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कोरोना काल में विश्वविद्यालय के नवाचारों से लाभांवित हुए किसान एवं विद्यार्थी
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🙏 मोहन थानवी 🙏
सच्चाई पढ़ें । सकारात्मक रहें । संभावनाएं तलाशें ।
कोरोना काल में विश्वविद्यालय के नवाचारों से लाभांवित हुए किसान एवं विद्यार्थी
बीकानेर। कोविड-19 संक्रमण की प्रतिकूल परिस्थितियों में बीकानेर का स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, सरकार की भावनाओं के अनुरूप कृषि और कृषक कल्याण की सोच के साथ सतत् प्रयासरत है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के नेतृत्व में पिछले साढे़ चार महीनों में ऐसे नवाचार हुए हैं, जिनसे किसानों एवं कृषि विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। विश्वविद्यालय के इन..........
प्रयासों को हर स्तर पर सराहा गया, जिससे किसानों के मन में विश्वविद्यालय के प्रति विश्वास और प्रगाढ हुआ है।
लाॅकडाउन एवं कोरोना काल में खेती कार्य प्रभावित नहीं हो तथा किसानों को निर्बाध रूप से तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहे, इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय द्वारा ‘कुलपति-कृषक ई-संवाद’ प्रारम्भ किया गया। इसके तहत कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रभार वाले छह जिलों के किसानों से आॅनलाइन संवाद स्थापित किया। किसानों की व्यावहारिक समस्याओं के बारे में जाना एवं इनके समाधान के प्रयास हुए। लाॅकडाउन के दौरान, जब किसानों से प्रत्यक्ष संपर्क संभव नहीं था, ऐसे दौर में यह द्विपक्षीय आॅनलाइन संवाद प्रभावी सिद्ध हुआ। इस दौरान कुलपति द्वारा सभी कृषि वैज्ञानिकों को हिदायत दी गई कि खेती के दौरान किसानों को आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध रहें।
व्हाट्सएप्प ग्रुप्स से हुआ तकनीकी जानकारियों का आदान-प्रदान
विश्वविद्यालय के अधीन कार्यरत सातों कृषि विज्ञान केन्द्रों ने दर्जनों व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाए और इनके माध्यम से तकनीकी ज्ञान किसानों तक पहुंचाने की परम्परा प्रारम्भ हुई। खेतों में काम करता किसान, अपनी व्यावहारिक समस्या को इस ग्रुप के माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों तक पहुंचाता और पलक झपकते ही उसे, इससे संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन मिल जाता। इसके अलावा किसानों द्वारा प्रतिमाह किए जाने योग्य कृषि कार्यों की जानकारी, मौसम संबंधी पूर्वानुमान, उन्नत किस्मों के बीजों, फसलों पर लगने वाले कीट एवं रोगों की जानकारी के साथ इनके निदान संबंधी मार्गदर्शन भी इन ग्रुप्स के माध्यम से पहुंचाया जाने लगा। इसी प्रकार........... 👇
लाॅकडाउन एवं कोरोना काल में खेती कार्य प्रभावित नहीं हो तथा किसानों को निर्बाध रूप से तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहे, इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय द्वारा ‘कुलपति-कृषक ई-संवाद’ प्रारम्भ किया गया। इसके तहत कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रभार वाले छह जिलों के किसानों से आॅनलाइन संवाद स्थापित किया। किसानों की व्यावहारिक समस्याओं के बारे में जाना एवं इनके समाधान के प्रयास हुए। लाॅकडाउन के दौरान, जब किसानों से प्रत्यक्ष संपर्क संभव नहीं था, ऐसे दौर में यह द्विपक्षीय आॅनलाइन संवाद प्रभावी सिद्ध हुआ। इस दौरान कुलपति द्वारा सभी कृषि वैज्ञानिकों को हिदायत दी गई कि खेती के दौरान किसानों को आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध रहें।
व्हाट्सएप्प ग्रुप्स से हुआ तकनीकी जानकारियों का आदान-प्रदान
विश्वविद्यालय के अधीन कार्यरत सातों कृषि विज्ञान केन्द्रों ने दर्जनों व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाए और इनके माध्यम से तकनीकी ज्ञान किसानों तक पहुंचाने की परम्परा प्रारम्भ हुई। खेतों में काम करता किसान, अपनी व्यावहारिक समस्या को इस ग्रुप के माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों तक पहुंचाता और पलक झपकते ही उसे, इससे संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन मिल जाता। इसके अलावा किसानों द्वारा प्रतिमाह किए जाने योग्य कृषि कार्यों की जानकारी, मौसम संबंधी पूर्वानुमान, उन्नत किस्मों के बीजों, फसलों पर लगने वाले कीट एवं रोगों की जानकारी के साथ इनके निदान संबंधी मार्गदर्शन भी इन ग्रुप्स के माध्यम से पहुंचाया जाने लगा। इसी प्रकार........... 👇
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ई-लर्निंग व्यवस्था ने विद्यार्थियों में रखी निरंतरता
कृषि विद्यार्थी, विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी है। कोरोना काल के दौरान इन्हें शिक्षा संबंधी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इसे देखते हुए विश्वविद्यालय के समस्त महाविद्यालयों द्वारा ई-लर्निंग की व्यवस्था की गई। कक्षावार व्हाट्सएप्प गुप बनाए गए तथा इन माध्यमों से पाठ्यक्रम के अनुरूप पी.पी.टी. विद्यार्थियों को भेजी जाने लगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित कक्षाएं संचालित की गई। कुलपति की पहल पर ‘कुलपति-कृषि विद्यार्थी ई-संवाद’ हुआ। इसके माध्यम से कुलपति ने कृषि विद्यार्थियों से चर्चा की और वर्तमान परिस्थितियों में विद्यार्थियों की आवश्यकता को जाना। इस व्यवस्था ने कोरोना काल के दौरान भी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखी।
चौदह वेबिनार हुए आयोजित
किसानों तथा कृषि विद्यार्थियों से ई-संपर्क स्थापित रखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा अब तक कृषि एवं इससे जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के 14 वेबिनार आयोजित हो चुके हैं। इन वेबिनार में देश के ख्यातनाम कृषि विशेषज्ञों के व्याख्यान हुए हैं, जिनका लाभ लगभग 40 हजार किसानों, कृषि विद्यार्थियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने उठाया है। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा आॅनलाइन माध्यम से किसानों को उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन से संबंधित प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं।
कुलपति के नेतृत्व में कोरोना काल में ई-प्रकाशन की परम्परा भी प्रारम्भ की गई। कृषि महाविद्यालय, बीकानेर द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘मरु कृषक’, विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘चोखी खेती’ तथा विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित ‘कृषि मार्गदर्शिका 2020-21’ के ई-संस्करण किसानों के लिए तैयार एवं प्रकाशित करवाए। इन सभी पत्रिकाओं को व्हाट्सएप्प के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया गया। साथ ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी इनके लिंक उपलब्ध करवाए गए। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘कृषि मार्गदर्शिका 2020-21’ के ई-संस्करण का विमोचन राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालय द्वारा 25 जून को आयोजित नेशनल वेबिनार के दौरान किया।
गोद लिए गांव में चलाई जागरुकता गतिविधियां
विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत गोद लिए गए गुसाईसर गांव में कोरोना काल के दौरान जागरुकता के अनेक कार्यक्रम करवाए जा चुके हैं। किसानों को कृषि कार्यों के दौरान सरकार की एडवाइजरी की पालना करने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं गृह विज्ञान महाविद्यालय एवं निजी संस्थाओं के सहयोग से पंद्रह सौ मास्क-ग्लब्ज एवं सैनेटाजर का वितरण ग्रामीणों एवं मनरेगा श्रमिकों को किया गया। आयुर्वेद विभाग के माध्यम से काढा और होम्योपैथ विभाग के माध्यम से इम्यूनिटी बूस्टर डोज वितरित की गई। विश्वविद्यालय द्वारा पूरे गांव में सेनेटाजेशन एवं फोगिंग करवाई जा चुकी हैं। इनके अलावा कोविड-19 जागरुकता की गतिविधियां सतत रूप से संचालित हो रही हैं।
इस प्रकार विश्वविद्यालय का प्रयास है कि कोरोना काल में कृषि कार्य एवं षिक्षण बाधित नहीं हो। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं कृषि विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान मिलता रहे। विश्वविद्यालय परिवार का प्रत्येक सदस्य भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य कर रहा है। निकट भविष्य में इसके सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे।
-हरि शंकर आचार्य
सहायक निदेशक (जनसंपर्क)
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर
ई-लर्निंग व्यवस्था ने विद्यार्थियों में रखी निरंतरता
कृषि विद्यार्थी, विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी है। कोरोना काल के दौरान इन्हें शिक्षा संबंधी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इसे देखते हुए विश्वविद्यालय के समस्त महाविद्यालयों द्वारा ई-लर्निंग की व्यवस्था की गई। कक्षावार व्हाट्सएप्प गुप बनाए गए तथा इन माध्यमों से पाठ्यक्रम के अनुरूप पी.पी.टी. विद्यार्थियों को भेजी जाने लगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित कक्षाएं संचालित की गई। कुलपति की पहल पर ‘कुलपति-कृषि विद्यार्थी ई-संवाद’ हुआ। इसके माध्यम से कुलपति ने कृषि विद्यार्थियों से चर्चा की और वर्तमान परिस्थितियों में विद्यार्थियों की आवश्यकता को जाना। इस व्यवस्था ने कोरोना काल के दौरान भी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखी।
चौदह वेबिनार हुए आयोजित
किसानों तथा कृषि विद्यार्थियों से ई-संपर्क स्थापित रखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा अब तक कृषि एवं इससे जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के 14 वेबिनार आयोजित हो चुके हैं। इन वेबिनार में देश के ख्यातनाम कृषि विशेषज्ञों के व्याख्यान हुए हैं, जिनका लाभ लगभग 40 हजार किसानों, कृषि विद्यार्थियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने उठाया है। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा आॅनलाइन माध्यम से किसानों को उत्पादों के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन से संबंधित प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं।
कुलपति के नेतृत्व में कोरोना काल में ई-प्रकाशन की परम्परा भी प्रारम्भ की गई। कृषि महाविद्यालय, बीकानेर द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘मरु कृषक’, विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘चोखी खेती’ तथा विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित ‘कृषि मार्गदर्शिका 2020-21’ के ई-संस्करण किसानों के लिए तैयार एवं प्रकाशित करवाए। इन सभी पत्रिकाओं को व्हाट्सएप्प के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया गया। साथ ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी इनके लिंक उपलब्ध करवाए गए। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘कृषि मार्गदर्शिका 2020-21’ के ई-संस्करण का विमोचन राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालय द्वारा 25 जून को आयोजित नेशनल वेबिनार के दौरान किया।
गोद लिए गांव में चलाई जागरुकता गतिविधियां
विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत गोद लिए गए गुसाईसर गांव में कोरोना काल के दौरान जागरुकता के अनेक कार्यक्रम करवाए जा चुके हैं। किसानों को कृषि कार्यों के दौरान सरकार की एडवाइजरी की पालना करने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं गृह विज्ञान महाविद्यालय एवं निजी संस्थाओं के सहयोग से पंद्रह सौ मास्क-ग्लब्ज एवं सैनेटाजर का वितरण ग्रामीणों एवं मनरेगा श्रमिकों को किया गया। आयुर्वेद विभाग के माध्यम से काढा और होम्योपैथ विभाग के माध्यम से इम्यूनिटी बूस्टर डोज वितरित की गई। विश्वविद्यालय द्वारा पूरे गांव में सेनेटाजेशन एवं फोगिंग करवाई जा चुकी हैं। इनके अलावा कोविड-19 जागरुकता की गतिविधियां सतत रूप से संचालित हो रही हैं।
इस प्रकार विश्वविद्यालय का प्रयास है कि कोरोना काल में कृषि कार्य एवं षिक्षण बाधित नहीं हो। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं कृषि विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान मिलता रहे। विश्वविद्यालय परिवार का प्रत्येक सदस्य भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य कर रहा है। निकट भविष्य में इसके सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे।
-हरि शंकर आचार्य
सहायक निदेशक (जनसंपर्क)
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर
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