- मोहन थानवी
जो अवसर पर, सटीक अवसर पर सटीक घोषणाएं करता है, वो नेता सभी का चहेता होने का दम भरता है। ऐसी घोषणा कला के ज्ञाता जानते हैं, चुनावी घोषणाएं कब से की जानी चाहिए। जैसा कि पब्लिक सब जानती है। इन दिनों आगामी वर्ष के पंच वर्षीय महा लोक तंत्र कुंभ रूपी चुनाव के स्वागत में......👇
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हे मतदाता देव... हमने तो घोषणा कर दी...
- मोहन थानवी
जो अवसर पर, सटीक अवसर पर सटीक घोषणाएं करता है, वो नेता सभी का चहेता होने का दम भरता है। ऐसी घोषणा कला के ज्ञाता जानते हैं, चुनावी घोषणाएं कब से की जानी चाहिए। जैसा कि पब्लिक सब जानती है। इन दिनों आगामी वर्ष के पंच वर्षीय महा लोक तंत्र कुंभ रूपी चुनाव के स्वागत में खूब योजनाएं कागजों पर बन कर कंठों से स्वर पा कर जन जन तक पहुंचने की छटाएं दिखा रही हैं। किसी बस्ती के विकास के लिए जहां हजारों के टोटे पड़े रहते हैं वहां अब लाखों की बातों के तोते उड़ाए जाने लगे हैं। यही तो है घोषणा कला की बानगी। बहुत ही आम किस्म की बानगी। उच्च कोटि की घोषणाओं की बानगी भी पब्लिक जानती है। ऐसी घोषणाएं सरकार की आर्थिक सेहत को दीर्घावधि तक प्रभावित करने वाली भी हो सकती हैं, जिनको अमलीजामा पहनाना घोषणा करने वाली सत्तासीन पार्टी के नेताओं को भी दुष्कर लगने लगता है। मगर ऐसी घोषणाएं इसलिए भी की जाती हैं कि खुदा न ख्वास्ता विपक्ष में बैठना पड़ जाए तो जनता को कहा जा सके कि हे मतदाता देव, वोट हमें देते तो हम ये कर देते, वो कर देते, यूं कर देते, वैसे कर देते। अब की हमें वोट दीजिएगा, हम वो सब कर देंगे। जादू की चुटकी से। चुटकी और जादू का करिश्मा एक साथ। बार बार । लगातार। पब्लिक सब जानती है। राज कला संकाय पढ़ती है। घोषणा कला का पीरियड भी जनता को मालूम है। जय जय।





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