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धनतेरस पर ऐसे करें दीपदान, काली चौदस/ नरक चतुर्दशी यूं लाएगी खुशियां
व्रत पर्व विवरण - धनतेरस, प्रदोष व्रत, धन्वंतरि जयंती, आयुर्वेद दिवस*
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*🌹 धनतेरस - 22 अक्टूबर 2022 🌹*
*🌹अकालमृत्यु निवारण हेतु दीपदान 🌹*
*🌹 धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि ने दुःखीजनों के रोग-निवारणार्थ आयुर्वेद का प्राकट्य किया था । इस दिन संध्या के समय घर के बाहर हाथ में जलता हुआ दीप लेकर भगवान यमराज की प्रसन्नता हेतु उन्हें इस मंत्र के साथ दीपदान करना चाहिए । इससे अकाल मृत्यु नहीं होती ।*
*🌹 मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह । त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति ।।*
*🌹 यमराज को दो दीपक दान करने चाहिए व तुलसी के आगे दीपक रखना चाहिए । इससे दरिद्रता मिटाने में मदद मिलती है । (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)*
*🌹 काली चौदस/ नरक चतुर्दशी - 24 अक्टूबर 🌹*
*🌹 नारकीय यातनाओं से रक्षा 🌹*
*🌹 नरक चतुर्दशी (काली चौदस) के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश (तैलाभ्यंग) करके स्नान करने का विधान है । 'सनत्कुमार संहिता' एवं 'धर्मसिंधु' ग्रंथ के अनुसार इससे नारकीय यातनाओं से रक्षा होती है ।*
*🌹 काली चौदस और दीपावली की रात जप-तप के लिए बहुत उत्तम मुहूर्त माना गया है । नरक चतुर्दशी की रात्रि में मंत्रजप करने से मंत्र सिद्ध होता है ।*
*🌹 इस रात्रि में सरसों के तेल अथवा घी के दिये से काजल बनाना चाहिए । इस काजल को आँखों में आँजने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती तथा आँखों का तेज बढ़ता है ।*
*🌹 दीपावली - 24 अक्टूबर 2022🌹*
*🌹 सुख-सम्पत्ति की वृद्धि के लिए दो विशेष दीपक*
विवरण पूरा पढ़ें 👇
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग~🌞*
*⛅दिनांक - 22 अक्टूबर 2022*
*⛅दिन - शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2079*
*⛅शक संवत् - 1944*
*⛅अयन - दक्षिणायन*
*⛅ऋतु - शरद*
*⛅मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र में अश्विन मास)*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - द्वादशी शाम 06:02 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी दोपहर 01:50 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
*⛅योग - ब्रह्म शाम 05:13 तक तत्पश्चात इन्द्र*
*⛅राहु काल - सुबह 09:32 से 10:58 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:39*
*⛅सूर्यास्त - 06:09*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:59 से 05:49 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:59 से 12:49 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - धनतेरस, प्रदोष व्रत, धन्वंतरि जयंती, आयुर्वेद दिवस*
*⛅
*🌹 धनतेरस - 22 अक्टूबर 2022 🌹*
*🌹अकालमृत्यु निवारण हेतु दीपदान 🌹*
*🌹 धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि ने दुःखीजनों के रोग-निवारणार्थ आयुर्वेद का प्राकट्य किया था । इस दिन संध्या के समय घर के बाहर हाथ में जलता हुआ दीप लेकर भगवान यमराज की प्रसन्नता हेतु उन्हें इस मंत्र के साथ दीपदान करना चाहिए । इससे अकाल मृत्यु नहीं होती ।*
*🌹 मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह । त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति ।।*
*🌹 यमराज को दो दीपक दान करने चाहिए व तुलसी के आगे दीपक रखना चाहिए । इससे दरिद्रता मिटाने में मदद मिलती है । (स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)*
*🌹 काली चौदस/ नरक चतुर्दशी - 24 अक्टूबर 🌹*
*🌹 नारकीय यातनाओं से रक्षा 🌹*
*🌹 नरक चतुर्दशी (काली चौदस) के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश (तैलाभ्यंग) करके स्नान करने का विधान है । 'सनत्कुमार संहिता' एवं 'धर्मसिंधु' ग्रंथ के अनुसार इससे नारकीय यातनाओं से रक्षा होती है ।*
*🌹 काली चौदस और दीपावली की रात जप-तप के लिए बहुत उत्तम मुहूर्त माना गया है । नरक चतुर्दशी की रात्रि में मंत्रजप करने से मंत्र सिद्ध होता है ।*
*🌹 इस रात्रि में सरसों के तेल अथवा घी के दिये से काजल बनाना चाहिए । इस काजल को आँखों में आँजने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती तथा आँखों का तेज बढ़ता है ।*
*🌹 दीपावली - 24 अक्टूबर 2022🌹*
*🌹 सुख-सम्पत्ति की वृद्धि के लिए दो विशेष दीपक*
*दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे के दायीं और बायीं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी लगाकर उसपर दो दीपक जला दें । हो सके तो वें रात भर जलते रहें, इससे आपके घर में सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होगी । दीपावली की रात मंदिर में रातभर घी का दीया जलता रहे सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है ।*
*🌹 प्रसन्नता एवं रोगप्रतिकारक शक्ति-वर्धक - तोरण*
*पहले के जमाने में गाँवों में दीपावली के दिनों में नीम और अशोक वृक्ष के पत्तों के तोरण (बंदनवार) बांधते थे । अशोक और नीम के पत्तों में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है । उस तोरण के नीचे से गुजरकर जाने से वर्षभर रोगप्रतिकारक शक्ति बनी रहती है । वर्ष के प्रथम दिन आप भी अपने घरों में तोरण बाँधकर इसका लाभ उठाएं ।*
*🌹 बाजारू मिठाईयों, कुरकुरे आदि से सावधान!*
*मिठाईयों में शुद्ध बेसन व शुद्ध चीजों की बनी मिठाई शगुन समझकर थोड़ी बहुत खा लें लेकिन रसगुल्ले, मावा, पनीर से बनी मिठाईयाँ दूर से ही त्याग दें । मावा, रसगुल्ला व बर्फी किडनी, हृदय, नाड़ीतंत्र एवं पाचनतंत्र को नुकसान पहुँचाते-पहुँचाते असमय बुढ़ापा और बुढ़ापे में ऑपरेशनों का शिकार बना देते हैं । कुरकुरे आदि नमकीन में कुरकुरापन बढ़ाने के लिए बेसन के बदले चावल का आटा मिलाया जाता है, जो आँतों के लिए बहुत हानिकारक है ।*






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