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कृषि मंत्री कटारिया ने किया कृषि महाविद्यालय के कक्षा कक्षों का लोकार्पण
35वां स्थापना दिवस वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित
बीकानेर, 01अगस्त। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के द्वारा 35 स्थापना दिवस के अवसर पर वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष माननीय कुलपति प्रो. आर.पी. सिंह, मुख्य अतिथि माननीय कृषि मंत्री श्री लालचंद जी कटारिया, विशिष्ट अतिथि डॉ अंबरीश शरण विद्यार्थी, माननीय कुलपति बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय एवं अमूल (Amul) आनंद गुजरात के प्रबंध निदेशक, डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने संबोधित किया । मंत्री महोदय द्वारा कृषि महाविद्यालय के कक्षा कक्षों का उद्घाटन किया गया । राजस्थान सरकार के द्वारा 32 लाख की लागत तैयार दो कक्षा-कक्षों में से प्रत्येक कक्षा में 72 विद्यार्थियों के बैठने की क्षमता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।
कुलपति प्रो. आर.पी. सिंह ने स्वागत उद्बोधन में मंत्री महोदय का आभार प्रकट किया कि गत वर्ष श्रीगंगानगर में एक और इस वर्ष हनुमानगढ़, चंदगोठी (चुरू) एवं मंडावा (झुन्झुनू) में तीन नवीन कृषि महाविद्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान करके बजट एवं पद स्वीकृत किए। राजस्थान के इस प्रथम विश्वविद्यालय की स्थापना 1987 में राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के रूप में की गई जिसका कार्यक्षेत्र उस समय संपूर्ण राजस्थान था। वर्ष 1999 में उदयपुर एवं वर्ष 2013 में जोबनेर, जोधपुर एवं कोटा के नए कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। आज इस विश्वविद्यालय के कार्य क्षेत्र में 6 जिले आते हैं। इस विश्वविद्यालय के तहत दो कृषि अनुसंधान केन्द्र, एक कृषि अनुसंधान उप-केन्द्र व एक राष्ट्रीय बीज परियोजना, सात कृषि विज्ञान केन्द्र, पांच संघटक कृषि महाविद्यालय, एक गृह विज्ञान महाविद्यालय तथा दो कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान एवं 16 संबद्ध कृषि महाविद्यालय संचालित हैं। पिअर रिव्यू टीम ने नवंबर 2019 में विश्वविद्यालय का अवलोकन किया । इसके पश्चात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा पांच साल (1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक) के लिए विश्वविद्यालय का एक्रीडेशन हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जारी 2020 की वार्षिक रैंकिंग में 25 स्थानों का सुधार किया है। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय 57वें स्थान पर था, जबकि इस बार 32वां स्थान हासिल किया है। विद्यार्थियों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रत्येक महाविद्यालय में आधुनिक सुविधायुक्त प्रयोगशालाएं, डिजिटल पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास रूम (कक्षा-कक्ष), वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग,कम्प्यूटर लैब, इंटरनेट सुविधांए भी उपलब्ध हैं । विश्वविद्यालय अब तक 16356 स्नातक 3795 स्नातकोत्तर एवं 718 विद्यावाचस्पति उपाधियां 17 दीक्षांत समारोह आयोजित करके प्रदान कर चुका है। विश्वविद्यालय ने कपास, चना, सरसों, बाजरा, मोठ, मूंगफली, ग्वार, चारा फसलों, खजूर, नींबू वर्गीय फलों, जल प्रबन्धन, क्षारीय मृदा सुधार एवं प्रजनक बीज आदि पर अनुसंधान कर राजस्थान प्रदेश और विशेषकर शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए कई उन्नत कृषि तकनीक व नवीन किस्मों का विकास किया है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्ति या प्राप्त हो रही है यह अत्यंत गर्व का विषय है कि हमारे विद्यार्थियों का चयन देश विदेश में प्रतिष्ठित संस्थानों में हो रहा है। किसानों के लिए उन्नत बीज उत्पादन विश्वविद्यालय की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। अखिल भारतीय बाजरा अनुसंधान परियोजना और चना परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। विश्वविद्यालय की सभी इकाइयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं यह कार्य पूर्णता की ओर है इसे प्रति वर्ष ₹50 लाख की बचत होने का अनुमान है। विश्वविद्यालय की प्रदेश इकाई में पौधरोपण किया जा रहा है यहां की हाईटेक नर्सरी में बिना कांटे वाली खेजड़ी 30 हजार ग्राफ़्टेड पौधों के साथ-साथ अन्य प्रजातियों के लगभग 2 लाख पौधे तैयार किए गए हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के साथ किए गए एमओयू के परिणाम स्वरूप विश्वविद्यालय को विदेशी छात्र आवंटित हुए हैं जो वर्तमान में या अध्ययन कर रहे हैं। कोविड-19 की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय जिला प्रशासन का सहयोग करते हुए विश्वविद्यालय परिसर के किसान घर, अतिथि गृह एवं इंटरनेशनल हॉस्टल को आइसोलेशन एवं क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में स्थापित किया गया जहां पर वर्तमान में भी कोविड केयर सेन्टर कार्यशील है।
माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार की दूरगामी सोच है जिसके तहत कृषि शिक्षा में राजस्थान आगे बढ़ रहा है और नए कृषि विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं। विश्वविद्यालय व कृषि वैज्ञानिकों के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि 154 किसने विकसित की जिसमें कपास, चना, मोठ है। 400 से ज्यादा उत्पादन तकनीक दी है। चने की जीएनजी 1581 किस्म किसानों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, 20% से ज्यादा बुवाई इसी बीज से की जाती है। विश्वविद्यालय ने संसाधनों और क्षमता के अनुसार बेहतरीन प्रदर्शन किया है ऐसे में विद्यार्थियों की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह अच्छा प्रदर्शन करें और आगे बढ़े। विश्वविद्यालय से अपेक्षा है कि वह राज्य सरकार की कृषि एवं कृषक कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए कार्य योजना बनाएं और प्रयास करें ताकि प्रत्येक किसानों को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। विश्वविद्यालय की रैंकिंग में 25 पायदान का सुधार होने पर बधाई दी। कोविड काल में काश्तकारों खासकर युवाओं का रुझान एक बार फिर खेती की ओर बढ़ना अच्छा संकेत है महामारी के दौर में निजी क्षेत्रों के नौकरी पेशा युवाओं की सामने रोजगार की चुनौती आई तो उन्होंने खेती को एक सहारा बनाया। विश्वविद्यालय के अल्प समयावधि के व्यावसायिक प्रशिक्षण ओं के माध्यम से युवाओं को जैविक खेती, जल बचत खेती, मूल्य संवर्धन और मुर्गी पालन जैसे विषयों में पारंगत करने की लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे अधिक से अधिक समय खेतों पर बिताए और किसानों को मार्गदर्शन के साथ-साथ उनकी व्यावहारिक परेशानियों का भी निदान करें राज्य की बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने की दिशा में प्रयास करें। जल संरक्षण का संदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा डिग्गी का निर्माण जल हौज का निर्माण का जिक्र किया। जैविक खेती और रसायनों के बढ़ते हुए प्रभावों पर भी चर्चा की। विश्वविद्यालय के उन अपशिष्ट को उन्नत खाद जैविक खाद में बनाने के प्रयास की प्रशंसा की। इसके अतिरिक्त जल प्रबंधन वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कम समय, कम पानी की आवश्यकता वाली रोग व कीट रोधी फसलें तैयार करें किसानों को समन्वित कृषि प्रणाली से अवगत कराएं एवं इसके प्रति जागरूक करें ताकि उन्हे अधिक से अधिक लाभ हो विश्वविद्यालय के सोलर ऊर्जा से बिजली बचत की भी प्रशंसा की। माननीय मंत्री ने कोरोना संक्रमण के समय अध्ययन अध्यापन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना के समय सभी गतिविधियां बाधित हो गई वहीं शिक्षा और इससे जुड़े कार्यों को अनवरत बनाए रखने की चुनौती का सामना करते हुए ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था की गई।
प्रबंध निदेशक डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने कहा कि पशुपालन, कृषि के द्वारा ही देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। पशुपालन से किसानों की आय अन्य की अपेक्षा जल्दी बढ़ती है। वोकल फॉर लोकल लोकल फॉर ग्लोबल मंत्र को दोहराया। अमूल की प्रगति किसानों व ग्रामीण भारत के उत्थान पर ज़ोर दिया। भारत सरकार के कॉपरेटिव मंत्रालय का स्वागत किया। डॉ अंबरीश शरण विद्यार्थी, माननीय कुलपति बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय ने कृषि, मृदा, जल, खाद्यान की क़िस्मों व नई तकनीक का उपयोग कर नई क़िस्मों को ईजाद करने पर संबोधित किया और कहा की कृषि व तकनीकी दोनों विश्वविद्यालय मिलकर किसानों के विकास में नए आयाम हासिल कर सकते है।
इस अवसर को यादगार बनाते हुए अतिथियों को मेमेंन्टोस वितरित किए गए। कार्यक्रम में अधिष्ठाता गृह विज्ञान डॉ विमला डुंकवाल, अनुसंधान निदेशक डॉ पी.एस. शेखावत, निदेशक छात्र कल्याण डॉ वीर सिंह, निदेशक डॉ सुभाष चंद्र, निदेशक डॉ मधु शर्मा, निदेशक डॉ एस.एल. गोदारा, डॉ योगेश शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ मंजू राठौर द्वारा किया गया ।
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