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6 फरवरी 2026 शुक्रवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
गीतकार मगन कोचर को श्रद्धांजलि
गीतकार-गायक मगन कोचर को श्रद्धांजलि
देशभर में बिखेरी स्वर लहरियां, हर वाद्ययंत्र पर थी अद्भुत महारत
बीकानेर के सुप्रसिद्ध गीत-संगीत सम्राट स्व. मगन कोचर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कोचरों के चौक में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में शहर के गणमान्य नागरिकों, संगीत जगत से जुड़े कलाकारों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे और स्व. कोचर को नमन किया।
स्व. रिखबदास कोचर के सुपुत्र स्व. मगन कोचर ने जीवनभर निस्वार्थ भाव से कला की साधना की। उन्होंने देश के कोने-कोने में अपने गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के माध्यम से बीकानेर और राजस्थान का नाम रोशन किया। वे हजारों गीतों के रचयिता थे तथा लगभग सभी वाद्ययंत्रों पर उनकी अद्भुत पकड़ थी।
वर्ष 2010 के चातुर्मास के दौरान गच्छाधिपति आचार्यश्री धर्मधुरंधरजी महाराज द्वारा उन्हें “गीत-संगीत सम्राट” की उपाधि से सम्मानित किया गया। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक स्व. कोचर ने गुरु भक्ति के साथ-साथ बाबा रामदेव, भैरुनाथ बाबा, हनुमानजी, भोलेनाथ सहित अनेक देवी-देवताओं पर भजन रचे और उनका सजीव गायन किया। सभा में अनेकों व्यक्तियों ने श्री मगन जी कोचर के विराट व्यक्तित्व को याद कर श्रद्जलि दी। कोचर मंडल, वीर मंडल, जैन मंडल, आदिश्वर मंडल,महावीर मंडल, गौतम मंडल आदि अनेक संगीत मंडलों ने श्री मगन जी कोचर की याद में संगीत से श्रृदांजलि अर्पित की। भारत के विधि एव न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने मगन कोचर के निवास पहुंचकर उनके गाये भजनों को गाकर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की।
स्व. मगन कोचर ने कभी भी पुरस्कार या सम्मान को महत्व नहीं दिया, बल्कि संगीत को ही अपनी आराधना माना। उनकी रचनाओं में शास्त्रीय संगीत की गहराई, लोक संगीत की सुगंध और भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता था। उनका संगीत केवल मनोरंजन नहीं करता था, बल्कि सीधे हृदय को स्पर्श करता था।
उन्होंने अनेक शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी और उन्हें जीवन मूल्यों का पाठ भी पढ़ाया। व्यक्तिगत जीवन में वे अत्यंत सरल, विनम्र और आत्मिक रूप से समृद्ध व्यक्तित्व के धनी थे। उनका मानना था कि कलाकार जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही विनम्र होना चाहिए।
स्व. मगन कोचर का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। भले ही वे आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत, उनके संस्कार और उनकी स्मृतियाँ सदैव अमर रहेंगी।
कार्यक्रम का संचालन जितेन्द्र कोचर ने किया।





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