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दावा : राज्य कार्मिकों की जबरन वेतन कटौती नहीं कर सकती सरकार, मामला न्यायालय के अधीन है - केसर सिंह चंपावत
अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ एकीकृत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर पुरोहित ने अवगत कराया कि हाल ही में राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के वेतन में से स्वैच्छिक कटौती करने का निर्णय लिया गया है के तहत विभिन्न कर्मचारी संगठनों से यह अनुरोध किया गया है कि अपने सदस्य कर्मचारियों से वेतन में से कटौती हेतु अनुरोध करें राज्य सरकार द्वारा पूर्व में भी इस तरह का निर्णय लिया गया था जिसके विरुद्ध अखिल राजस्थान कर्मचारी सयुक्त महासंघ एकीकृत द्वारा माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के समक्ष रीट याचिका दायर करते हुए राज्य सरकार द्वारा आदेश दिनांक 8/9/2020 को चुनौती दी गई याचिका संघ के प्रदेश अध्यक्ष केशर सिंह चम्पावत द्वारा दायर की गई संघ की तरफ से अधिवक्ता कुलदीप माथुर एवम धीरेन्द्र सिंह सोढ़ा द्वारा पैरवी करते हुए तर्क दिया की वेतन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है जिसमे बिना कर्मचारियों की सहमति की किसी प्रकार की कटौती नहीं की जा सकती ऐसे मे सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन मे प्रतिमाह वेतन कटौती का आदेश विधि विरूद्ध होने से अपास्थ किये जाने योग्य है जिस पर माननीय न्यायाधीपति दिनेश मेहता द्वारा प्रारम्भिक सुनवाई के पश्चात सरकार से जवाब तलब करते हुए नोटिस जारी किये गए एवम साथ ही इस आशय का इस्थगन आदेश प्रदान किया की आगामी आदेश तक सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन मे से की गई कटौती को आपदा कोष मे जमा नहीं करेंगी और इस कटौती को एक अलग अकाउंट मे रखा जायेगा यह रिट याचिका वर्तमान में भी माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर विचाराधीन है जिस पर अभी अंतिम निर्णय होना शेष है हाल ही में राज्य सरकार द्वारा पुनः कर्मचारी संगठनों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपने कर्मचारियों से स्वैच्छिक वेतन कटौती हेतु समर्पण पत्र नियुक्ती अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि कर्मचारियों के वेतन में से स्वैच्छिक आधार पर वेतन कटौती की जा सके सरकार का यह निर्णय विधि विरुद्ध एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व पारित निर्णय की भावना के अनुरूप नहीं है माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में अंतरिम निर्णय देते समय यह स्पष्ट कर दिया गया था कि कर्मचारियों के वेतन में से किसी तरह की कोई भी कटौती करना गैरकानूनी ही नहीं बल्कि उनके संविधानिक अधिकारों का हनन है क्योंकि कर्मचारी जो वेतन दिया जाता है वह उनकी सेवाओं के विपरीत दिया जाता है ना कि उन्हें दान के रूप में दिया जाता है वेतन किसी कर्मचारी का मूलभूत अधिकार है इसे सरकार द्वारा इस तरह कटौती के माध्यम से कांटा नहीं जा सकता।वेतन कटौती के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त महासंघ एकीकृत की आपात वर्चुअल बैठक आयोजित हुई जिसमें प्रदेश अध्यक्ष केशव सिंह चंपावत बीकानेर जिला अध्यक्ष विजय सिंह राठौड़, संगठन सचिव बजरंग कुमार सोनी, रमेश चंद्र उपाध्याय तकनीकी जिलाध्यक्ष, मनीष विधानी मंत्रालयिक प्रदेश के अध्यक्ष, सभा अध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा जसवीर बरनाला, प्रदेश अध्यक्ष पशुपालन विभाग कैलाश आचार्य आदि शामिल हुए और उन्होंने एक मत से वेतन कटौती के प्रस्ताव का विरोध करने का निर्णय लिया।
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