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संवाद-बहस से राजनीति में बढ़ रही शुचिता की अहमियत...!!
जागरूक आमजन दे रहे नेताओं को सही दिशा में आगे बढ़ने का संकेत
- मोहन थानवी
आज की राजनीति क्या सचमुच फिर से शुचिता पर केंद्रित होती जा रही है ! लोगों में ऐसी चर्चा है। शिक्षा का प्रसार होने से एवं सोशल मीडिया, टीवी चैनलों, समाचार पत्रों में राजनीति विषयक जानकारी से परिपूर्ण आलेख पढ़ने, बहसें सुनने से आमजन अब भ्रामक सूचनाओं को जल्द ही पहचानने में सफल भी हो जाता है। कहा जा सकता है कि इससे आमजन में जागरूकता फैल रही है। संभवत यही कारण समझा जा सकता है की राजनीति के हलकों से जुड़े लोग अब सुचिता से कार्य संपादित कर आम जनता को विश्वास में लेना पसंद करने लगे हैं।
चर्चा यह भी है कि राजनीति कभी घोटालों तो कभी दल-बदल कभी सरकारें गिराने और सरकारें कायम रखने के मुद्दों पर होती देखी जाती थी। किंतु अब जब से सबसे बड़े विकास और राष्ट्रोत्थान के मुद्दे सामने आए तब से राजनीतिक जगत के अधिकांश जाने-माने चेहरे अपने संवाद को पारदर्शिता के साथ इन्हीं पर केंद्रित रखने की भरसक कोशिश में दिखते हैं। जबकि कतिपय चेहरों का विषय बेरोजगारी, महंगाई और कथित समाजकंटकों एवं कानून तोड़ने के आरोपियों के इर्द-गिर्द देखा गया है। लोग यह भी कह रहे हैं कि किसी भी मुद्दे पर संवाद शुरू हो प्रखर वक्ता उसे येनकेन प्रकारेण महिलाओं और गरीबी पर ले जाने से भी चूकते नहीं। जागरूक कुछ लोगों का ऐसा कहने के पीछे भी कारण है। वह कारण है सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से होने वाली खुली चर्चा में ऐसा होते देखा और सुना जाना।
इस चर्चा में समाज के विभिन्न घटकों के विषय विशेषज्ञों सहित प्रमुख राजनीतिक दलों के नामी परिचित नेता-प्रवक्ता भी शामिल रहते हैं। और आरोप प्रत्यारोप के प्रति उत्तर में बात घूमते घुमाते नीतियों, शिक्षा, भ्रष्टाचार, अपराध, महिला जाग्रति, रोजगार, पारदर्शिता पर भी दृष्टिपात् करती प्रतीत होती है। हालांकि ऐसी स्वस्थ संवाद चर्चा में राजनीतिक मुद्दों को बखूबी उठाया जाता है। इनमें घटित बहु चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम भी शामिल रहते हैं तो कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार के मामले भी पुनर्लेखित होते रहते हैं। मगर बहुत-सी बार बात घूम फिर कर गरीबों के कल्याण के कार्यों और विकास के सोपान तय करने के श्रेय लेने पर आ बहस का विषय ही परिवर्तित करने वाली बन जाती है।
इसी तरह महिलाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों को गिनाया जाने लगता है। इस बीच महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध का विषय भी चर्चा में तेजी से आता है लेकिन बस छूकर उसे एक तरफ कर दिया जाता है।
ऐसी ही बातें आमजन को जागरूक बनाने में सहयोगी प्रतीत होती हैं। यह संकेत भी मिल रहा है कि जागरूक हो रहे समाजों - लोगों के विश्वास को जीतने के लिए पारदर्शिता के साथ-साथ अब राजनीति शुचिता पर केंद्रित हो रही है। यह कहा जा सकता है कि जागरूक आमजन नेताओं को सही दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दे रहे हैं।
तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य में इसे अच्छा संकेत भी माना जा रहा है।



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