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युवाओं में पढ़ने की आदत में कमी चिंतनीय, उपराष्ट्रपति भी चिंतित
उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने आज पुस्तक पढ़ने की आदत में कमी पर चिंता व्यक्त की, खासकर युवाओं में और किशोरवस्था से पढ़ने की आदत को विकसित करने के लिए शिक्षण संस्थानों और शैक्षणिक समुदायों से आह्वान किया।
अखिल असम पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स एसोसिएशन (एएपीबीए) द्वारा गुवाहाटी में आयोजित 21 वें पूर्वोत्तर पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को एक काम के बजाय एक आनंद की गतिविधि के रूप में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंटरनेट के आगमन के साथ बच्चे पुस्तकों पर भरोसा करने के बजाय सूचनाओं के लिए ऑनलाइन खोज करना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा “किताबें पढ़ना, खासकर कहानियां, अब आदर्श नहीं है। बच्चे ऑनलाइन वीडियो देखना पसंद करते हैं।”
माता-पिता से अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल बनने का आग्रह किया और खुद किताबें पढ़ें ताकि बच्चे उनका अनुसरण करें। उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि स्कूलों को पठन शिविरों और कार्यशालाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि किताबों को पढ़ना समय के जरिये यात्रा करना और उत्कृष्ट लोगों के साथ बातचीत करने जैसा है। “इन वार्तालापों से आपको जो ज्ञान प्राप्त होता है वह अद्वितीय है।”
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किताबों में उन लोगों की कहानियां जिन्होंने मुश्किलों से लड़कर सफलता हासिल की है, वह हमें प्रेरित और प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा “पुस्तकों में हमारी रचनात्मकता और नवीन एवं मौलिक विचारों को प्रोत्साहित करने की शक्ति हैं।”
देश के विभिन्न हिस्सों में पुस्तकालय आंदोलन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुस्तकालय आंदोलन की विरासत को जीवित रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि समाज को पुस्तकों से लाभान्वित होने के लिए, हर गांव में एक पुस्तकालय की आवश्यकता है।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में नियमित अंतराल के बाद पुस्तक मेले भी आयोजित किए जाने चाहिए। साथ ही सामग्री के संदर्भ में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है।
धारा 370 को निरस्त करने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला था और इस मामले पर दुष्प्रचार अभियान से लड़ने के लिए आह्वान किया। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और विभाजनकारी ताकतों से दूर रहने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने 31 अक्टूबर 2019 को पूर्व उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें भारत को एकता के सूत्र में पिरोने वाला नायक बताया।
इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रकाशकों, लेखकों, कवियों और छात्रों सहित गणमान्य व्यक्ति असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी, असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंदा सोनोवाल और असम के शिक्षा मंत्री श्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य शामिल थे। बांग्लादेश के स्टॉल सहित 217 बुकस्टॉल है, यह मेला 12 दिन तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
अखिल असम पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स एसोसिएशन (एएपीबीए) द्वारा गुवाहाटी में आयोजित 21 वें पूर्वोत्तर पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को एक काम के बजाय एक आनंद की गतिविधि के रूप में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इंटरनेट के आगमन के साथ बच्चे पुस्तकों पर भरोसा करने के बजाय सूचनाओं के लिए ऑनलाइन खोज करना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा “किताबें पढ़ना, खासकर कहानियां, अब आदर्श नहीं है। बच्चे ऑनलाइन वीडियो देखना पसंद करते हैं।”
माता-पिता से अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल बनने का आग्रह किया और खुद किताबें पढ़ें ताकि बच्चे उनका अनुसरण करें। उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि स्कूलों को पठन शिविरों और कार्यशालाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।
श्री नायडू ने कहा कि किताबों को पढ़ना समय के जरिये यात्रा करना और उत्कृष्ट लोगों के साथ बातचीत करने जैसा है। “इन वार्तालापों से आपको जो ज्ञान प्राप्त होता है वह अद्वितीय है।”
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किताबों में उन लोगों की कहानियां जिन्होंने मुश्किलों से लड़कर सफलता हासिल की है, वह हमें प्रेरित और प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा “पुस्तकों में हमारी रचनात्मकता और नवीन एवं मौलिक विचारों को प्रोत्साहित करने की शक्ति हैं।”
देश के विभिन्न हिस्सों में पुस्तकालय आंदोलन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुस्तकालय आंदोलन की विरासत को जीवित रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि समाज को पुस्तकों से लाभान्वित होने के लिए, हर गांव में एक पुस्तकालय की आवश्यकता है।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में नियमित अंतराल के बाद पुस्तक मेले भी आयोजित किए जाने चाहिए। साथ ही सामग्री के संदर्भ में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है।
धारा 370 को निरस्त करने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला था और इस मामले पर दुष्प्रचार अभियान से लड़ने के लिए आह्वान किया। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और विभाजनकारी ताकतों से दूर रहने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने 31 अक्टूबर 2019 को पूर्व उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें भारत को एकता के सूत्र में पिरोने वाला नायक बताया।
इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रकाशकों, लेखकों, कवियों और छात्रों सहित गणमान्य व्यक्ति असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी, असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंदा सोनोवाल और असम के शिक्षा मंत्री श्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य शामिल थे। बांग्लादेश के स्टॉल सहित 217 बुकस्टॉल है, यह मेला 12 दिन तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
📒 📰 📑 पढ़ना और पढ़ाना जीवन सफल बनाना 📚 📖 📓



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