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कोरोना इफेक्ट : अब से दो बच्चों पर अपनाए गए स्थाई परिवार कल्याण साधन ही होंगे वार्षिक लक्ष्य में शामिल
बीकानेर को मिला नसबंदी का लक्ष्य
बीकानेर को मिला 2 बच्चों के बाद 6,043 नसबंदी का लक्ष्य
‘‘आपदा में भी परिवार कल्याण की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’
कोरोना के साए में परिवार कल्याण का नारा बुलंद करने ‘जनसँख्या मोबिलाइजेशन पखवाड़ा’ शुरु
बीकानेर, 28 जून। परिवार कल्याण कार्यक्रम में “बच्चे 2 ही अच्छे” को मूल मंत्र मानते हुए सभी जिलों के ईएलए यानिकी वार्षिक वांछित उपलब्धि स्तर को 2 बच्चों पर आधारित कर दिया गया है। 2 से अधिक बच्चों पर भी परिवार कल्याण सेवाएं दी जाएंगी लेकिन जिले की उपलब्धि में केवल 2 बच्चों पर अपनाए गए स्थाई परिवार कल्याण साधन ही जुड़ेंगे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ओम प्रकाश चाहर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए जिले को 6,043 नसबंदी का लक्ष्य मिला है जिसे प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा सघन योग्य दंपत्ति संपर्क अभियान छेड़ा गया है। योग्य दम्पतियों से सम्पर्क कर नसबंदी, अंतरा इंजेक्शन, आईयूसीडी, छाया, ओरल पिल्स व कंडोम जैसे परिवार कल्याण साधनों की जानकारी देने के लिए पूरे देश के साथ जिलेभर में जनसँख्या मोबिलाईजेशन (दम्पति सम्पर्क पखवाडा) शुरू किया गया है। 11 जुलाई को विश्व जनसँख्या दिवस से पहले खुशहाल परिवार का पैगाम घर-घर पहुँचाया जाएगा।
डिप्टी सीएमएचओ (प.क.) डॉ योगेन्द्र तनेजा ने बताया कि कोरोना के साए में भी परिवार कल्याण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सावधानी पूर्वक आगे बढाया जाएगा और किसी को भी सीमित परिवार के लाभों से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसी सोच के साथ इस साल पखवाड़े की थीम ‘‘आपदा में भी परिवार कल्याण की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’ रखी गई है। आगामी 10 जुलाई तक चलने वाले इस पखवाड़े के दौरान जिले के कस्बे, गांव-ढाणियों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फिजिकल डिस्टेंस के साथ अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर संपर्क कर योग्य दम्पत्तियों को ये अस्थाई साधन उपलब्ध करवाए जाएंगे और स्थाई साधनों के लिए चयनित किया जाएगा। इसके बाद 11 जुलाई विश्व जनसँख्या दिवस से 24 जुलाई, 2021तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा चलाया जायेगा जिसमें परिवार कल्याण सेवाओं के लिए नियत सेवा दिवस आयोजित होंगे जिनमे महिला नसबंदी व एनएसवी पुरुष नसबंदी की गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। कोविड प्रोटोकॉल के साथ अभियान के लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयास किए जाएंगे। योग्य दम्पतियों को सीमित परिवार रखने के लाभ सहित विवाह की सही आयु, विवाह के पश्चात कम से कम दो वर्ष बाद पहला बच्चा हो, पहले व दूसरे बच्चे में कम से कम 3 साल का अंतर हो, की जानकारी दी जायेगी। साथ हीं प्रसवोत्तर परिवार कल्याण सेवाऐं, अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन, पुरूषों की परिवार नियोजन में सहभागिता, गर्भपात पश्चात परिवार कल्याण सेवाऐं और स्थाई व अस्थाई साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जायेगा।
जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने जानकारी दी कि मोबिलाइजेशन पखवाड़े के दौरान समाचार पत्रों, टीवी चैनल, सोशल मीडिया, प्रचार रथ व माइकिंग के माध्यम सीमित परिवार तथा स्थाई व अस्थाई परिवार कल्याण साधनों की महिमा योग्य दम्पत्तियों तक पहुंचाई जाएगी। कन्टेनमेंट जोन के अलावा आउटडोर प्रचार गतिविधियाँ भी की जा सकेंगी।
कोरोना इफेक्ट
डॉ. योगेन्द्र तनेजा ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर रखे कंडोम बॉक्स को प्रतिदिन नियमित रूप से विसंक्रमित किया जा रहा है। लाभार्थियों को कंडोम व ओसीपी की कम से कम 2 माह तक की आपूर्ति एक साथ दी जा रही है ताकि बार-बार ना आना पड़े। पखवाड़े की अधिकाँश मोनिटरिंग ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म व विडियो कॉल के माध्यम से होगी। फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण भी विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से होंगे।
2 बच्चे वाले 6,043 दम्पति की नसबंदी का लक्ष्य
सहायक सांख्यिकी अधिकारी नवनीत आचार्य ने जानकारी दी कि वर्ष 2021-22 के लिए नसबंदी में जिले की उपलब्धि का अपेक्षित स्तर यानिकी वार्षिक ईएलए 6,043 नसबंदी का है जो कि अधिकतम 2 बच्चों के बाद होनी चाहिए । इस वर्ष 4,532 अन्तरा एमपीए इंजेक्टेबल कॉण्ट्रासेप्टिव प्रथम डोज, 17,524 आईयूसीडी इंसर्शन, 9,064 लाभार्थियों को साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली छाया (सेंटक्रोमन), 14,201 लाभार्थियों को ओरल कॉण्ट्रासेप्टिव पिल्स व 18,129 लाभार्थियों को कंडोम की उपलब्धता करवाने का लक्ष्य तय है। पीपीआईयूसीडी में कुल प्रसव के 25 प्रतिशत को सेवा देने का लक्ष्य निर्धारित है। जहां सर्जन या स्त्री रोग विशेषज्ञ पदस्थापित है वहां प्रसवोत्तर नसबंदी में कुल प्रसव का 10 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित है।
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