व्यापार में नैतिकता को प्राथमिकता दें- मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी का उद्योग जगत को संदेश
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28 जुलाई 2025 सोमवार
खबरों में बीकानेर
✒️@Mohan Thanvi
व्यापार में नैतिकता को प्राथमिकता दें- मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी का उद्योग जगत को संदेश
बीकानेर, 27 जुलाई। जिला उद्योग संघ बीकानेर द्वारा तेरापंथ भवन में आयोजित संगोष्ठी "उद्योग एवं व्यापार एक सच्ची सेवा" में उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी ने अपने उद्बोधन में व्यापार जगत में नैतिकता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के अर्थ-प्रधान युग में गृहस्थी के लिए अर्थ, काम और धर्म तीनों की साधना आवश्यक है, लेकिन इनमें धर्म का महत्व सर्वाधिक है। यदि धर्म नहीं है, तो अर्थ और काम शोभित नहीं होते।
ज्ञान, नैतिकता और चरित्र का महत्व
मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान युग में अर्थ और डिग्रियों की होड़ लगी है, जबकि सभी का एक ही लक्ष्य होना चाहिए: ज्ञान प्राप्त करना। ज्ञान के बिना डिग्री का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने हमें अपनी वृत्तियों को ऐसा बनाने की प्रेरणा दी, जहाँ ज्ञान को पहला और डिग्रियों को दूसरा स्थान मिले।
उन्होंने समझाया कि धन तो चोर और डाकू के पास भी होता है, फिर भी सेठ-साहूकार तो व्यापारी ही कहलाते हैं। उपासना पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन मानव धर्म और चरित्र धर्म एक है। जहाँ नैतिकता और प्रामाणिकता है, वहीं धर्म है। यदि इन्हें गौण कर दिया जाए, तो समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।
संयमित जीवन और न्यायपूर्ण धनार्जन
मुनिश्री ने हिंसा के विषय पर बात करते हुए कहा कि संसार का काम हिंसा के बिना नहीं होता, लेकिन अनर्थ हिंसा नहीं होनी चाहिए। हमारा जीवन संयममय होना चाहिए। उन्होंने पूर्वजों से मिली शिक्षा का स्मरण कराया कि मर्यादा और संयम में रहकर ही हम जीवन को सफल बना सकते हैं।
उन्होंने जोर दिया कि सभी उद्योगों की अपनी-अपनी मर्यादा होती है। न्याय करने वाला ही सफल होता है; अन्यायपूर्ण तरीके से प्राप्त किया गया धन ज्यादा दिन नहीं चलता है। नैतिक व्यक्तियों का सम्मान पहले भी होता था और आज भी होता है। चेहरों से नहीं, चरित्र से व्यक्ति की पहचान बनती है।
मुनिश्री ने संस्कृत के श्लोक "वृत्तं यत्नेन संरक्षेद् वित्तमेति च याति च। अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हत:" का उद्धरण देते हुए समझाया कि हमें अपने आचरण की रक्षा का प्रयत्न करना चाहिए। धन तो आता-जाता रहता है, धन के नष्ट होने से कुछ नहीं होता, लेकिन आचरण नष्ट हो जाए तो सब कुछ नष्ट हो जाता है। हमें वस्तु से ज्यादा विचारों पर ध्यान देना चाहिए और दिखावे पर अधिक ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने भोग से संयम की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
सफल व्यापार के लिए नैतिकता और गुणवत्ता
मुनिश्री ने प्रेरणा दी कि व्यक्ति धनवान, बलवान या रूपवान हो या न हो, लेकिन चरित्रवान अवश्य होना चाहिए। मन में हमेशा यह भावना रहनी चाहिए कि 'मेरे द्वारा कभी किसी का नुकसान न हो।' उन्होंने सभी प्राणियों के साथ दोस्ती रखने, अपने व्यापार को सभी प्रकार से साफ-सुथरा रखने, नापतोल सही रखने और माल की गुणवत्ता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नैतिकता और प्रामाणिकता को प्राथमिकता देनी चाहिए और अर्थ बाहुल्य के इस युग में येन-केन-प्रकारेण धन प्राप्त करने की भावना नहीं रखनी चाहिए।
इस अवसर पर युवक रत्न राजेंद्र सेठिया ने तीन फैक्ट्री अपने शरीर में लगाने की प्रेरणा दी: दिमाग में आइस फैक्ट्री (शांत रहने के लिए), मुँह में शुगर फैक्ट्री (मीठा बोलने के लिए), और दिल में प्रेम की फैक्ट्री (सबके प्रति प्रेम रखने के लिए)। उन्होंने कहा कि व्यवसाय में प्रामाणिक होने पर सफलता अवश्य मिलेगी। जीवन में संतोष वृत्ति का विकास जरूरी है, अन्यथा मानसिक शांति कभी नहीं मिल पाएगी। शुद्ध साधन से ही शुद्ध साध्य की प्राप्ति होनी चाहिए। मुनि श्री श्रेयांस कुमार जी ने प्रेरणादायी गीतिका का संगान किया।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री द्वारका जी पच्चीसिया, उद्योगपति श्री कन्हैयालाल बोथरा, आचार्य श्री तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री गणेश बोथरा, और जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा गंगाशहर के मंत्री जतन लाल संचेती ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष द्वारका जी पच्चीसिया का तेरापंथ समाज के जैन लूणकरण छाजेड़, गणेश मल बोथरा, और अमर चंद सोनी ने जैन पताका पहनाकर व साहित्य भेंट कर सम्मान किया। सञ्चालन विमल चौरड़िया ने किया।





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