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जल जीवन का ही नहीं बल्कि अस्तित्व का भी एक आयाम है - जोशी, निर्जला एकादशी पर जल और जीवन विषय पर ऑनलाईन परिचर्चा
June 03, 2020
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जल जीवन का ही नहीं बल्कि अस्तित्व का भी एक आयाम है - जोशी
निर्जला एकादशी पर जल और जीवन विषय पर ऑनलाईन परिचर्चा
कोरोना महामारी के समय में फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए निर्जला एकादशी के शुभ अवसर पर आज बीकानेर में एक विशेष ऑनलाईन परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में जल अध्येता ब्रजरतन जोशी के साथ संस्कृतिकर्मी नितिन गोयल ने सार्थक चर्चा की। एक घंटे की इस परिचर्चा में विशेष बात यह रही कि ब्रजरतन जोशी ने 20 मिनट का संवाद करते हुए शेष चालीस मिनट देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोधार्थियों, जलकर्मियों के प्रश्नो के उत्तर दिए। इस ऑनलाईन परिचर्चा को गूगल मीट एवं यूट्यूब पर लाइव करने का सम्पूर्ण तकनीकि कार्य श्री मदन मेघवाल द्वारा बखूबी संभाला गया। नितिन गोयल ने ऑनलाईन परिचर्चा का परिचालन करते हुए जल और जीवन के रिश्ते से लेकर राज-समाज की भूमिका और जल सूँघो, टावरी के बारे में बात करते हुए पारम्परिक प्रज्ञा से जुडे़ मुद्दो को उठाया। ब्रजरतन जोशी ने कहा कि जल जीवन का ही नहीं बल्कि अस्तित्व का भी एक आयाम है। हमें अपनी दृष्टि, सोच, व्यवहार के साथ अपनी विवेकशीलता को पारम्परिक प्रज्ञा की ताकत से भरना होगा तथा स्थूल और सतही उपायों को दर किनार करते हुए कथनी और करनी में एक्य प्रदर्षित करना होगा। शिक्षकों की भूमिका पर उठे एक सवाल के जवाब में श्री जोशी ने कहा कि इसमें शिक्षकों की भूमिका प्रभावी एवं निर्णायक है। बशर्ते स्वयं शिक्षक की अपनी जल दृष्टि, सोच-व्यवहार के बारे में स्पष्ट हो। ऑनलाईन परिचर्चा में राष्ट्र के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े प्राध्यापकों, अन्वेषकों और शोधार्थियों ने गहरी रूचि दिखाई। प्रमुख संस्थानों में जेएनयू, दिल्ली, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश, पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी, गुजरात, सूत्रधार साहित्यिक मंच, हैदराबाद, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय उदयपुर, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद अरबी फारसी रिसर्च इंस्टीट्यूट, टोंक, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के अलावा राष्ट्र प्रतिष्ठित जल शोधार्थी साहबजादा सोलत अली खान, अम्बिका ढाका, प्रियदर्शी ओझा, रीतेष व्यास, श्याम नारायण रंगा, राजेन्द्र कुमार, शिवराज भारतीय, हमीर सिंह, महेन्द्र तॅंवर, मो. फारूक चौहान, कोमल बंसल, सुरेन्द्र राजपुरोहित, दीपक, मोहित के अलावा बिट्ठल बिस्सा सहित विभिन्न क्षेत्रो की गणमान्य हस्तियॉं न केवल मौजूद रही बल्कि संवाद में सक्रिय भूमिका निभाई। परिचर्चा के सफल संचालन हेतु सभी सह भागीयों का श्री नितिन गोयल द्वारा आभार प्रकट किया गया एवं भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आशा जताई।
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