता। धर्म को आत्मा में केन्द्रित करना होता है।
हमें अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों, कार्यकर्ताओं के साथ भी परिवार के सदस्यों जैसा व्यवहार करना चाहिए। सद्व्यवहार हमारी प्रवृत्ति दर्शाता है। आचार्यश्री ने कहा कि हिंसा से ज्यादा हिंसा के बारे में सोचना ही बड़ा कर्मबंधन है। हिंसा करने वाले से ज्यादा हिंसा करवाने वाला, हिंसा की सोचने वाला व्यक्ति अपने कर्मबंधन से जूझता है। मनुष्य की लालसाएं खत्म नहीं होती इसलिए त्याग का बड़ा महत्व है। संसार में रहते हुए भी अनासक्त भाव से जीए तभी संसार सुखी लगेगा। लालसाएं, लगाव, मोह और आसक्ति संसार में दु:खों के बड़े कारण हैं। आसक्ति के आवरण को हटाने के लिए हमें दृष्टि बदलनी होगी।
इससे पूर्व मुनिश्री ऋषिराज जी म.सा. ने बड़ों का आदर करने तथा माता-पिता की सेवा व सम्मान करने की बात कही। बहुमंडल ने स्वागत गीतिका प्रस्तुत की। सुशील बैद व कुसुम सेठिया ने भी अपने विचार रखे।
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