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‘बाल श्रम एवं बाल तस्करी’ पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बीकानेर द्वारा 01.12.2019 को बीकानेर जिले में ‘बाल श्रम एवम् बाल तस्करी‘ पर एक संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मदनलाल भाटी (जिला एंव सेशन न्यायाधीश), बीकानेर के निर्देशन में जिला परिषद् के सभागार में किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बीकानेर के अध्यक्ष श्री मदनलाल भाटी, जिला एवम् सेशन न्यायाधीश, बीकानेर ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ‘बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं व उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएं योजना-2015’ की जानकारी देते हुए तथा योजना के महत्वपूर्ण उद्देश्यों से अवगत कराते हुए बताया कि बच्चे विश्व जनसंख्या के लगभग एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते है। बालश्रम में लिप्त हो जाने के कारण वे साक्षर नहीं हो पाते है जिससे उचित अवसर ना मिल पाने के कारण वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने से वंचित रह जाते है। भाटी ने बताया कि युवा पीढी के प्रति यह हमारा दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे के लिए विधिक सेवा सहित सभी अवसर खोले जाए ताकि उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास हो तथा उनकी क्षमता का शारीरिक, मानसिक, नैतिक व आध्यात्मिक विकास हो सके। साथ ही जिला न्यायाधीश भाटी ने बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित ‘निर्भया’ हेल्पलाईन की जानकारी भी प्रदान की।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण,(राजस्थान उच्च न्यायालय), जयपुर की उपसचिव प्रथम तोषिता मालानी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि बालश्रम एवं बाल तस्करी से संबंधित कार्यशालाओं का आयोजन समय समय पर प्रत्येक संभाग पर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार किया जाता है। मालानी ने बताया कि उक्त कार्यशालाओं के मुख्य उद्देश्य बाल श्रम को पूरी तरह से निरूद्ध करना है ताकि जिस उम्र में बालकों को शिक्षा मिलनी चाहिए उस उम्र में वे श्रम ना करके, शिक्षित बने ताकि आगामी भविष्य में वे राष्ट्रनिर्माता के रूप में अपने कर्त्तव्यों का भली-भांति निर्वहन कर सकें।
जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम ना होने के कारण बच्चे परिवार की आजीविका चलाने हेतु बालश्रम करने को अग्रसर हो जाते है। गौतम ने कहा कि शिक्षा से बालश्रम को खत्म किया जा सकता है। यह आमजन का दायित्व है कि बालश्रम को रोकने हेतु अपनी महती भूमिका निभाएं।
इसके अतिरिक्त राहुल चौधरी, प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड, बीकानेर ने कार्याशाला को संबोधित करते हुए बच्चों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों की जानकारी देते हुए बालश्रम (प्रति निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उक्त अधिनियम विशिष्ट कार्यों में बालकों के नियोजन के निषेध तथा अन्य विशिष्ट नियोजनों में बालकों की कार्य-दशा को उत्कृष्ट बनाने हेतु प्रवृत्त हुआ है। यह अधिनियम बाल रोजगार अर्थात जिसने अपनी 14 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है के नियोजन पर प्रतिबंध लगाने हेतु आशयित है।
कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश पवन कुमार अग्रवाल ने बाल श्रम एवं बाल तस्करी को रोकने हेतु प्राधिकरण द्वारा किये जा रहे व्यापक प्रयासों से अवगत कराते हुए उपस्थित प्रतिभागीगण से बाल श्रम को समूल नष्ट करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमति किरण, यूनीसेफ टीम के रिसोर्स पर्सन आदि ने भी बाल श्रम एवं बाल तस्करी पर अपने अपने विचार व्यक्त किए।
अंत में सचिव व अपर जिला न्यायाधीश, पवन कुमार अग्रवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित बीकानेर संभाग के न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक अधिकारीगण, पुलिस विभाग के अधिकारीगण न्छप्ब्म्थ् के सदस्य,बाल कल्याण समिति, छळव् कार्यकर्ता, जिला न्यायालय व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त स्टाफ को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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