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🔊. मनरेगा में भ्रष्टाचार :: सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी पर मिलीभगत के आरोपनोखा तहसील के सुरपुरा गांव का है मामलाजागरूक लोगों ने कलेक्टर और एसीबी चौकी में दिया परिवादबीकानेर। मनरेगा में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनरेगा में जिम्मेदार लोग विभिन्न तरीके अपना कर चांदी काटने में लगे हैं। मनरेगा में महाभ्रष्टाचार का ताजा मामला नोखा तहसील के सुरपुरा गांव में सामने आया है। यहां एक मृतक को मजदूर दिखा कर भुगतान उठाया गया है। गांव के जागरूक लोगों ने कलेक्टर और एसीबी चौकी में परिवाद पेश कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।न्यूजफास्टवेब को हासिल हुए इस प्रकरण के दस्तावेज के अनुसार सुरपुरा गांव निवासी पीथाराम पुत्र धन्नाराम मेघवाल की मृत्यु 31मई, 2018 को हो गई थी। लेकिन गांव के सरपंच भंवरलाल कुम्हारव ग्राम विकास अधिकारी ने मिलीभगत कर मृतक पीथाराम का नाम मस्टरोल में लिख कर दिनांक-16-05-2020 से 31-05-2020 तक मनरेगा के तहत नई नाडी खुदाई का कार्य करना बताया है। इतना ही सरपंच भंवरलाल और ग्राम विकास अधिकारी ने इस कार्य का भुगतान भी उठा लिया है। इस प्रकार से सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर राजकीय धन का गबन किया और स्वयं को सदोष लाभ पहुंचाया है। साथ ही दोनों ने सार्वजनिक पद काा दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया है।सुरपुरा के जागरूक बाशिन्दों ने बताया कि कलेक्टर और एसीबी चौकी में इस प्रकरण के बारे में लिखित में जानकारी दी गई है, जिसमें बताया गया है कि वर्तमान में गांव में मनरेगा का कोई भी कार्य भौतिक रूप से नहीं हो रहा है लेकिन सरपंच भंवरलाल ने कागजों में मनरेगा के कार्य चला रखे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में उक्त दोनों जनों ने मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार कर रखा है।जागरूक नागरिक नेमाराम मेघवाल ने बताया कि मनरेगा में बहुत से स्थानों पर महाभ्रष्टाचार किया जा रहा है। क्षेत्र के लोग इस भ्रष्टाचार की शिकायत जिले के प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचा देते हैं लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने की वजह से भ्रष्टाचारी लोग बच निकलते हैं। गरीब श्रमिकों को राहत देने वाली इस योजना के तहत भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और साथ ही दोषियों से गबन किए गए सरकारी धन की रिकवरी भी करनी चाहिए, जिससे अन्य लोगों में भ्रष्टाचार करने से भय उत्पन्न हो सके।
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