खबरों में बीकानेर
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डॉ.श्रीलाल मोहता स्मृति पुस्तकालय का शुभारंभ
पुस्तकों से ही बौद्धिक विकास सम्भव - श्रीमती ओझा
श्रीकोलायत - भेळू - पुस्तकें पढ़ने की आदत कम होने से आज के युवाओं का बौद्धिक विकास अपेक्षाकृत कम हो रहा है। अतः पुस्तकालय के माध्यम से हमें युवाओं में पढ़ने की आदतों का विकास करना होगा। ये उद्बोधन थे बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति एवं उरमूल सीमांत, बज्जू की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला ओझा के। श्रीमती ओझा ने डॉ. श्रीलाल मोहता स्मृति पुस्तकालय के शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आधुनिकता की दोड़ में आज के युवा पुस्तकालय से दूर होते जा रहे है। मॉबाइल और इन्टरनेट के प्रयोग से पढ़ने-लिखने की आदत में भंयकर कमी हुई है। इस कमी को सिर्फ इस तरह के पुस्तकालय से ही दूर किया जा सकता है। यह अवसर था बीकानेर प्रोढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर और उरमूल सीमांत समिति, बज्जू के संयुक्त तत्वावधान में श्रीकोलायत विकास खण्ड के गांव भेळू में उरमूल सीमांत के विस्तार भवन में प्रख्यात लोककला मर्मज्ञ, साहित्यकार, रंगकर्मी, बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष एवं उरमूल सीमांत के संस्थापाक सदस्य की स्मृति में पढ़ने की आदतों के विकास के उद्धेश्य से डॉ. श्रीलाल मोहता स्मृति पुस्तकालय का उद्घाटन समारोह।
इससे पूर्व बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला ओझा, सचिव श्री ओम कुवेरा, जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर के अध्यक्ष श्री अविनाश भार्गव और बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति की सम्मानित सदस्या एवं डॉ. श्रीलाल मोहता की धर्मपत्नी श्रीमती उषा मोहता के कर कमलों से पुस्तकालय का विधिवत रूप से उद्घाटन किया गया।
जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर के अध्यक्ष अविनाश भार्गव ने आगन्तुकों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तकालय सिर्फ एक पुस्तकालय नहीं है यहां पर गांव के युवाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए एक प्रेरणा केन्द्र का विकास किया जायेगा जिसमें युवाओं के बौद्धिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए सभी सुविधाओं की व्यवस्था की जायेगी। श्री भार्गव ने कहा कि बीकानेर प्रौढ शिक्षण समिमित, बीकानेर द्वारा संचालित एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित पोषित जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर द्वारा किशोरियों एवं युवतियों के लिए इस गांव में एक सिलाई का प्रशिक्षण केन्द्र भी प्रस्तावित है लेकिन गांव के लोगों से ये अनुरोध है कि इन दोनों ही गतिविधियों में संस्थान का सहयोग करें ताकि गांव की युवा शक्ति का विकास हो सके।
बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर के मानद् सचिव ओम कुवेरा ने जापान के प्रबंधन की चर्चा करते हुए कहा कि हम कोई भी कार्य करें परन्तु उस काम में कुशलता हासिल करनी जरूरी है। बिना कुशलता आप किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। जीवन में सम्प्रेषण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री कुवेरा ने जीवन में बिना शब्दों के भी समप्रेषण के कई उदाहरण दिए और कहा कि जो व्यक्ति सम्प्रेषण कला में कुशल होता है वह किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहता।
बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति की माननीय सदस्या श्रीमती उषा मोहता ने कहा कि डॉ.श्रीलाल मोहता का सपना था कि युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित की जाए, उन्हीं के इस सपने को पूरा करने के उद्धेश्य से यहां उनकी याद में पुस्तकालय शुरू किया गया है।
परम्परा, बीकानेर (मुख्य कार्यालय मद्रास) संस्थान की ओर से इस पुस्कालय को डॉ.श्रीलाल मोहता द्वारा संपादित की हुई पुस्तक तुलसी वृंदावन, बाल साहित्य एवं धार्मिक पुस्तकें भी भंेट की गई, साथ ही आमजन को भी तुलसी वृंदावन, बाल साहित्य एवं धार्मिक पुस्तकें पुस्तकें अतिथियों के कर कमलों से वितरित भी की गई।
कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने कहा कि जौधपुर की सीमा पर बसे इस गांव में पहली बार इस प्रकार के पुस्तकालय की शुरूआत हुई है। इस पुस्तकालय की सकारात्मक प्रगति के आधार पर इस गांव में संस्थान की ओर से भविष्य में विभिन्न प्रकार की अन्य गतिधिधियों का आयोजन किया जायेगा।
इस कार्यक्रम में गांव की सरूप जोशी, नीलम पंचारिया, सरस्वती, मोनिका शर्मा, उषा शर्मा, शालू शर्मा एवं आंगन बाड़ी कार्यकर्ता कमला शर्मा का सक्रिय सहयोग रहा।
कार्यक्रम के अंत में उरमूल सीमांत के खुमाराम ने पुस्तकालय को सुचारू रूप से संचालित करने का भरोसा दिलाते हुए आगन्तुकों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
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C P MEDIA
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