*खबरों में बीकानेर*
चुनाव : पर्दे के पीछे - टिकट मिल गया चंदा चाहिए, चुनाव कार्यालय को रौनक का इंतजार...
आखिरकार चुनाव लड़ने के लिए अधिकांश क्षेत्रों में दमदार दावेदारों को पार्टी का टिकट मिल ही गया। अब फिजां बदली-बदली - सी है। परिवर्तन भी कैसा नियम है। जो हर विषय पर लागू हो रहा है। चुनाव और चुनाव से जुड़े नेताओं पर भी परिवर्तन का नियम लागू होता दिखाई दे रहा है। अब देखिए ना। चंद दिन पहले तक चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता अपनी-अपनी पार्टी से टिकट टिकट खेल रहे थे।
अब पार्टी ने टिकट दे दिया है और काफी प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र भी भर दिए हैं। ऐसे में चुनावी गतिविधियां सरगर्म होनी चाहिए लेकिन... लेकिन अंदर खाने पता चल रहा है कि कुछ लोग प्रत्याशी के लिए चंदा जुटाने के कार्य को प्राथमिकता दे रहे हैं। भीतर ही भीतर से निकल कर सामने आ रही एक जानकारी तो ऐसी है की एक प्रत्याशी ने कुछ समय पहले ही एक दमदार शेर रहे नेता के रिहायशी इलाके में अपनी काफी संचित राशि से संपत्ति खरीदी।
और उसके बाद टिकट के लिए आलाकमान की हाजिरी लगाने जा पहुंचे। अब टिकट हाथ में आने के बाद चुनावी खर्च का सिरसा के मुंह की तरह खुला दिखाई दे रहा है और वे स्वाभाविक रूप से सहयोग के लिए चंदे की आस में दिखाई देने लगे हैं।
यह स्थिति भी जल्द ही बदल जाएगी ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि परिवर्तन के नियम को देखते हुए ऐसा कयास लगा रहे हैं। और इस स्थिति को बदलने के लिए नामांकन की अंतिम तिथि निकलने तथा नाम वापस लेने की अवधि भी समाप्त होने की प्रतीक्षा रहेगी।
इस बीच अधिकांश प्रत्याशियों ने अपने-अपने चुनाव कार्यालय जनता के समक्ष खोल दिए हैंव लेकिन मजे की बात यह है कि अभी इन कार्यालय में वांछित रौनक दिखाई नहीं देती। ऐसे ही एक बड़े से डेरे में दो दिन पूर्व ही उद्घाटित पार्टी के कार्यालय से शुरुआती शाम के समय होता हुआ निकला हूं। वहां ढेरों में से चार कुर्सियों पर बैठे चार लोग और खड़े हुए दो जने दिखाई दिए। यह तय है कि यह स्थिति भी जल्द ही बदलेगी और इन चुनाव कार्यालय में कार्यकर्ताओं की रेलमपेल दिखाई देने लगेगी।





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