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खबरों में बीकानेर 🎤 🌐
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नासिक के विद्यार्थियों ने जानी कृषि यंत्र परीक्षण प्रक्रिया
बीकानेर, 5 दिसम्बर। काॅलेज आॅफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी, नासिक के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण के तहत गुरुवार को बीछवाल स्थित कृषि यंत्र एवं मशीनरी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र का अवलोकन किया।
केन्द्र प्रभारी इंजी. विपिन लढ्ढा ने केन्द्र की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में 31 एवं राज्य में दो केन्द्र स्थापित किए गए हैं। इन केन्द्रों द्वारा निर्धारित व्यवस्था के तहत कृषि यंत्रों का परीक्षण होता है। इसके बाद ही किसानों को यह यंत्र सब्सिडी पर मिलते हैं। उन्होंने परीक्षण की त्रिस्तरीय व्यवस्था के बारे में बताया। भ्रमण प्रभारी प्रो. अमित शिंदे ने बताया कि काॅलेज का 65 विद्यार्थियों का दल 2 से 10 दिसम्बर तक शैक्षिण भ्रमण पर है। इस दौरान जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर तथा उदयपुर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में संस्थानों का भ्रमण किया जाएगा।
विंटर स्कूल की शुरूआत शुक्रवार से
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इक्कीस दिवसीय विंटर स्कूल (शीतकालीन प्रशिक्षण) की शुरूआत शुक्रवार को होगी। प्रशिक्षण प्रभारी प्रो. वाई. सुदर्शन ने बताया कि ‘डिजिटल न्यूट्रीगेशन फाॅर रिसोर्स कंजर्वेशन इन एरिड इकोसिस्टम’ विषयक विंटर स्कूल में राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कृषि वैज्ञानिक भाग लेंगे। प्रशिक्षण 26 दिसम्बर तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञों के व्याख्यान, प्रायोगिक कार्य तथा फील्ड विजिट का आयोजन होगा।
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मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
बीकानेर, 5 दिसम्बर। मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर गुरुवार को कृषि अनुसंधान केन्द्र द्वारा पंाचू पंचायत समिति के ढिंगसरी गांव में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मृदा फसल अनुक्रिया सहसंबंध परियोजना के तहत आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्र के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. पी. एस शेखावत ने की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को अपनी खेत की मृदा का परीक्षण तथा आवश्यकता के अनुसार इसका उपचार करवाना चाहिए। स्वस्थ मृदा से उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों को पर्याप्त लाभ मिल पाता है। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने संबंधी प्रक्रिया के बारे में बताया। साथ ही कम पानी वाली फसलें लेने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि के रूप में सरपंच देवी सिंह राजवी मौजूद रहे। उन्होंने खेती के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के बारे में बताया तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। परियोजना प्रभारी डाॅ. एस. आर. यादव ने मृदा परीक्षण की आवश्यकताओं के बारे में बताया। इस दौरान डाॅ. एस. आर. नकवी, पादप रोग विशेषज्ञ डाॅ. बीडीएस नाथावत, तकनीकी सहायक डाॅ. बीएस मीणा ने विचार रखे।
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कृषि आदान विक्रेताओं का डेसी पाठ्यक्रम वर्ष 2017-18 का प्रमाण पत्र वितरण समारोह
एक वर्षीय पाठ्यक्रम मैनेज हैदराबाद एवं कृषि विभाग राजस्थान द्वारा प्रायोजित आदान विक्रेताओं का डिप्लोमा ;क्।म्ैप्द्ध पाठ्यक्रम के प्रथम बैच का प्रमाण पत्र वितरण समारोह स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति, प्रोफेसर रक्षपाल सिंह जी के मुख्य आतिथ्य में कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर पर दिनांक 05.12.2019 को सम्पन्न हुआ। कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर द्वारा वर्ष 2017-18 के एक वर्षीय पाठ्यक्रम में 40 अभ्यर्थियों को सफलतापूर्वक डिप्लोमा उत्तीर्ण करने पर प्रमाण पत्र वितरित किये गये।
इस प्रमाण पत्र वितरण समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, माननीय कुलपति, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, विशिष्ठ अतिथि श्रीमान् जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), आर.यू.आई.डी.पी., श्रीगंगानगर, श्री आनन्द स्वरूप जी छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, कृषि विभाग, श्रीगंगानगर थे।
क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान व नोडल आॅफिसर (डेसी) डाॅ. यू.एस. शेखावत ने अपने स्वागत उदबोधन में माननीय कुलपति, प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, श्रीमान् जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), श्रीगंगानगर, श्री आनन्द स्वरूप जी छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, श्रीगंगानगर एवं सदन में उपस्थित सभी आगंतुको एवं अभ्यर्थियों का स्वागत व अभिनन्दन किया एवं वर्षभर के डेसी पाठ्यक्रम की गतिविधियाँ बताते हुये अवगत करवाया कि एक अभ्यर्थी श्री रविन्द्र कुमार ने डिस्टिंक्शन तथा 32 प्रथम श्रेणी व 7 अभ्यर्थियों ने पास श्रेणी में उत्तीर्ण हुये है।
मुख्य अतिथि उद्बोधन में प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, माननीय कुलपति, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजना है, जो कृषि आदान विक्रेताओं को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ पैरा एक्टेंशन वर्कर के रूप में कार्य करने की ओर एक कदम है। यह योजना 2003 में शुरू की गई जो शुरूआत में आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल राज्यों ने प्रारम्भ किया। किसानो के लिये डीलर्स एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से किसान सीधा डीलर्स से कृषि आदानों की गुणवत्ता एंव मात्रा की जानकारी प्राप्त करता है। ऐसे में इनपुट डीलर्स का कृषि विषय में डिप्लोमा प्राप्त करना किसानों के लिये लाभदायक होगा।
उन्होंने समारोह में जानकारी साझा की, कि इस विश्वविद्यालय में उनका 100 दिन का कार्यकाल अभी-अभी पूर्ण हुआ है। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्य किये है, जिनमें विशेष रूप से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये केन्द्रीय लाइब्रेरी का समय बढ़ाकर रात्रि 9ः00 बजे तक करना, विश्वविद्यालय के म्यूजियम को मूर्त रूप देना, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जिसमें राजस्थान के महामहिम राज्यपाल श्री कलराज जी मिश्र का भाग लेना, विश्वविद्यालय में स्वच्छता अभियान तथा विश्वविद्यालय का एक्रिडेशन करवाना आदि महत्वपूर्ण कार्य रहे है। उन्होंने इस डेसी पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करवानें के लिये नोडल आॅफिसर व क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डाॅ. उम्मेद सिंह शेखावत तथा फेसिलिटेटर श्री मदनलाल जी जोशी को बधाई व शुभकामनाएं दी। पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण समस्त अभ्यर्थियों को भी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि श्री जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), श्रीगंगानगर ने अपने उद्बोधन में भारतीय कृषि को विज्ञान से जोड़ते हुये विशेष रूप से जैविक खेती व पर्यावरण संरक्षण के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित किया, उन्होंने सभी आदान विक्रेताओं से आग्रह किया कि जिस ज्ञान को आपने इस डिप्लोमा के माध्यम से प्राप्त किया है, उसे किसान तक पहुँचाने का प्रयास करें। श्री ए.एस. छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, श्रीगंगानगर ने इस प्रमाण पत्र वितरण समारोह में माननीय कुलपति के पधारने पर आभार प्रकट किया व आदान विक्रेताओं को शुभकामनाएं देते हुये यह सन्देश दिया कि इस डेसी पाठ्यक्रम से कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आयेगा तथा किसानों को नई तकनीकियों की जानकारी सीधे प्राप्त होगी, उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुये कहा कि कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करने की सलाह दी।
श्री गुगनराम जी मटोरिया, उपनिदेशक कृषि विस्तार, श्रीगंगानगर द्वारा समारोह मे बताया कि आदान विक्रेताओं किसानों के लिये सीधा आदान उपलब्ध करवाने के साथ-साथ तकनीकी जानकारी देने का भी माध्यम है अतः डीलर्स बन्धु किसानों को पेस्टीसाइड का विधिसम्मत प्रयोग करने की सलाह दे।
अतिथियों द्वारा अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण किया गया एवं डिस्टिंक्शन प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी श्री रविन्द्र कुमार को सम्मान प्रतीक भी दिया गया। आदान विक्रेताओं मे से प्रशिक्षण प्राप्त श्री संदीप भुंवाल एवं श्री रविन्द्र कुमार अपने विचार व्यक्त करते हुये बताया कि प्रशिक्षण के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है एवं किसान के लिये तकनीकी जानकारी देने में प्रशिक्षण सहायक सिद्ध हुआ है। समारोह में कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर की वेबसाइट का विमोचन किया गया जिसमें डेसी का विवरण शामिल है। इसके साथ-साथ ”कृषि अनुसंधान केन्द्र एक परिचय” नामक फोल्डर का भी विमोचन किया गया।
इस समारोह में डेसी पाठ्यक्रम के सफल संचालन एवं सहयोग करने हेतु डाॅ. एस.क.े बैरवा, सहायक आचार्य एवं श्री मदनलाल जोशी, फेसिलिटेटर को सम्मान प्रतीक देकर सम्मानित किया गया। डाॅ. विजय प्रकाश, आचार्य द्वारा समारोह में पधारे सभी कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं स्टाॅफ, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारीगण, राजस्थान राज्य बीज निगम, उद्यान विभाग तथा इस पाठ्यक्रम में जुड़े वर्तमान व सेवानिवृत्त वैज्ञानिक व अधिकारी का भी आभार प्रकट किया। मंच संचालन श्री मदनलाल जोशी, फेसिलिटेटर व डाॅ.(श्रीमती) सीमा चावला, सहायक आचार्य ने किया।
एक वर्षीय पाठ्यक्रम मैनेज हैदराबाद एवं कृषि विभाग राजस्थान द्वारा प्रायोजित आदान विक्रेताओं का डिप्लोमा ;क्।म्ैप्द्ध पाठ्यक्रम के प्रथम बैच का प्रमाण पत्र वितरण समारोह स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति, प्रोफेसर रक्षपाल सिंह जी के मुख्य आतिथ्य में कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर पर दिनांक 05.12.2019 को सम्पन्न हुआ। कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर द्वारा वर्ष 2017-18 के एक वर्षीय पाठ्यक्रम में 40 अभ्यर्थियों को सफलतापूर्वक डिप्लोमा उत्तीर्ण करने पर प्रमाण पत्र वितरित किये गये।
इस प्रमाण पत्र वितरण समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, माननीय कुलपति, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, विशिष्ठ अतिथि श्रीमान् जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), आर.यू.आई.डी.पी., श्रीगंगानगर, श्री आनन्द स्वरूप जी छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, कृषि विभाग, श्रीगंगानगर थे।
क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान व नोडल आॅफिसर (डेसी) डाॅ. यू.एस. शेखावत ने अपने स्वागत उदबोधन में माननीय कुलपति, प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, श्रीमान् जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), श्रीगंगानगर, श्री आनन्द स्वरूप जी छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, श्रीगंगानगर एवं सदन में उपस्थित सभी आगंतुको एवं अभ्यर्थियों का स्वागत व अभिनन्दन किया एवं वर्षभर के डेसी पाठ्यक्रम की गतिविधियाँ बताते हुये अवगत करवाया कि एक अभ्यर्थी श्री रविन्द्र कुमार ने डिस्टिंक्शन तथा 32 प्रथम श्रेणी व 7 अभ्यर्थियों ने पास श्रेणी में उत्तीर्ण हुये है।
मुख्य अतिथि उद्बोधन में प्रोफेसर रक्षपाल सिंह, माननीय कुलपति, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजना है, जो कृषि आदान विक्रेताओं को तकनीकी जानकारी के साथ-साथ पैरा एक्टेंशन वर्कर के रूप में कार्य करने की ओर एक कदम है। यह योजना 2003 में शुरू की गई जो शुरूआत में आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल राज्यों ने प्रारम्भ किया। किसानो के लिये डीलर्स एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके माध्यम से किसान सीधा डीलर्स से कृषि आदानों की गुणवत्ता एंव मात्रा की जानकारी प्राप्त करता है। ऐसे में इनपुट डीलर्स का कृषि विषय में डिप्लोमा प्राप्त करना किसानों के लिये लाभदायक होगा।
उन्होंने समारोह में जानकारी साझा की, कि इस विश्वविद्यालय में उनका 100 दिन का कार्यकाल अभी-अभी पूर्ण हुआ है। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्य किये है, जिनमें विशेष रूप से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये केन्द्रीय लाइब्रेरी का समय बढ़ाकर रात्रि 9ः00 बजे तक करना, विश्वविद्यालय के म्यूजियम को मूर्त रूप देना, अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जिसमें राजस्थान के महामहिम राज्यपाल श्री कलराज जी मिश्र का भाग लेना, विश्वविद्यालय में स्वच्छता अभियान तथा विश्वविद्यालय का एक्रिडेशन करवाना आदि महत्वपूर्ण कार्य रहे है। उन्होंने इस डेसी पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करवानें के लिये नोडल आॅफिसर व क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डाॅ. उम्मेद सिंह शेखावत तथा फेसिलिटेटर श्री मदनलाल जी जोशी को बधाई व शुभकामनाएं दी। पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण समस्त अभ्यर्थियों को भी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि श्री जसवंत जी खत्री, अधीक्षण अभियंता (सार्वजनिक निर्माण विभाग), श्रीगंगानगर ने अपने उद्बोधन में भारतीय कृषि को विज्ञान से जोड़ते हुये विशेष रूप से जैविक खेती व पर्यावरण संरक्षण के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित किया, उन्होंने सभी आदान विक्रेताओं से आग्रह किया कि जिस ज्ञान को आपने इस डिप्लोमा के माध्यम से प्राप्त किया है, उसे किसान तक पहुँचाने का प्रयास करें। श्री ए.एस. छींपा, संयुक्त निदेशक कृषि, श्रीगंगानगर ने इस प्रमाण पत्र वितरण समारोह में माननीय कुलपति के पधारने पर आभार प्रकट किया व आदान विक्रेताओं को शुभकामनाएं देते हुये यह सन्देश दिया कि इस डेसी पाठ्यक्रम से कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आयेगा तथा किसानों को नई तकनीकियों की जानकारी सीधे प्राप्त होगी, उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुये कहा कि कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करने की सलाह दी।
श्री गुगनराम जी मटोरिया, उपनिदेशक कृषि विस्तार, श्रीगंगानगर द्वारा समारोह मे बताया कि आदान विक्रेताओं किसानों के लिये सीधा आदान उपलब्ध करवाने के साथ-साथ तकनीकी जानकारी देने का भी माध्यम है अतः डीलर्स बन्धु किसानों को पेस्टीसाइड का विधिसम्मत प्रयोग करने की सलाह दे।
अतिथियों द्वारा अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण किया गया एवं डिस्टिंक्शन प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी श्री रविन्द्र कुमार को सम्मान प्रतीक भी दिया गया। आदान विक्रेताओं मे से प्रशिक्षण प्राप्त श्री संदीप भुंवाल एवं श्री रविन्द्र कुमार अपने विचार व्यक्त करते हुये बताया कि प्रशिक्षण के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है एवं किसान के लिये तकनीकी जानकारी देने में प्रशिक्षण सहायक सिद्ध हुआ है। समारोह में कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर की वेबसाइट का विमोचन किया गया जिसमें डेसी का विवरण शामिल है। इसके साथ-साथ ”कृषि अनुसंधान केन्द्र एक परिचय” नामक फोल्डर का भी विमोचन किया गया।
इस समारोह में डेसी पाठ्यक्रम के सफल संचालन एवं सहयोग करने हेतु डाॅ. एस.क.े बैरवा, सहायक आचार्य एवं श्री मदनलाल जोशी, फेसिलिटेटर को सम्मान प्रतीक देकर सम्मानित किया गया। डाॅ. विजय प्रकाश, आचार्य द्वारा समारोह में पधारे सभी कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक एवं स्टाॅफ, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारीगण, राजस्थान राज्य बीज निगम, उद्यान विभाग तथा इस पाठ्यक्रम में जुड़े वर्तमान व सेवानिवृत्त वैज्ञानिक व अधिकारी का भी आभार प्रकट किया। मंच संचालन श्री मदनलाल जोशी, फेसिलिटेटर व डाॅ.(श्रीमती) सीमा चावला, सहायक आचार्य ने किया।
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓



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