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कोरोना काल : यहां फसलों का उपचार भी व्हाट्सअप से हो रहा,
आनलाइन किसानों का भारत
*एस के आर ए यू: कोरोना काल मे कृषकों का सतत मार्गदर्शन -कुलपति प्रो. सिंह*
बीकानेर,29 अप्रैल। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर, कोरोना महामारी के कठिन समय मे भी किसानों को उचित जानकारी एवं मार्गदर्शन देकर उनकी सहायता करने के प्रयास कर रहा है। इस संबंध में कुलपति प्रो आर.पी. सिंह ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र के व्हाट्सएप ग्रुप पर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसान पशु पालन एवं खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं और प्रश्नों के समाधान प्राप्त कर रहे हैं।
खरीफ की फसलों की बुवाई हेतु खेतों की तैयारी की जा रही है और किसान अपने खेत की मिट्टी एवं पानी की जांच रिपोर्ट, वैज्ञानिकों को भेजकर परामर्श ले रहे हैं। साथ ही बागवानी एवं सजावटी फूलों के विषय में उद्यानिकी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन ले रहे हैं।
कोरोना काल से पहले कृषक स्वयं कृषि विज्ञान केंद्र, बीज अनुसंधान केंद्र एवं कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र से संपर्क किया करते थे लेकिन सरकार द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइंस की पालना में कृषि वैज्ञानिक व विशेषज्ञ व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कई उपयोगी सूचनाएं साझा करते हैं जैसे कि मौसम आधारित कृषि साप्ताहिक सूचना इससे किसानों को मौसम, तापमान, आंधी, बूंदाबांदी वज्रपात आदि की जानकारी मिल जाती है । इससे किसान को फसल काटने, भंडारण उचित प्रबंधन में काफी मदद मिली। किसानों द्वारा कई प्रश्न पूछे जा रहे हैं जैसे कि नई फसल के बीज कहां मिलेंगे खेती की तैयारी कैसे की जाए कौन सी बीच काम में लिया जाए मूंग, मोठ, मूंगफली की फसल से संबंधित प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इसी क्रम में कुलपति महोदय ने बताया कि मूंगफली के बीज कृषि विज्ञान केंद्र लुणकनसर तथा कृषि अनुसंधान केंद्र बीकानेर पर उपलब्ध रहेंगे और किसान यह संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं।
ज्यादातर किसानों के प्रश्न फसलों के दौर पर निर्भर करते हैं फसलों की फोटो खींचकर रोग अवस्था आदि की जानकारी साझा कर समाधान सुझाव मांगते हैं। इस बार मौसम आधारित कृषि सप्ताहिकी जो कि कृषि अनुसंधान केंद्र श्री गंगानगर से जारी की गई थी उसे किसानों को बहुत फायदा मिला। जिसमें कि आगामी दिनों में अधिकतम-न्यूनतम तापमान, बादलों की स्थिति, आद्रता, हवा की दिशा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां रहती है। कृषि सलाह के रूप में देसी कपास, सरसों, गेहूं,चना, गन्ना, जायद, मूंग जैसी फसलों की अवस्था अनुसार कृषि सलाह दी गई ।
इसके अलावा विभिन्न विषयों पर किसान उपयोगी आलेख एवं वस्तुनिष्ठ सामग्री का समावेश कर प्रति माह प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका चौखी खेती का भी ई-संस्करण किसानों को भेजा जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ किसानों के फोन कॉल पर उनके द्वारा पूछे गए विभिन्न विषयों के प्रश्नों का त्वरित रूप से उत्तर देकर मदद कर रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर समस्त कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की मोबाइल नंबर दिए गए हैं, जरूरतमंद किसान भाई सुविधानुसार इनसे संपर्क कर सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
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