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गणेश चतुर्थी : चतुर्ग्रही योग, शुभ संयोग में गणेश प्रतिमा की स्थापना करने से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति
बीकानेर। गणेश चतुर्थी पर 2 सितम्बर 2019 को चतुर्ग्रही योग और शुभ संयोग का समागम हो रहा है। ऐसा दीर्घावधि पश्चात हुआ है कि जहां ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति से शुक्ल और रवियोग बना, वहीं सिंह राशि में चतुर्ग्रही योग भी विद्यमान हुआ है। इसमें सिंह राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र उपस्थित हो रहे हैं। इन ग्रहों के इस शुभाशुभ योग से गणेश चतुर्थी की महत्ता कई गुना बढ़ गई है।
ग्रह-नक्षत्रों के ऐसे शुभ संयोग मुहूर्त में श्रीगणेश जी की स्थापना करने वाले जातकों को...... 👇👇👇👇
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.... अपार सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति हो रही है। दस दिवसीय गणेशोत्सव को हम लोग भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्थी से मनाते हैं। विदित ही है कि भगवान गणेश का जन्म इस तिथि को हुआ था। और इस बार गणेश चतुर्थी का महत्व बढ़ गया है। बता दें कि सोमवार 2 सितम्बर का दिन हस्त नक्षत्र से आरंभ हो रहा है और गणेश प्रतिमाओं की स्थापना चित्रा नक्षत्र में की जानी है। चित्रा नक्षत्र मंगल का है जिसमें चंद्रमा उपस्थित होने पर शुभ फल की प्राप्ति तय मानी गई है। चित्रा नक्षत्र और चतुर्थी तिथि का संयोग 2 सितंबर को सुबह लगभग 8 बजे से शुरू होकर पूरे दिन रहने वाला है। यूं तो अभिजित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना का शुभ मुहूर्त मान्य है।
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा दोपहर में इसलिए की जाती है। ऐसी मान्यता भी है कि भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। ज्योतिष विज्ञान अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह लगभग 11.55 बजे से दोपहर 12.40 बजे तक है। साथ ही 2 सितम्बर को दिनभर ही शुभ संयोग है अतः किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना कर सुख-समृद्धि की प्राप्ति की कामना की जा सकते हैं।




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