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रेलवे : फ्री जमीन दे दो फिर भी हम पैसा क्यों लगाएं कर्मचारी बढोतरी की जरूरत पर चाइना का रैफरेंस एवरग्रीन सुपरहिट बीकानेर रेल बाईपास की नई कहानी
February 28, 2021
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📝 ✍️ रेलवे : फ्री जमीन दे दो फिर भी हम पैसा क्यों लगाएं
कर्मचारी बढोतरी की जरूरत पर चाइना का रैफरेंस
एवरग्रीन सुपरहिट बीकानेर रेल बाईपास की नई कहानी
बीकानेर में बाईपास बनाना रेलवे के लिये मुश्किल-आनंद प्रकाश
मंडल रेलवे का निरीक्षण करने पहुंचे महाप्रबंधक आंनद प्रकाश हुए मीडिया से रूबरू
शहर में रेलवे फाटकों की समस्या को लेकर उार पश्चिम रेलवे जोन के महाप्रबंधक आनंद प्रकाश ने रेल बाईपास के मुद्दे पर संकेत दिये हैं कि अब यहां बाईपास बनाना रेलवे के लिये मुश्किल है। शनिवार को यहां रेलवे वर्कशॉप का निरीक्षण करने के बाद मीडिया से रूबरू हुए महाप्रबंधक आनंद प्रकाश ने पत्रकारों की ओर से पूछे गये सवाल पर कहा कि राज्य सरकार नि:शुल्क भूमि उपलब् ध करवा दे, तो भी यह रेल बाइपास बननामुश्किल है । उन्होंने कहा कि रेलवे ने सर्वे करवाया है, इसमें बीकानेर से लालगढ़ के बीच यदि सीधी नई रेल लाइन डाली जाए तो 80 करोड़ रुपए की लागत आती है और यदि उदरामसर से कुछ दूरी पर रेल बाइपास बनाया जाता है तो इस पर लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत आएगी। रेलवे 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर रुपया उधार लेता है। अब देखना यह है कि रेलवे इतनी बड़ी धनराशि का व्यय क्यों करेगा। प्रेस वार्ता में महाप्रबंधक स्पष्ट शब् दों में तो कुछ नहींबोले लेकिन इशारों में यह संकेत दे दिया कि रेल बाइपास बनना मुश्किल जरूर है। महाप्रबंधक ने बताया कि पिछले दिनों राजस्थान के केबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने उनसे मुलाकात की थी। तब रेल बाइपास के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि अभी भी कुछ भी फाइनल नहीं है। रेलवे भी अपने स्तर पर सर्वे करवा रहा है। हाल ही रेलवे की निर्माण शाखा की ओर से करवाए गए सर्वे के अनुसार रेल बाइपास के प्रथम चरण पर लगभग 400 करोड़ रुपए लागत आएगी। यदि राज्य सरकार जमीन भी उपलब् ध करवा दे तो भी रेलवे के लिए इतनी बड़ी राशि खर्चकरना मुश्किल है। इससे रेलवे को कोई फायदा नही होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 तक उत्तर पश्चिम रेलवे जोन के चारों मण्डलों में विद्युतीकरण का काम पूरा हो जाएगा। पूरे जोन में तब केवल इलेक्ट्रिक इंजन से ही रेलगाडिय़़ां चलाई जाएंगी। बीकानेर मण्डल में इन दिनों सूरतगढ़ से लालगढ़ के बीच विद्युतीकरण का काम चल रहा है। रेलवे वर्कशॉप को इलेक्ट्रिक लोको शैड बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि फिलहाल तो यह फिजीबल नहीं लगता लेकिन अभी वर्कशॉप के आधुनिकीकरण करने पर जोर है। रेलवे में कर्मचारियों की कमी का सवाल उन्होंने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी अत्यधिक अतिरिक्त कर्मचारी हैं। आज मशीनीकरण का जमाना है। हम रोबोटिक मशीनीकृत कार्य की ओर अग्रसर है। चीन में हमसे बहुत कम कर्मचारी हैं और अधिकतर कार्य मशीनों से ही किया जाता है। प्रेस वार्ता में मंडल रेल प्रबंधक संजय श्रीवास्तव,वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक अनिल रैना समेत मंडल रेल मुख्यालय के अधिकारी मौजूद थे।
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