प्रेम जनमेजय को ‘साहित्यश्री’, लालित्य ललित को नंदलाल महर्षि हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार, जोधपुर की बसंती पंवार को मिलेगा पं. मुखराम सिखवाल राजस्थानी सृजन पुरस्कार
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राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ के वार्षिक राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा
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प्रेम जनमेजय को ‘साहित्यश्री’, लालित्य ललित को नंदलाल महर्षि हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार, जोधपुर की बसंती पंवार को मिलेगा पं. मुखराम सिखवाल राजस्थानी सृजन पुरस्कार
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श्रीडूंगरगढ । 2 अगस्त 2019 ।
राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ द्वारा हिन्दी व राजस्थानी साहित्य सृजन के लिए दिए जाने वाले वर्ष 2019 के राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है । इस बार संस्था का सर्वोच्च सम्मान मल्लाराम माली स्मृति‘साहित्यश्री’ लब्धप्रतिष्ठ व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय को उनके समग्र साहित्यिक अवदान के लिए अर्पित किया जाएगा। प्रतिष्ठित नंदलाल महर्षि हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार दिल्ली के प्रतिष्ठित साहित्यकार लालित्य ललित को दिया जाएगा । राजस्थानी भाषा-साहित्य के मौलिक लेखन को सम्मान प्रदान करने के दृष्टिगत प्रति वर्ष दिया जाने वाला ‘पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार ’ जोधपुर की प्रसिद्ध उपन्यासकार, कथाकार बसंती पंवार को घोषित किया गया है। ‘पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार ’ बसंती पंवार को उनकी कथा कृति ‘नूंवो सूरज’ के लिए और नंदलाल महर्षि हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार व्यंग्यकार लालित्य ललित को चर्चित काव्य पुस्तक ‘हम कितने पास, कितने दूर’ के लिए दिया जाएगा । ये पुरस्कार 14 सितम्बर, 2019को संस्था के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोज्य समारोह में प्रदान किए जायेंगे ।
सभी सम्मानित साहित्यकारों को पुरस्कार स्वरूप ग्यारह हजार रूपये नगद राशि के साथ सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल अर्पित किए जायेंगे ।
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प्रेम जनमेजय -
राजधानी में गंवार , बेशर्मेव जयते , पुलिस ! पुलिस ! , मैं नहीं माखन खायो, आत्मा महाठगिनी , मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएं , शर्म मुझको मगर क्योें आती ! डूबते सूरज का इश्क, कौन कुटिल खल कामी,मेरी इक्यावन श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएं, ज्यों ज्यों बूड़े श्याम रंग, कोई मैं झूठ बोलया, लीला चालू आहे!, भ्रष्टाचार के सैनिक जैसे चर्चित व्यंग्य संग्रहों व ‘प्रेम जनमेजय के दो व्यंग्य नाटक’ और मेरे हिस्से के नरेंद्र कोहली, इर्दम् गिर्दम अहं स्मरामि जैसी लोकप्रिय संस्मरणात्मक कृतियां । लब्धप्रतिष्ठ ‘व्यंग्य यात्रा’ का संपादन । शरद जोशी राष्ट्रीय सम्मान मध्यप्रदेश सरकार, पं0 श्रीनारायण चतुर्वेदी सम्मान उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान , हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार, दुष्यंत कुमार अलंकरण , हिंदी अकादमी साहित्यकार सम्मान दिल्ली सरकार, हिन्दी निधि तथा भारतीय विद्या संस्थान, त्रिनिडाड एवं टुबैगो आदि अनेक पुरस्कारों से समादृत ।
लालित्य ललित -
जिदंगी तेरेे नाम डार्लिग, विलायती राम पांडेय, बहेतरीन व्यंग्य: लालित्य ललित , पांडेय जी और जिदंगीनामा, डिजिटल इंडिया के व्यग्ंय, पांडेय जी और फुरसत क े लड्डू, पांडेय जी की दुनिया, पांडेय जी और दिल्लगी जैसी चर्चित व्यंग्य कृतियों के अलावा चुप्पी में उद्घोष, कभी सोचता हँू कि, इतना होने के बाद भी, चुप हैं शब्द और उनकेे अर्थ, सितम प्यार के जैसे लोकप्रिय 33 काव्य संग्रहों के रचयिता। कई अन्तराष्ट्रीय साहित्यिक समारोहों में शिरकत। अनेक पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित।
बसंती पंवार
सौगन, अैड़ौ क्यूॅं , (राजस्थानी उपन्यास), हिन्दी कविता संग्रह कब आया बसंत, नन्हे अहसास । राजस्थानी कहानी संग्रह नुंवौ सूरज , कविता संग्रह-जोवूं अेक विस्वास, व्यंग्य संग्रह नाक का सवाल, सहित दो बाल साहित्य की पुस्तकें । राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर से सांवर दैया पेली पोथी पुरस्कार, पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी चैन्नई और तमिलनाडु बहुभाषी लेखिका संघ चैन्नई की तरफ से साहित्यसेवी सम्मान सहित अनेक पुरस्कार व सम्मान ।











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