*BAHUBHASHI*
✒️*औरों से हटकर सबसे मिलकर*
*खबरों में बीकानेर*🎤
यहां आपके प्रतिष्ठान का विज्ञापन हो सकता है। संपर्क करें - खबरों में बीकानेर
BAHUBHASHI
खबरों में बीकानेर 🎙️📀
पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚
📖
विज्ञप्ति ईमेल से हिंदी क्रुतिदेव या यूनिकोड में लैटरपैड /एम एस वर्ड फाइल में भेजें mohanthanvi@gmail.com
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें। संभावनाएं तलाशें ।
पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚
इम्युनिटी और मनी दोनों को बढ़ाता है दूध, दुधारू पशु और दुग्ध-दोहन दोनों को रखें साफ-सुथरे
विश्व दुग्ध दिवस पर किसान-संवाद कार्यक्रम का आयोजन
आज विश्व दुग्ध दिवस के उपलक्ष्य पर कृषि विज्ञान केंद्र लूणकरनसर पर एक "कृषक-वैज्ञानिक संवाद" कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसके प्रमुख अतिथि पशु विज्ञान केंद्र सूरतगढ़ के प्रभारी अधिकारी डॉ. राज कुमार बेरवाल रहे। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर. के. शिवरान ने सभी कृषकों का स्वागत किया, तथा विश्व दुग्ध दिवस के इतिहास के बारे में बताया कि वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) ने आमजन में दुग्ध उत्पादन और पोषण के विषय में जागरूकता बढ़ाने हेतु विश्व दुग्ध दिवस की स्थापना की। केंद्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. केशव मेहरा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए दुग्ध-उत्पादन के क्षेत्र में भारत की विश्वभर में अग्रणी भूमिका और दुग्ध व्यवसाय की संभावनाओं के बारे में बताया। मुख्य अतिथि डॉ. बेरवाल ने "स्वच्छ दूध उत्पादन" विषय पर विस्तृत जानकारी दी तथा बताया कि दूध की गुणवत्ता सुधार हेतु दूध का स्वच्छ दोहन करना बहुत जरूरी है, जिसके लिए उन्होंने एक अलग दुग्धशाला की ज़रूरत पर बल दिया क्योंकि दिन भर जहा पशु बंधे रहते हैं वहां मल-मूत्र जैसी गन्दगी के कारण रोगों का खतरा होता है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ दूध दोहन के लिए पशु के थनों को पीने योग्य पानी से साफ करना चाहिए, साथ ही दूध दोहन करने वाले व्यक्ति के हाथ और कपडे भी साफ़ होने। दूध निकालते समय व्यक्ति का मुंह व सिर ढका हुआ और नाखून कटे हुए होने चाहिए, साथ ही यदि व्यक्ति को सर्दी ज़ुकाम जैसे लक्षण हों तो उसे भी दूध दोहन नहीं करना चाहिए क्योंकि सर्दी-ज़ुकाम के कारण पशुओं में थनैला रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई पशु थनैला रोग से ग्रसित हो तो उसका शुरुआती दूध प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके पश्चात् डॉ. बेरवाल ने बताया कि दूध दोहन के लिए काम लेने वाला बर्तन गोल पेंदे का होना चाहिए व उसका मुंह ऊपर से कम चौड़ा होना चाहिए जिससे बाहरी संक्रमण का खतरा कम रहे। इसके अलावा डॉ.क्टर राज कुमार ने बताया कि अच्छे दूध उत्पादन के लिए पशु को संतुलित आहार देना चाहिए इसके लिए अजोला हरे चारे का एक बेहतर विकल्प है। उन्होंने संतुलित दाना मिश्रण बनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि गेंहू, जों/बाजरा, चना/मक्का, सरसों, खनिज मिश्रण और नमक मिलाकर एक संतुलित पशु आहार तैयार किया जा सकता है।
केंद्र की खाद्य एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. ऋचा पंत ने "मानव आहार में दूध की महत्ता" तथा "भारत में डेरी व्यवसाय की संभावनाएं विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी पोषक तत्वों की उचित मात्रा होने से दूध एक संपूर्ण भोजन है। यह ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिनों का भरपूर स्त्रोत है तथा दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन सर्वोच्च गुणवत्ता एवं पूर्ण प्रोटीन होता है। साथ ही, डॉ. ऋचा पंत ने कृषकों को बताया कि भारत विश्व का सर्वाधिक दुग्ध-उत्पादन करने वाला देश है, किन्तु उसके बाद भी हमें कुछ दुग्ध उत्पाद आयत करने पड़ते हैं। सके लिए उन्होंने डेरी व्यवसाय को संगठित रूप से करने पर बल दिया और दूध से बनने वाले विभिन्न उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान ही सर्वाधिक दूध-उत्पादन क्षमता वाला राज्य है, जहाँ देश का 11% उत्पादन हो रहा है। इस अवसर पर डॉ. नवल किशोर ने भी किसानों से कृषक उत्पादक संघठनों के माध्यम से दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने का आह्वाहन किया। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के मृदा वैज्ञानिक श्री भगवत सिंह खेरावत ने सभी प्रशिक्षार्थियों और विशेषज्ञों को धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया।
✍🏻
📒 CP MEDIA
यहां आपके प्रतिष्ठान का विज्ञापन हो सकता है। संपर्क करें - खबरों में बीकानेर
Khabron Me Bikaner 🎤
🙏
BAHUBHASHI
खबरों में बीकानेर पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚
यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...