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आहार को संयम के साथ करना चाहिए: मुनिश्री
खाद्य दिवस के रूप मंे मनाया प्रथम दिन
गंगाशहर। पर्युषण पर्व के प्रथम दिन को खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। तेरापंथ भवन में उपस्थित हजारों श्रावकों को मुनिश्री सुमति कुमार जी ने कहा कि जो स्वाद के लिए खाता है वह अज्ञानता है। उन्होंने कहा कि जो जीने के लिए आहार करता है वो स्वास्थ्य है तथा जो संयम से आहार करता है वह साधना है। उन्होंने कहा कि शरीर को चलाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को भोजन करना होता है लेकिन यह ज्ञान होना जरूरी है कि भोजन कब, कैसे, क्या व कहां करें। ज्यादा भोजन से लोगों को बीमारियां हो जाती है अतः संयम से भोजन करना चाहिए। मुनिश्री ने नौ द्रव्यों से ज्यादा खाने के लिए आज त्याग भी करवाये।
आदित्य मुनि ने आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया तथा देवार्य मुनि ने जयाचार्य एवं आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन से जुड़ी समानताओं के बारे में विस्तार से बताया। तेरापंथ महिला मंडल ने गीतिका प्रस्तुत की तथा तेयुप मंत्री देवेन्द्र डागा ने सूचनाएं दी। तेरापंथ भवन में आठ दिनों के लिए अखण्ड नवकार मंत्र का जप प्रारम्भ हो गया है जिसमें श्रावक समाज बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहा है। महिलाएं शान्ति निकेतन में अखण्ड जप कर रही है। रात्रिकालीन कार्यक्रम व दोपहर का व्याख्यान साध्वीवृन्द केे सान्निध्य में शान्ति निकेतन में हो रहे हैं।
नैतिकता का शक्तिपीठ पर सांयकालीन प्रतिक्रमण शासनश्री मुनिश्री मणिलालजी स्वामी के सान्निध्य में प्रारम्भ हुआ है। पयुर्षण पर्व प्रारम्भ दिवस पर सैकड़ों लोगों ने आज उपवास रखा तथा सामायिक करते रहे।



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