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हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की बुनियाद स्वतंत्रता सेनानियों ने ही रखी थी - मालचंद तिवाड़ी
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हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की बुनियाद स्वतंत्रता सेनानियों ने ही रखी थी - मालचंद तिवाड़ी
बीकानेर 27.03.2019। स्वतंत्रता सेनानी युगों युगों तक अमर रहेंगे और उनकी प्रेरणादायी जीवनियां हमेशा पीढ़ी दर पीढ़ी आने वाली नस्लों को संस्कारित करती रहेंगी, हमारा सौभाग्य है कि स्व. रामरतन कोचर बीकानेर की पावन भूमि पर जन्मे और देशभक्ति से ओत प्रोत उनकी जीवन गाथा हमेशा प्रभावित करती रहती है। यह कहना था, वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास विनोद का जो महाराजा नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम में लोक जागृति संस्थान की ओर से आयोजित भाईजी राम रतन कोचर साहिल सम्मान में बतौर मुख्य वक्ता अपना वक्तव्य दे रहे थे। उन्होने बीकानेर और स्वतंत्रता संग्राम के मध्य विभिन्न प्रसंग सुनाकर उपस्थित जनों को भाव विभोर कर दिया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान सचिव इसरार हसन काजी ने कहा कि साहित्यकार रचनाओं के माध्यम से समाज को रचनात्मक ढंग से बदलने का कार्य करते हैं, ऐसे में संस्थान प्रतिवर्ष विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों का सम्मान करती है। लोक जागृति संस्थान के अध्यक्ष गुलाम मुस्तफा ने संस्था का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाईजी रामरतन कोचर हमेशा साहित्यकारों का हृदय से सम्मान किया करते थे तथा वे मानते थे कि समाज में सामाजिक सरोकारों की और युवा पीढ़ी को ले जाने का काम कलम ही करती है।
युवा शायर वली मौहम्मद गौरी वली बीकानेरी ने देशभक्तिपूर्ण गीत व गजलों से सबका मन मोह लिया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि कथाकार, मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की बुनियाद स्वतंत्रता सेनानियों ने ही रखी थी। स्वतंत्रता के लिये काम करने वालों को याद करना आज के दौर में बहुत जरूरी है, ताकि इस महान विरासत को अक्षुण्ण रखा जा सके। तभी आने वाली पीढि़यां इस विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ा सकेगी।
वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि साहित्य समाज को रचनात्मक ढंग से बदलने की सामर्थ्य रखता है। आजादी की अलख जगाने में साहित्यकारों की अहम भूमिका थी। देशभक्तिपूर्ण गीतों ने अवाम को सार्थक रूप से जगाने का काम किया। साहित्यकारों का सम्मान वस्तुतः समाज का ही सम्मान है। देश की संस्कृति के पोषण का कार्य साहित्य करता है। अतः साहित्यकारों का सम्मान अनुकरणीय है।
कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ सहायक डॉ. मोहम्मद हुसैन ने कहा कि आजादी के दीवानों के नक्शे कदम पर चलना आज के समय की महती आवश्यकता है, उन्होने कहा कि लगातार नैतिकता का ग्राफ कम होता जा रहा है। ऐसे में यह संघर्ष का दौर है, जिसमें युवाओं में सच्ची देशभक्ति का संचार हो, इसके लिए काम करने की जरूरत है। डॉ. मोहम्मद हुसैन ने कहा कि सम्मान आदमी की जिम्मेदारी को बढ़ा देता है, ऐसे में जो लोग आज सम्मानित हुए हैं वे लोग और अधिक जिम्मेदार हो गए हैं। आज साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सुसंस्कारित करें।
मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ मंच संचालक ज्योति प्रकाश रंगा ने संचालन के दौरान साहित्य शिक्षा और स्वतंत्रता के मध्य अहमियत के संबंधों पर प्रकाश डाला। इन वक्ताओं को स्मृति चिन्ह पेश कर सम्मानित किया गया।
स्वतंत्रता सेनानी भाईजी रामरतन कोचर साहित्य सम्मान हिन्दी के लिए वरिष्ठ लेखक अशफाक कादरी, राजस्थानी के लिए वरिष्ठ कवि कथाकार, राजेन्द्र जोशी तथा उर्दू के लिए शाइरा सीमा भाटी को पेश किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आभार एडवोकेट शमशाद अली ने प्रकट किया ।
इस अवसर पर योगेन्द्र पुरोहित, बी.एल. नवीन, डॉ. मोहम्मद फारूक, एन.डी. कादरी, डॉ. अजय जोशी, एडवोकेट शमशाद अली, विजय कोचर, राजाराम स्वर्णकार, आत्माराम भाटी, मोहम्मद अफजल, चन्द्रेश गहलोत, मोहम्मद आरिफ, नदीम अहमद नदीम, बाबूलाल छंगाणी, बुलाकीदास देवड़ा, रवि पुरोहित, ओमदैया, देवीशरण, इरफान, गुलफाम, अबरार, जाकिर हुसैन, गौरी शंकर भाटिया, ऋषि कुमार उपस्थित रहे।
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हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की बुनियाद स्वतंत्रता सेनानियों ने ही रखी थी - मालचंद तिवाड़ी
बीकानेर 27.03.2019। स्वतंत्रता सेनानी युगों युगों तक अमर रहेंगे और उनकी प्रेरणादायी जीवनियां हमेशा पीढ़ी दर पीढ़ी आने वाली नस्लों को संस्कारित करती रहेंगी, हमारा सौभाग्य है कि स्व. रामरतन कोचर बीकानेर की पावन भूमि पर जन्मे और देशभक्ति से ओत प्रोत उनकी जीवन गाथा हमेशा प्रभावित करती रहती है। यह कहना था, वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकर व्यास विनोद का जो महाराजा नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम में लोक जागृति संस्थान की ओर से आयोजित भाईजी राम रतन कोचर साहिल सम्मान में बतौर मुख्य वक्ता अपना वक्तव्य दे रहे थे। उन्होने बीकानेर और स्वतंत्रता संग्राम के मध्य विभिन्न प्रसंग सुनाकर उपस्थित जनों को भाव विभोर कर दिया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान सचिव इसरार हसन काजी ने कहा कि साहित्यकार रचनाओं के माध्यम से समाज को रचनात्मक ढंग से बदलने का कार्य करते हैं, ऐसे में संस्थान प्रतिवर्ष विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों का सम्मान करती है। लोक जागृति संस्थान के अध्यक्ष गुलाम मुस्तफा ने संस्था का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाईजी रामरतन कोचर हमेशा साहित्यकारों का हृदय से सम्मान किया करते थे तथा वे मानते थे कि समाज में सामाजिक सरोकारों की और युवा पीढ़ी को ले जाने का काम कलम ही करती है।
युवा शायर वली मौहम्मद गौरी वली बीकानेरी ने देशभक्तिपूर्ण गीत व गजलों से सबका मन मोह लिया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि कथाकार, मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि हमारे देश की गंगा जमुनी तहजीब की बुनियाद स्वतंत्रता सेनानियों ने ही रखी थी। स्वतंत्रता के लिये काम करने वालों को याद करना आज के दौर में बहुत जरूरी है, ताकि इस महान विरासत को अक्षुण्ण रखा जा सके। तभी आने वाली पीढि़यां इस विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ा सकेगी।
वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि साहित्य समाज को रचनात्मक ढंग से बदलने की सामर्थ्य रखता है। आजादी की अलख जगाने में साहित्यकारों की अहम भूमिका थी। देशभक्तिपूर्ण गीतों ने अवाम को सार्थक रूप से जगाने का काम किया। साहित्यकारों का सम्मान वस्तुतः समाज का ही सम्मान है। देश की संस्कृति के पोषण का कार्य साहित्य करता है। अतः साहित्यकारों का सम्मान अनुकरणीय है।
कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ सहायक डॉ. मोहम्मद हुसैन ने कहा कि आजादी के दीवानों के नक्शे कदम पर चलना आज के समय की महती आवश्यकता है, उन्होने कहा कि लगातार नैतिकता का ग्राफ कम होता जा रहा है। ऐसे में यह संघर्ष का दौर है, जिसमें युवाओं में सच्ची देशभक्ति का संचार हो, इसके लिए काम करने की जरूरत है। डॉ. मोहम्मद हुसैन ने कहा कि सम्मान आदमी की जिम्मेदारी को बढ़ा देता है, ऐसे में जो लोग आज सम्मानित हुए हैं वे लोग और अधिक जिम्मेदार हो गए हैं। आज साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सुसंस्कारित करें।
मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ मंच संचालक ज्योति प्रकाश रंगा ने संचालन के दौरान साहित्य शिक्षा और स्वतंत्रता के मध्य अहमियत के संबंधों पर प्रकाश डाला। इन वक्ताओं को स्मृति चिन्ह पेश कर सम्मानित किया गया।
स्वतंत्रता सेनानी भाईजी रामरतन कोचर साहित्य सम्मान हिन्दी के लिए वरिष्ठ लेखक अशफाक कादरी, राजस्थानी के लिए वरिष्ठ कवि कथाकार, राजेन्द्र जोशी तथा उर्दू के लिए शाइरा सीमा भाटी को पेश किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आभार एडवोकेट शमशाद अली ने प्रकट किया ।
इस अवसर पर योगेन्द्र पुरोहित, बी.एल. नवीन, डॉ. मोहम्मद फारूक, एन.डी. कादरी, डॉ. अजय जोशी, एडवोकेट शमशाद अली, विजय कोचर, राजाराम स्वर्णकार, आत्माराम भाटी, मोहम्मद अफजल, चन्द्रेश गहलोत, मोहम्मद आरिफ, नदीम अहमद नदीम, बाबूलाल छंगाणी, बुलाकीदास देवड़ा, रवि पुरोहित, ओमदैया, देवीशरण, इरफान, गुलफाम, अबरार, जाकिर हुसैन, गौरी शंकर भाटिया, ऋषि कुमार उपस्थित रहे।



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