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बीकानेर : गीता मंदिर में हुआ इस्कॉन का गीता-अमृत-रसधारा अनुष्ठान
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बीकानेर : गीता मंदिर में हुआ इस्कॉन का गीता-अमृत-रसधारा अनुष्ठान
अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) बीकानेर , की ओर से रविवारीय प्रीतिभोजन कार्यक्रम गीता मंदिर, कमला कॉलोनी में आयोजित किया गया | इसमें मुख्य वक्ता के रूप में इस्कॉन के उत्तर पूर्व क्षेत्र प्रभारी देवकीनंदन प्रभुजी ने भक्तों को संबोधित करते हुए भगवद गीता की महत्त्वता बताई| उन्होंने बताया की भगवद गीता को वेदों का सार बताया गया है | यदि सारे उपनिषदों को गाय के समान मान लिया जाय और भगवान कृष्ण को ग्वाला मान लिया जाये, तथा अर्जुन को बछड़ा मान लिया जाये तो जो दूध निकलता है वह है भगवद गीता| जिस प्रकार दूध पीकर शारीरिक बल प्राप्त होता है उसी प्रकार गीता रूपी दूध का पान करने से आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है| जिस प्रकार माता का कार्य है बच्चों को सुखी करना उसी प्रकार गीता का कार्य है बद्ध जीव को सुखी करना| भगवद गीता के श्लोक 8.5 को समझाते हुए उन्होंने यह भी बताया की श्री शुकदेव गोस्वामी परीक्षित महाराज को भागवत का सन्देश सुनाते हुए बताते है की मरने वाले व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा कार्य है भगवान नारायण का स्मरण करना| उन्होंने अजामिल ब्राह्मण की कथा सुनाई|उन्होंने बताया की जिस प्रकार एक छोटा बच्चा गंभीरता से माँ के लिए रोता है उसी प्रकार गंभीरता से भगवान का नाम लेना चाहिए| इस मौके पर अन्य प्रवक्ता इस्कॉन के राजस्थान विभाग के रीजनल सेक्रेट्री पंचरत्न प्रभुजी ने बताया की केवल गीता पढ़ना ही काफी नहीं बल्कि इसे अपने जीवन में लागू करना होगा| इस अवसर पर लगभग १०० भक्तों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया |







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