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साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाल में फंस गया किसान*... *बिहारीलाल बिश्नोई
सच्चाई पढ़ें ।सकारात्मक रहें ।संभावनाएं तलाशें ।
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साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाल में फंस गया किसान*... *बिहारीलाल बिश्नोई
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साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाल में फंस गया किसान... - बिहारीलाल बिश्नोई
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*साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाळ में फंस गया किसान*... *बिहारीलाल बिश्नोई*
राज्य विधानसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने कहा कि भारत सरकार ने किसानों को सेठ-साहूकारों के मकड़जाल से बाहर निकालने की सोच के साथ किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की थी, लेकिन यह व्यवस्था सरकार की लगातार अनदेखी और बैंकों की खुली मनमानी के कारण अब तो अपने मूल उद्देश्य से ही भटक गई लगती है ।
सदन में धरतीपुत्रों की पीड़ा रखते हुए उन्होंने कहा कि केसीसी के प्रावधान के बाद फर्क इतना भर आया है कि अब किसान साहूकारों के चंगुल से छूटकर बैंकों के दुष्चक्र में फंस कर रह गया है । उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना के माध्यम से बीमा कंपनियों और बैंकों द्वारा किसानों के साथ की जा रही बड़ी लूट व धोखाधड़ी की ओर इशारा करते हुए सरकार से आग्रह किया कि किसानों के हित में यह बहुत जरूरी है कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन में पूरा एक दिन निर्धारित हो ।
विश्नोई ने कहा कि किसानों के लिए चाहे किसान क्रेडिट कार्ड योजना हो, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो या कोई और कार्यक्रम, जिसे भी बैंकों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाए तो इसकी मोनिटरिंग की पुख्ता-व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यह पता रहे कि सरकार की मंशा के अनुकूल अन्नदाता को लाभ पहुंचा या नहीं..? अभी हाल ही में हमारे बीकानेर के भाजपा नेता सुरेंद्रसिंह शेखावत ने किसानों को खराबे के बावजूद बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम नहीं दिए जाने की जानकारी देते हुए पीएमओ को चिट्ठी लिखी तो हलचल हुई और बीमा कंपनियों ने किसानों को 21 दिनों में क्लेम के भुगतान की बात कही है ।
*निगरानी-तंत्र की मांग*
बिश्नोई ने सदन को बताया कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि लाखों करोड़ रुपयों की निगरानी के लिए कोई नियामक तंत्र ही नहीं है । सरकार के द्वारा इतनी बड़ी योजनाओं को बैंकों औऱ बीमा कंपनियों के भरोसे छोड़ देने से अर्थ के इन निरंकुश और बेलगाम व्यवसायियों ने किसानों को ठगने के अनेकों रास्ते तलाश लिए हैं । उन्होंने कहा कि अब ज्यादा देर नहीं हो और कृषकों के हितार्थ सरकारों द्वारा चलाई जा रही हर योजना की सतत निगहबानी के लिए जिला या संभाग स्तर पर निगरानी-तंत्र की जल्द से जल्द स्थापना हो, जो किसानों की शिकायतों और वेदनाओं को सुनें और तय समय-सीमा के भीतर उन्हें राहत प्रदान करें ।
*बजट में मुख्यमंत्री की कथनी ओर करनी में बहुत बड़ा फर्क*
आज सदन में बोलते हुए बिश्नोई ने सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर होने की बात कहते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री जी ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमनें जनता पर कोई नया कर प्रस्तावित नहीं किया है और पहले से लगे करों में प्रदेश की जनता को 300 करोड़ से अधिक राशि की राहत प्रदान की है, लेकिन बजट सत्र के दौरान ही सदन से बाहर पेट्रोल और डीजल की दरों में भारी वृद्धि करके उसी जनता की जेब से हजारों करोड़ रुपए निकाल लिए । विधायक बिश्नोई ने पानी, बिजली, शिक्षा, ग्रामीण विकास, चिकित्सा, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना इत्यादि में किए गए बजट प्रावधानों पर सिलसिलेवार बात रखते हुए कहा कि सरकार का ऐसा कोई महकमा नहीं है, जिनके वित्तीय-प्रावधानों में कटौती नहीं की गई हो ।
*ट्रांसपोर्टर के करो को कम करने की मांग*
उन्होंने सरकार द्वारा बसों की परमिट-राशि में की गई बढ़ोतरी को वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस वृद्धि से यात्री बसों के मालिक गाड़ियों को रोड़ पर चला ही नहीं पाएंगे । इधर सदन में बिश्नोई इस मसले पर अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत करा रहे थे और उधर सरकार ने यात्री-बसों के परमिट-शुल्क में की गई बढ़ोतरी वापस भी ले ली ।
इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के चुनाव पूर्व के वादों को याद दिलाया और कहा कि आपकी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी भत्ता व संविदाई कार्मिकों के स्थायीकरण जैसी लोक-लुभावन घोषणाओं के बल पर सत्ता हासिल की है, किंतु जैसे ही आप शासन में आए अपनी घोषणाओं को भुला बैठे हैं, यह किसानों, बेरोजगारों और संविदा-कर्मियों के साथ आपके द्वारा किया गया बहुत बड़ा छलावा है ।
आज सदन में दमदार तरीके से अपनी बात रखते हुए बिहारीलाल ने बजट सत्र में मुख्यमंत्री गहलोत के द्वारा पढ़े गए
"यकीन से आगे भी बढ़ना है,
बहुत कुछ करके ऊंचाइयो पर चढ़ना है ,
वो हवाओ की ओट में दीपक जलाते है,
हम तो तुफानो से टकराकर कारवां चलाते है ।"
एक शेर का जवाब कुछ इस तरह दिया...
गहलोत साहब थे चुनाव में कारवां की आस में
उधर दो कारवां खड़े थे एक साथ पास पास में
किसानों का था एक कारवां और दूसरे संविदाई थे
उत्पीड़न शोषण के मारे सब मां-जाये से भाई थे
मौका ताड़ चुके थे, सो जादू की छड़ी घुमाई
ये लो पूरी कर्जामाफी और तुम समझो स्थाई
रात बीते बात बीते अब सदन में डींगें हांक रहे हैं
लेकिन जिन वोटों से जीते वे अब धूल फांक रहे हैं ।
इस तरह जबाव देखे कहा कि आपने तो करवा लूटने का काम किया, चाहे किसानों का हो, बेरोजगारो का हो, संविदाकर्मियों का हो ।
खबरों में बीकानेर 🎤 🌐 खबर :- ✍️
🙏साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाल में फंस गया किसान... - बिहारीलाल बिश्नोई
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*साहूकार से छूटा तो बैंकों के जाळ में फंस गया किसान*... *बिहारीलाल बिश्नोई*
राज्य विधानसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने कहा कि भारत सरकार ने किसानों को सेठ-साहूकारों के मकड़जाल से बाहर निकालने की सोच के साथ किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की थी, लेकिन यह व्यवस्था सरकार की लगातार अनदेखी और बैंकों की खुली मनमानी के कारण अब तो अपने मूल उद्देश्य से ही भटक गई लगती है ।
सदन में धरतीपुत्रों की पीड़ा रखते हुए उन्होंने कहा कि केसीसी के प्रावधान के बाद फर्क इतना भर आया है कि अब किसान साहूकारों के चंगुल से छूटकर बैंकों के दुष्चक्र में फंस कर रह गया है । उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना के माध्यम से बीमा कंपनियों और बैंकों द्वारा किसानों के साथ की जा रही बड़ी लूट व धोखाधड़ी की ओर इशारा करते हुए सरकार से आग्रह किया कि किसानों के हित में यह बहुत जरूरी है कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन में पूरा एक दिन निर्धारित हो ।
विश्नोई ने कहा कि किसानों के लिए चाहे किसान क्रेडिट कार्ड योजना हो, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो या कोई और कार्यक्रम, जिसे भी बैंकों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाए तो इसकी मोनिटरिंग की पुख्ता-व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यह पता रहे कि सरकार की मंशा के अनुकूल अन्नदाता को लाभ पहुंचा या नहीं..? अभी हाल ही में हमारे बीकानेर के भाजपा नेता सुरेंद्रसिंह शेखावत ने किसानों को खराबे के बावजूद बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम नहीं दिए जाने की जानकारी देते हुए पीएमओ को चिट्ठी लिखी तो हलचल हुई और बीमा कंपनियों ने किसानों को 21 दिनों में क्लेम के भुगतान की बात कही है ।
*निगरानी-तंत्र की मांग*
बिश्नोई ने सदन को बताया कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि लाखों करोड़ रुपयों की निगरानी के लिए कोई नियामक तंत्र ही नहीं है । सरकार के द्वारा इतनी बड़ी योजनाओं को बैंकों औऱ बीमा कंपनियों के भरोसे छोड़ देने से अर्थ के इन निरंकुश और बेलगाम व्यवसायियों ने किसानों को ठगने के अनेकों रास्ते तलाश लिए हैं । उन्होंने कहा कि अब ज्यादा देर नहीं हो और कृषकों के हितार्थ सरकारों द्वारा चलाई जा रही हर योजना की सतत निगहबानी के लिए जिला या संभाग स्तर पर निगरानी-तंत्र की जल्द से जल्द स्थापना हो, जो किसानों की शिकायतों और वेदनाओं को सुनें और तय समय-सीमा के भीतर उन्हें राहत प्रदान करें ।
*बजट में मुख्यमंत्री की कथनी ओर करनी में बहुत बड़ा फर्क*
आज सदन में बोलते हुए बिश्नोई ने सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर होने की बात कहते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री जी ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमनें जनता पर कोई नया कर प्रस्तावित नहीं किया है और पहले से लगे करों में प्रदेश की जनता को 300 करोड़ से अधिक राशि की राहत प्रदान की है, लेकिन बजट सत्र के दौरान ही सदन से बाहर पेट्रोल और डीजल की दरों में भारी वृद्धि करके उसी जनता की जेब से हजारों करोड़ रुपए निकाल लिए । विधायक बिश्नोई ने पानी, बिजली, शिक्षा, ग्रामीण विकास, चिकित्सा, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना इत्यादि में किए गए बजट प्रावधानों पर सिलसिलेवार बात रखते हुए कहा कि सरकार का ऐसा कोई महकमा नहीं है, जिनके वित्तीय-प्रावधानों में कटौती नहीं की गई हो ।
*ट्रांसपोर्टर के करो को कम करने की मांग*
उन्होंने सरकार द्वारा बसों की परमिट-राशि में की गई बढ़ोतरी को वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस वृद्धि से यात्री बसों के मालिक गाड़ियों को रोड़ पर चला ही नहीं पाएंगे । इधर सदन में बिश्नोई इस मसले पर अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत करा रहे थे और उधर सरकार ने यात्री-बसों के परमिट-शुल्क में की गई बढ़ोतरी वापस भी ले ली ।
इसके साथ ही उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के चुनाव पूर्व के वादों को याद दिलाया और कहा कि आपकी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी भत्ता व संविदाई कार्मिकों के स्थायीकरण जैसी लोक-लुभावन घोषणाओं के बल पर सत्ता हासिल की है, किंतु जैसे ही आप शासन में आए अपनी घोषणाओं को भुला बैठे हैं, यह किसानों, बेरोजगारों और संविदा-कर्मियों के साथ आपके द्वारा किया गया बहुत बड़ा छलावा है ।
आज सदन में दमदार तरीके से अपनी बात रखते हुए बिहारीलाल ने बजट सत्र में मुख्यमंत्री गहलोत के द्वारा पढ़े गए
"यकीन से आगे भी बढ़ना है,
बहुत कुछ करके ऊंचाइयो पर चढ़ना है ,
वो हवाओ की ओट में दीपक जलाते है,
हम तो तुफानो से टकराकर कारवां चलाते है ।"
एक शेर का जवाब कुछ इस तरह दिया...
गहलोत साहब थे चुनाव में कारवां की आस में
उधर दो कारवां खड़े थे एक साथ पास पास में
किसानों का था एक कारवां और दूसरे संविदाई थे
उत्पीड़न शोषण के मारे सब मां-जाये से भाई थे
मौका ताड़ चुके थे, सो जादू की छड़ी घुमाई
ये लो पूरी कर्जामाफी और तुम समझो स्थाई
रात बीते बात बीते अब सदन में डींगें हांक रहे हैं
लेकिन जिन वोटों से जीते वे अब धूल फांक रहे हैं ।
इस तरह जबाव देखे कहा कि आपने तो करवा लूटने का काम किया, चाहे किसानों का हो, बेरोजगारो का हो, संविदाकर्मियों का हो ।
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