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महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के स्नातक व स्नातकोत्तर के
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 28-31 मार्च तक 4 दिवसीय ऐतिहासिक भ्रमण
करके मेवाड़ की धरोहर को जाना। विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अम्बिका ढ़ाका के निर्देशन
में आयोजित शैक्षणिक भ्रमण में विभाग के बी.ए. ऑनर्स तथा एम.ए. के विद्यार्थियों ने उदयपुर
में स्थित करीब दो हजार वर्ष प्राचीन जावर खान का सर्वेक्षण किया।
स्थानीय भूगर्भीय सर्वेक्षण,
भारत सरकार के अधिकारी डॉ. अरविन्द ने समस्त विद्यार्थियों को प्राचीन काल में प्रचलित
धातुकर्म विज्ञान के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे पूर्वज अयस्क से जस्ता बनाने की विधि
में पारंगत थे जिनके प्रमाण आज भी जावर में अरावली पर्वत की ढ़लान पर देखे जा सकते हैं।
हमारे पूर्वज वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत उन्नत थे तथा उन्होंने जोड़ने की विधि (सीमेंटेशन
प्रोसेस) द्वारा पीतल को बनाना सीखा, जिसमें जस्ता तथा ताँबे का मिश्रण होता हैं। तत्पश्चात्
विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार के भूगर्भीय पत्थरों के बारे में जाना। उदयपुर स्थित ताम्रपाषाण
युगीन पुरास्थल आहड़ का अध्ययन करके समस्त विद्यार्थियों ने कई प्रकार के पाषाण तथा
ताँबे के उपकरणों, मृदभाण्डों और उनके निर्माण की विधि को जाना। साथ ही आहड़ पुरास्थल
का सर्वेक्षण करके वहाँ पूर्व उत्खनित ट्रेन्च तथा जल निकासी के लिए बनाए गए गड्ढ़ों (सोक
पिट) का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त भव्य तथा विश्व विख्यात जगदीश मंदिर के
स्थापत्य एवं कला को जाना व मोती मगरी, पिछोला झील, करणी माता मंदिर, एकलिंग जी,
नाथद्वारा आदि का भ्रमण किया। विभाग के विद्यार्थियों ने डॉ. अम्बिका ढ़ाका व डॉ. उमा दुबे के साथ कुम्भलगढ़ दुर्ग के स्थापत्य का अध्ययन किया।
श्रवण जाखड़, शेषकरण भादू, हरि
किशन, राकेश खीचड़, प्रमोद विश्नोई, सोनम, प्रियंका, प्रमिला, ममता, अभिनव, प्रमोद नेगी,
दीपक शर्मा, नितेश शर्मा, नितेश गोदारा आदि ने कुम्भलगढ़ के महलों, नीलकंठ महादेव मंदिर,
मामदेव मंदिर, पीतल शाह जैन मंदिर, सूर्य मंदिर, बादशाही बावड़ी आदि को रूचिपूर्वक देखा
तथा अपनी जिज्ञासा शान्त की।
कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने कहा की विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियो ं के
सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण समय-समय पर आयोजित किये जाते
हैं जिससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण सिंह राव ने सभी विद्यार्थियों को ऐतिहासिक भ्रमण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की व शुभकामनाओं दी।
एमजीएसयू हिस्ट्री स्टूडेंट्स
ने 2k वर्ष प्राचीन
जावर खान
का
सर्वेक्षण किया
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एमजीएसयू हिस्ट्री स्टूडेंट्स ने 2k वर्ष प्राचीन जावर खान का सर्वेक्षण किया
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के स्नातक व स्नातकोत्तर के
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 28-31 मार्च तक 4 दिवसीय ऐतिहासिक भ्रमण
करके मेवाड़ की धरोहर को जाना। विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अम्बिका ढ़ाका के निर्देशन
में आयोजित शैक्षणिक भ्रमण में विभाग के बी.ए. ऑनर्स तथा एम.ए. के विद्यार्थियों ने उदयपुर
में स्थित करीब दो हजार वर्ष प्राचीन जावर खान का सर्वेक्षण किया।
स्थानीय भूगर्भीय सर्वेक्षण,
भारत सरकार के अधिकारी डॉ. अरविन्द ने समस्त विद्यार्थियों को प्राचीन काल में प्रचलित
धातुकर्म विज्ञान के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे पूर्वज अयस्क से जस्ता बनाने की विधि
में पारंगत थे जिनके प्रमाण आज भी जावर में अरावली पर्वत की ढ़लान पर देखे जा सकते हैं।
हमारे पूर्वज वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत उन्नत थे तथा उन्होंने जोड़ने की विधि (सीमेंटेशन
प्रोसेस) द्वारा पीतल को बनाना सीखा, जिसमें जस्ता तथा ताँबे का मिश्रण होता हैं। तत्पश्चात्
विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार के भूगर्भीय पत्थरों के बारे में जाना। उदयपुर स्थित ताम्रपाषाण
युगीन पुरास्थल आहड़ का अध्ययन करके समस्त विद्यार्थियों ने कई प्रकार के पाषाण तथा
ताँबे के उपकरणों, मृदभाण्डों और उनके निर्माण की विधि को जाना। साथ ही आहड़ पुरास्थल
का सर्वेक्षण करके वहाँ पूर्व उत्खनित ट्रेन्च तथा जल निकासी के लिए बनाए गए गड्ढ़ों (सोक
पिट) का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त भव्य तथा विश्व विख्यात जगदीश मंदिर के
स्थापत्य एवं कला को जाना व मोती मगरी, पिछोला झील, करणी माता मंदिर, एकलिंग जी,
नाथद्वारा आदि का भ्रमण किया। विभाग के विद्यार्थियों ने डॉ. अम्बिका ढ़ाका व डॉ. उमा दुबे के साथ कुम्भलगढ़ दुर्ग के स्थापत्य का अध्ययन किया।
श्रवण जाखड़, शेषकरण भादू, हरि
किशन, राकेश खीचड़, प्रमोद विश्नोई, सोनम, प्रियंका, प्रमिला, ममता, अभिनव, प्रमोद नेगी,
दीपक शर्मा, नितेश शर्मा, नितेश गोदारा आदि ने कुम्भलगढ़ के महलों, नीलकंठ महादेव मंदिर,
मामदेव मंदिर, पीतल शाह जैन मंदिर, सूर्य मंदिर, बादशाही बावड़ी आदि को रूचिपूर्वक देखा
तथा अपनी जिज्ञासा शान्त की।
कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने कहा की विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियो ं के
सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण समय-समय पर आयोजित किये जाते
हैं जिससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण सिंह राव ने सभी विद्यार्थियों को ऐतिहासिक भ्रमण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की व शुभकामनाओं दी।




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