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भीलवाड़ा : कवियों ने होली,राजस्थान दिवस,देश व शहीदों पर सूफियाना व ओजस्वी रचनाओं से मेला लूट लिया
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कवियों ने होली,राजस्थान दिवस,देश व शहीदों पर सूफियाना व ओजस्वी रचनाओं से मेला लूट लिया
*राजस्थान दिवस पर नवमानव सृजनशील चेतना मंच की हुई काव्यसंध्या*
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भीलवाड़ा,31मार्च। शहर की अग्रणी साहित्यिक संस्था *नवमानव सृजनशील चेतना समिति* की ओर से *राजस्थान स्थापना दिवस* पर होली स्नेहमिलन काव्यसंध्या का आयोजन भदादा बाग के पीछे स्थित *ओशो सुरधाम ध्यान केन्द्र* में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम गर्ग अभिनव ने की, मुख्य अतिथि थे इन्जीनियर एसएस गम्भीर, विशिष्ट अतिथि नरेंद्र दाधीच थे। संचालन संस्था संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस एवं मधुर सरस्वती वंदना योगेन्द्र सक्सेना योगी ने प्रस्तुत की।
ओशो सुरधाम की कविता लोहानी ने बताया कि बहुत ही उल्लास-आनंदपूर्ण वातावरण में हुई इस काव्यसंध्या में कवियों ने होली,राजस्थान दिवस,देश व शहीदों पर सूफियाना व ओजस्वी रचनाएं पढकर काव्यसंध्या को बुलंदी प्रदान की। श्यामसुन्दर मधुप ने *चंग बजाओ खुशी मनाओ,रंगों से खेलो तुम फाग*, ओम उज्जवल ने *देश आपणो बालो लागे केवां हिंदुस्तान*, निपुण शुक्ला ने *तुम्हें नहीं करार था मुझसे मिले बगैर,हर जां मुझे दीवानावार ढूंढ रही थी*, नरेंद्र दाधीच ने *पद्मिनी की जौहर गाथा जिसे हर कोई है गाता,इतिहास हुआ गर्वीला मेरा राजस्थान है रंगीला*, महेंद्र शर्मा ने *अंग-अंग में रंग सजाये बरसाने की राधे रानी,किन्तु मेडता की मीरा रानी ने प्रेम रंग ऐसा बरसाया,हुए बावरे स्वयं साँवरे,उस होली की बात करें*, डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने गजलें *अपने इशारों पे तूने जोरदार नचाया है,इक अफ़साने का मुझे किरदार बनाया है।*, *रिश्तों में अहसान नहीं अहसास चाहिए,वादों का अंबार नहीं विश्वास चाहिए।* एवं *आज पूरा हुआ मेरा वादा तुझे रचने का,ना भुलाना अपना वादा किसी दिन मुझे रचने का,ओ कविता!*, राधेश्याम गर्ग अभिनव ने *छीना है अमीरों ने गरीबों का निवाला,किया है घोटाले पे घोटाला* और एसएस गम्भीर ने *लोग देखते हैं दरवाजों की दरारों से कि अंदर क्या हो रहा है।*
इसी प्रकार अरुण अजीब ने *सूरज,गगन,चांद सब हैं बौने,बाँट रहे हैं स्नेह खिलौने*, योगेन्द्र सक्सेना ने *मरूधरा की मती में महके हैं दुर्लभ फूल,गौरव गाथा तुम्हें सुनायें इन्हें न जाना भूल।*, दिनेश दीवाना ने *भोर की पहली किरण जा उस मुख को चूम,जिसे देख मेरा जिया हरदम जाए झूम*, नरेंद्र वर्मा ने *रोज-रोज की चिकचिक से तो प्रेम चिपचिप अच्छी*, डॉ अवधेश जौहरी ने *हैरां हूं मैं प्यार से वो फिर मुकर गया*, बंशी पारस ने *करे मसखरी अठै मौत सूं या वा मीरां री खान है* एवं गोपाल पंचोली आशू ने *कभी-कभी आ जाया कर बेटा,तू बहुत उंचा बनना पर मेरी नजर में रहना।* जैसी रचनायें सुनाकर काव्यसंध्या को उच्च गरिमा प्रदान की।
अन्त में होली स्नेहमिलन किया गया,सबने एक-दूसरे को घेवर आदि खिलाकर बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने आभार व्यक्त किया।
भीलवाड़ा : कवियों ने होली,राजस्थान दिवस,देश व शहीदों पर सूफियाना व ओजस्वी रचनाओं से मेला लूट लिया
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*राजस्थान दिवस पर नवमानव सृजनशील चेतना मंच की हुई काव्यसंध्या*
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भीलवाड़ा,31मार्च। शहर की अग्रणी साहित्यिक संस्था *नवमानव सृजनशील चेतना समिति* की ओर से *राजस्थान स्थापना दिवस* पर होली स्नेहमिलन काव्यसंध्या का आयोजन भदादा बाग के पीछे स्थित *ओशो सुरधाम ध्यान केन्द्र* में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम गर्ग अभिनव ने की, मुख्य अतिथि थे इन्जीनियर एसएस गम्भीर, विशिष्ट अतिथि नरेंद्र दाधीच थे। संचालन संस्था संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस एवं मधुर सरस्वती वंदना योगेन्द्र सक्सेना योगी ने प्रस्तुत की।
ओशो सुरधाम की कविता लोहानी ने बताया कि बहुत ही उल्लास-आनंदपूर्ण वातावरण में हुई इस काव्यसंध्या में कवियों ने होली,राजस्थान दिवस,देश व शहीदों पर सूफियाना व ओजस्वी रचनाएं पढकर काव्यसंध्या को बुलंदी प्रदान की। श्यामसुन्दर मधुप ने *चंग बजाओ खुशी मनाओ,रंगों से खेलो तुम फाग*, ओम उज्जवल ने *देश आपणो बालो लागे केवां हिंदुस्तान*, निपुण शुक्ला ने *तुम्हें नहीं करार था मुझसे मिले बगैर,हर जां मुझे दीवानावार ढूंढ रही थी*, नरेंद्र दाधीच ने *पद्मिनी की जौहर गाथा जिसे हर कोई है गाता,इतिहास हुआ गर्वीला मेरा राजस्थान है रंगीला*, महेंद्र शर्मा ने *अंग-अंग में रंग सजाये बरसाने की राधे रानी,किन्तु मेडता की मीरा रानी ने प्रेम रंग ऐसा बरसाया,हुए बावरे स्वयं साँवरे,उस होली की बात करें*, डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने गजलें *अपने इशारों पे तूने जोरदार नचाया है,इक अफ़साने का मुझे किरदार बनाया है।*, *रिश्तों में अहसान नहीं अहसास चाहिए,वादों का अंबार नहीं विश्वास चाहिए।* एवं *आज पूरा हुआ मेरा वादा तुझे रचने का,ना भुलाना अपना वादा किसी दिन मुझे रचने का,ओ कविता!*, राधेश्याम गर्ग अभिनव ने *छीना है अमीरों ने गरीबों का निवाला,किया है घोटाले पे घोटाला* और एसएस गम्भीर ने *लोग देखते हैं दरवाजों की दरारों से कि अंदर क्या हो रहा है।*
इसी प्रकार अरुण अजीब ने *सूरज,गगन,चांद सब हैं बौने,बाँट रहे हैं स्नेह खिलौने*, योगेन्द्र सक्सेना ने *मरूधरा की मती में महके हैं दुर्लभ फूल,गौरव गाथा तुम्हें सुनायें इन्हें न जाना भूल।*, दिनेश दीवाना ने *भोर की पहली किरण जा उस मुख को चूम,जिसे देख मेरा जिया हरदम जाए झूम*, नरेंद्र वर्मा ने *रोज-रोज की चिकचिक से तो प्रेम चिपचिप अच्छी*, डॉ अवधेश जौहरी ने *हैरां हूं मैं प्यार से वो फिर मुकर गया*, बंशी पारस ने *करे मसखरी अठै मौत सूं या वा मीरां री खान है* एवं गोपाल पंचोली आशू ने *कभी-कभी आ जाया कर बेटा,तू बहुत उंचा बनना पर मेरी नजर में रहना।* जैसी रचनायें सुनाकर काव्यसंध्या को उच्च गरिमा प्रदान की।
अन्त में होली स्नेहमिलन किया गया,सबने एक-दूसरे को घेवर आदि खिलाकर बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा संयोजक डॉ एसके लोहानी ख़ालिस ने आभार व्यक्त किया।













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