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एसकेआरएयूः ‘एमओयू’ की प्राथमिकताएं तय, संस्था प्रमुखों से करेंगे समन्वय
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एसकेआरएयूः ‘एमओयू’ की प्राथमिकताएं तय, संस्था प्रमुखों से करेंगे समन्वय
बीकानेर, 2 सितम्बर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न उच्च स्तरीय संस्थानों के साथ हुए ‘एमओयू’ का लाभ किसानों एवं कृषि विद्यार्थियों को मिले, इसके लिए प्रत्येक संस्थान के साथ किए जा सकने वाले संभावित प्रयासों की प्राथमिकताएं तय की गई हैं। शीघ्र ही समस्त संस्थान प्रमुखों से समन्वय करते हुए इन्हें मूर्त रूप दिया जाएगा।
कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों, आइसीएआर संस्थानों आदि के समस्त संसाधनों का लाभ कृषि विद्यार्थियों एवं किसानों को मिले, इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय द्वारा पहल करते हुए गत नौ महीनों में नौ संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं। इनमें बीकानेर के तीनों राजकीय विश्वविद्यालय, उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, भारतीय सांस्कृतिक संबंध केन्द्र, स्किल यूनिवर्सिटी जयपुर, सीसीएस-नियाम आदि प्रमुख हैं। इन संस्थानों से समन्वय एवं विभिन्न गतिविधियों के समयबद्ध संचालन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है । इसमें अनुसंधान निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत, गृह विज्ञान महाविद्यालय अधिष्ठाता डाॅ. विमला डुकवाल तथा विशेषाधिकारी इंजी. विपिन लढ्ढा शामिल हैं।
प्रो. सिंह ने बताया कि कमेटी द्वारा बुधवार को बैठक करते हुए प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं। इसके अनुसार राजुवास की प्रयोगशाला, डेयरी एवं पशुपालन तकनीक, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के सांख्यिकी, गणित, अंग्रेजी एवं कम्प्यूटर विभाग, तकनीकी विश्वविद्यालय की कम्प्यूटर विज्ञान, सिविल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग सेवाओं का उपयोग कृषि विद्यार्थियों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। वहीं केन्द्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय द्वारा तैयार मूल्य सवंर्धित उत्पाद रखे जाने का प्रस्ताव लिया गया।
कुलपति ने बताया कि स्किल यूनिवर्सिटी जयपुर के माध्यम से कृषि विद्यार्थियों को विभिन्न प्रशिक्षण एवं वोकेशनल कोर्स करवाने, सीसीएस-नियाम के माध्यम से कृषि विपणन की संभावनाओं की दिशा में कार्य करना प्रस्तावित किया गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के साथ हुए एमओयू की बदौलत म्यामार के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय आबंटित किया गया है। समस्त एमओयू का प्रत्यक्ष लाभ मिले तथा विद्यार्थियों को अधिक से अधिक अवसर मिले, विश्वविद्यालय द्वारा इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
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