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“भूख लगे तो माँ का दूध, प्यास लगे तो माँ का दूध”
शुरू हुआ विश्व स्तनपान सप्ताह
बीकानेर। स्तनपान के महत्व को प्रतिपादित करने और प्रत्येक बच्चे को उसके जन्मसिद्ध अधिकार के रूप में माँ का दूध दिलाने के उद्देश्य से विश्व स्तनपान सप्ताह विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के साथ शुरू हुआ। जिला स्तर से लेकर खण्ड व ग्राम स्तर तक अस्पतालों, विद्यालयों व प्रशिक्षण केन्द्रों में माँ के दूध का गुणगान किया गया। सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि एनएफएचएस 4 के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में मात्र 28.4 प्रतिशत बच्चों को ही जन्म के पहले घंटे में स्तनपान नसीब होता है और मात्र 58.2 प्रतिशत बच्चों को ही 6 माह एक्सक्लूजिव स्तनपान मिलता है। इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य है हर बच्चे को उसका हक यानिकी माँ का दूध मिले, समय पर मिले और माँ के शरीर को भी इससे होने वाले ढेर सारे फायदों की जानकारी रहे। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा विशेष रूप से “माँ” यानिकी “मदर्स एब्सोल्यूट अफेक्शन” कार्यक्रम शुरू किया गया है।
एस.डी.एम. जिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में आयोजित कार्यक्रम में अधीक्षक बी.एल. हटीला और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र तनेजा ने उपस्थित प्रसूताओं, परिजनों व नर्सिंग विद्यार्थियों को स्तनपान के फायदे बताए और पोषण सम्बन्धी फोल्डर वितरित किए। आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य ने बालिकाओं, गर्भवतियों व प्रसूताओं के लिए पौष्टिक व सम्पूर्ण आहार चार्ट पर चर्चा की। प्रसूताओं को पोषण सामग्री भी वितरित की गई। नर्सिंग अधीक्षक अमरजीत कौर व स्टाफ नर्सेज द्वारा विशेष रूप से संचालित अमृत कक्ष में प्रसूताओं को स्तनपान की सही तकनीक का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
पोस्टर मेकिंग व नारा लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित
राजकीय एएनएम प्रशिक्षण केंद्र नोखा में नर्सिंग स्टूडेंट्स के बीच पोस्टर मेकिंग व नारा लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की गई जिसमे छात्राओं ने स्तनपान को विकल्प के स्थान पर संकल्प के रूप में प्रदर्शित किया। “भूख लगे तो माँ का दूध, प्यास लगे तो माँ का दूध” जैसे नारों से स्पष्ट किया कि पहले 6 माह बच्चे को सिर्फ और सिर्फ माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए, पानी भी नहीं। जिले के शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों व आंगनवाड़ी केन्द्रों पर एमसीएचएन सत्रों के साथ प्रसूताओं को स्तनपान की सही तकनीक व फायदे बताए गए।
स्तनपान है अमृतपान
डॉ. योगेन्द्र तनेजा ने शिशु के लिए स्तनपान के लाभ समझाते हुए बताया कि
ऽ मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते है।
ऽ मां का दूध पचने में त्वरित और आसान होता है।
ऽ माँ का दूध बच्चे को निमोनिया, कुपोषण व दस्त से बचाता है।
ऽ यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षित करता है।
ऽ यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है।
ऽ यह किफायती और संक्रमण मुक्त होता है।
ऽ स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक बंधन को बढ़ाता है।
मां को भी है बड़े फायदे
ऽ यह स्तन व डिम्बग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है।
ऽ यह प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है।
ऽ यह मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त करने में सहायता करता हैं। स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा सामान्यतः कम पाया जाता है।
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