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26 फरवरी 2020
जैसलमेरी रम्मत कला के जनक महान स्वतंत्रता सेनानी भारत के प्रसिद्ध ख्यातनाम कवि तेज़ की पुण्यतिथि पर स्मरण सभा
आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य,-मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य -कामिनी भोजक
बीकानेर26 फरवरी-बीकानेर जोधपुर जैसलमेर राजघराने के अति प्रिय व्यक्तित्व और महान स्वतंत्रता सेनानी कवि तेज़ की पुण्यतिथि पर आज कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा सेवगो के चौक स्थित पंचायत भवन में स्मरण सभा आयोजित की गयी|
स्मरण सभा में कवि तेज़ के व्यक्तित्व को बताते हुए निदेशक कामिनी भोजक ने कहा कि कवि तेज़ के ललाट का ही इतना प्रभाव था कि देखने से ऐसा प्रतीत होता कि जैसे साक्षात भगवान सूर्य नारायण के दर्शन हो रहे हो और उनके नेत्रमें झलकता प्रेम अपरिचित व्यक्तियों में भी पूज्य भाव और प्रेम भाव सहज उत्पन्न कर देता उनके कविता पाठ में इतना माधुर्य और सम्मोहन था कि हर कोई व्यक्ति जो उनकी कविता एक बार सुन लेता तो साँप जैसे बीन पर मोहित हो जाता है सब कुछ भूलकर वैसेहीहर इंसान उनका कायल हो जाता|कामिनी भोजक ने जीवनी पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसलमेर के महारावल जवाहरसिंह जी आपका बड़ा सम्मान करते थे स्वांगिया देवी की स्तुति आइनाथ अड़तालिशि महारावल को बहुत प्रभावित कर गयी|इतना ही नही जैसलमेर में तो आपको नगर शिरोमणि की उपाधि भी प्राप्त थी अन्य जातियों धर्मो, और संप्रदायों में आपको सम्मान दिया जाता था ब्राह्मण समाज की प्रमुख जाती पुष्करणा समाज मे आपकी बड़ी ख्याति थी 1923 में पुष्टिकर समाज के प्रतिनिधि के तौर पर जब आपका जयपुर जाना हुआतब गद्य पद्य युक्त रचनाओं से आपने वहां सबको सबको मंत्र मुग्धकर दिया आपको वहा स्वर्ण प्रदान किया गया| भोजक ने उनकी रचना काशी, मथुरा,प्रयागवड, गजनी अरु भटनेर| दुगमदेरावर, लोद्रवा नोवा जैसलमेर|| सुनाते हुए ओजस्व को कुछ यूं बयां किया कि "आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य,-मानव होना भाग्य है कवि होना सौभाग्य"
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी श्रीलाल सेवग ने कहा की कवि तेज़ का साहित्य दर्शन सम्पूर्ण भारत वर्ष में संस्कारों की बानगी व्यक्त करता है नुक्कड़ नाटक, रम्मत और लोक गीतों के माध्यम से कवि तेज़ने समकालीन विषयो पर जो गहरे आघात किये उनसे विद्रोही सत्तासीनों को बहुत नुकसान पहुंचाया| आज भी कवि तेज़ की रचनाये समाज मे व्याप्त कुरीतियों पर सटीक बैठती है
सचिव आर.के.शर्मा ने कहा कि जैसलमेर नगर में उस वक़्त निवास करने वाले शाकद्वीपीय ब्राह्मणों में कुंठा और अंधविश्वास ज्यादा था और कवि तेज़ उसको मिटाने के लिए प्रायसरत रहे सिर्फ शाकद्वीपीय जी नही वरन सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज और दूसरे समाजो मेभी वे समाज सुधार हेतु कार्य करते रहे यही कारण था कि एक समय मे कुछ लोग उनसे ईर्ष्या रखने लगे लेकिन जैसलमेर और समस्त राजपुताना में उनकी लोकप्रियता और प्रतिस्ठा के चलते वे कुछ कर नही पाते खतरग्क्ष के यति वृद्धिचंद जी और उनके शिष्य लक्ष्मीचंद जी महाराज का उन पर अगाध प्रेम था
प्रवक्ता नितिन वत्सस ने कवि के चित्र पर पुष्पांजलि करते हुए कहा कि कवि तेज़ की काव्य शक्ति विलक्षण थी सत्यभाषी, स्पष्टवक्ता, के साथ साथ उनके विचार समाज को जाग्रत करने का कार्य करते इतना ही नही बीकानेर में हुए एक वृहद यज्ञ मे राजपरिवार ने बतौर मुख्य आचार्य के रूप में निमंत्रित किया
वरिष्ठ समाजसेवी सूर्यप्रकाश शर्मा ने उनके कालजायी रचना वंदेमातरम
गणराज शारद सद्गुरु चरणार वंदेमातरम|
जगदीश्वरो विश्वम्भरो सही नाम वंदेमातरम||
उत्पति पालन प्रलय करने हार वंदेमातरम
सब जीव योनि मात्र का आधार वंदेमातरम|
वसुधा विशाली हिन्द की रच निज कला करतार ने|
पगुधार संकट टार ले अवतार वंदेमातरम||
सुनाते हुए शब्दाजंलि अर्पित की
इस अवसर पर पुरषोत्तम सेवग, दुर्गादत्त भोजक, प्रहलाद दास सेवग,गोपाल कृष्ण भोजक प्यारेलाल ने शब्दाजंलि अर्पित करते हुए कवि तेज़ का स्मरण किया
इस अवसर पर जितेंद्र भोजक, अरविंद शर्मा, निशा, असीम कौशिक सहित गणमान्य जन मौजूद थे
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