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21 फरवरी 2026 शनिवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय और आईआईटीएम पुणे के मध्य हुआ एमओयू
बीटीयू में स्थापित होगा क्लाइमेट रेफरेंस स्टेशन, मरुस्थलीय क्षेत्र में जलवायु अध्ययन को मिलेगा बढ़ावा : प्रो अखिल रंजन गर्ग, कुलगुरु
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय और आईआईटीएम पुणे के मध्य हुआ एमओयू
बीटीयू में स्थापित होगा क्लाइमेट रेफरेंस स्टेशन, मरुस्थलीय क्षेत्र में जलवायु अध्ययन को मिलेगा बढ़ावा : प्रो अखिल रंजन गर्ग, कुलगुरु
बीकानेर, 21 फरवरी, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (बीटीयू), बीकानेर एवं भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के मध्य महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस एमओयू के तहत आईआईटीएम, पुणे द्वारा बीटीयू बीकानेर परिसर में भारत क्लाइमेट ऑब्जर्वेशन नेटवर्क के अंतर्गत एक क्लाइमेट रेफरेंस स्टेशन की स्थापना की जाएगी। यह समझौता बीटीयू बीकानेर को राष्ट्रीय स्तर के जलवायु अनुसंधान नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय जलवायु अध्ययन को नई दिशा मिलेगी। एमओयू पर बीटीयू की ओर से कुलगुरु प्रो.अखिल रंजन गर्ग तथा आईआईटीएम, पुणे की ओर से निदेशक डॉ ए सूर्यचंद्र राव ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बीटीयू की ओर से डॉ. गणेश पी. प्रजापत (डीन, इंडस्ट्री–इंस्टीट्यूट रिलेशंस), डॉ. ऋतुराज सोनी एवं डॉ. राणुलाल चौहान उपस्थित रहे वहीँ आईआईटीएम की ओर से डॉ. सुवर्णा फडनविस, डॉ. नवीन गांधी सहित अनेक वैज्ञानिक उपस्थित थे।
इस अवसर पर बीटीयू के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि, “बीकानेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में क्लाइमेट रेफरेंस स्टेशन की स्थापना न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पहल हमारे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी। बीटीयू को जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।वही आईआईटीएम, पुणे के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने अपने वक्तव्य में कहा कि यहां स्थापित होने वाला क्लाइमेट रेफरेंस स्टेशन मरुस्थलीकरण, भूमि–वायुमंडल अंतःक्रिया तथा ग्रीनहाउस गैसों के अध्ययन में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान देगा। बीटीयू के साथ यह सहयोग राष्ट्रीय जलवायु डेटा तंत्र को और सुदृढ़ करेगा।






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