सच्चाई पढ़ें ।सकारात्मक रहें ।संभावनाएं तलाशें ।
🙏
जम्मू डायरी - ✍️ एडवोकेट अशोक भाटी : हमनें जमाने मे ऎसे मुक़ाम देखे है, खता लम्हों ने कि और सज़ा सदियो ने पाई है
🙏
जम्मू डायरी - ✍️ एडवोकेट अशोक भाटी : हमनें जमाने मे ऎसे मुक़ाम देखे है, खता लम्हों ने कि और सज़ा सदियो ने पाई है
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 / twitter, Podcast, YouTube, साहित्य-सभागार के साथ-साथ Facebook, Pinterest, LinkedIn और Instagram पर भी आपकी खबरें Khabron Me Bikaner 🎤
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️ 00000000000000
00000000000000
00000000000000
00000000000000
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 ✍️ 00000000000000
00000000000000
जम्मू डायरी - ✍️ एडवोकेट अशोक भाटी : हमनें जमाने मे ऎसे मुक़ाम देखे है, खता लम्हों ने कि और सज़ा सदियो ने पाई है ....
आज बात हो रही है नेहरू की कश्मीर परस्त सत्ता लोलुप नीति की नींव पर खडे राज्य जम्मू - कश्मीर के हालात की जो आपके सामने है ।
पहले अनुच्छेद 370 और फिर संसद के किसी भी सदन की बिना अनुमति के सीधे महामहिम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद के सीधे आदेश से 14 मई 1954 को J & K राज्य की विधानसभा को 35A का अधिकार देकर भारतीय संविधान की मूल भावना के साथ खिलवाड़ किया गया ।
प्रश्न आता है की j & K में लागू 35A में ऐसा क्या अलग है जो देश के अन्य राज्यो में नही है..?
अनुच्छेद 35 A जम्मू कश्मीर विधानसभा को अपने राज्य में स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करने की स्वायत्तता प्रदान करती है अर्थात 14 मई1954 में जम्मू कश्मीर के नागरिक अथवा विगत 10 वर्षों से j & K राज्य में निवास करने वाले लोग ही नागरिकता के पात्र है इससे 1947 में हिंदुस्तान पाकिस्तान मुल्क विभाजन के दौरान भारत आये बहुसंख्यक हिन्दू शरणार्थियों ( जिनमे बहुसंख्यक वाल्मिकी / डोगरा इत्यादि.) की चौथी पीढ़ी आज भी जम्मूकश्मीर राज्य की नागरिकता नही मिली है
राज्य की नागरिकता के आभाव में उनको जम्मू कश्मीर राज्य की राजकीय सेवा के पात्र नही है, जम्मू कश्मीर राज्य के शेक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश से वंचित रहते है ।
35A ना केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 19 21 की मूल भावना के विरोध में भी है बल्कि धरातल पर महिला विरोधी भी है क्योंकि 35A के प्रावधानों के अनुसार यदि जम्मू- कश्मीर राज्य की मूल निवासी महिला राज्य के बाहर के किसी नागरिक से विवाह करती है तो विवाहित महिला का मूल निवासी प्रमाण-पत्र ख़ारिज हो जायेगा और वो स्वतः ही सम्पति अधिकार / मतदान अधिकारी से वंचित हो जायेगी ।
इन सब से भी इतिश्री नही बल्कि गैर J & K भारतीय नागरिकों को जम्मू किश्मीर राज्य के विधानसभा, नगरीय निकाय , पंचायत राज चुनाव में मतदान का अधिकार भी नही है । अनुच्छेद को 35 A ना कहकर राष्ट्रविरोधी A to Z प्रावधान बोले तो अनुचित नही।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी से विनम्र आग्रह है की स्वयम्भू चाचा नेहरू की गलती को सुधारें, आज आपके पास सड़क पर जनमत भी है और सदन में बहुमत भी .....
आपका _ एडवोकेट अशोक भाटी
00000000000000
00000000000000





यहां व्यक्त कीजिए - खबर आपकी नजर में...