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उदयरामसर से अन्नाराम ‘सुदामा’ जन्मशताब्दी वर्ष का आगाज
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उदयरामसर से अन्नाराम ‘सुदामा’ जन्मशताब्दी वर्ष का आगाज
बीकानेर (उदयरामसर)। राजस्थानी एवं हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ कथा उपन्यासकार अन्नाराम सुदामा के जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम की शृंखला का शुभारम्भ रविवार को उनकी कर्मभूमि गांव उदयरामसर में संगोष्ठी के आयोजन से किया गया। इस अवसर पर उनके साहित्यिक अवदान को लेकर 23 मई, 2023 तक विविध साहित्यिक आयोजन किए जाने का निर्णय लिया गया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि हरिगोपाल हर्ष ‘सन्नू’ ने कहा कि सुदामा जी का साहित्य शैली, शिल्प और सम्प्रेषण की दृष्टि से उच्च कोटि का है जो पाठक को बांधे रखता है। मार्मिक विषयों में भी हास्य और व्यंग्य का पुट उनकी प्रत्येक रचना विशिष्टता रही है। अन्नाराम सुदामा की प्रत्येक पुस्तक का आवरण चित्र बनाने वाले ‘सन्नू’ ने पचास वर्ष पहले इन चित्रों को बनाने और ब्लाॅक के माध्यम से छपाने की उस समय की जटिल प्रक्रिया के बारे में भी अपने अनुभव साझा किए।
अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् डाॅ. घनश्याम आत्रे ने कहा कि सुदामा जी का साहित्य ‘हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता’ की तरह है। उनके विपुल साहित्य कर्म को एक संगोष्ठी के माध्यम से अभिव्यक्त करना संभव नहीं है। उनके उपन्यास ‘मेवै रा रूंख’ और ‘मैकती काया मुळकती धरती’ तो हिन्दी में मुंशी प्रेमचन्द की तरह राजस्थानी के पाठ्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्षों तक पढ़ाए जा रहे हैं।
उनकी स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन निरंतर होने चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उदयरामसर के सरपंच हेमन्त यादव, समाजसेवी श्रीकिशनमल एवं बसन्त कुमार थे। इस अवसर पर उदयरामसर में अन्नाराम सुदामा का मूर्ति सर्किल बनाए जाने और उदयरामसर गांव के उच्च माध्यमिक विद्यालय में राजस्थानी विषय प्रारम्भ करवाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
संगोष्ठी में साहित्यकार डाॅ. मनमोहन सिंह यादव, सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी ओमप्रकाश सारस्वत, पुस्तक विशेषज्ञ अमरसिंह खंगारोत एवं स्कूल के प्राचार्य मुकेश यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन राजस्थानी व्यंग्यकार शंकरसिंह राजपुरोहित ने किया।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें और बधाइयां 🌹- मोहन थानवी







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