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नेमचंद गहलोत और जगदीश प्रसाद शर्मा "उज्ज्वल" की पुस्तकों का लोकार्पण
. बीकानेर 04 जुलाई | “क्यूं बांधो हो बैर” काव्य संग्रह और रचना संसार ग्रन्थ “गृहस्थ संत नेमचंद गहलोत (अजीत भाई)” दो पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में स्वामी सोमगिरीजी महाराज ने कहा कि नेकी के रास्ते पर चलने से ही आदमी इतिहास रचता है | यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि नेमचंद गहलोत ने रात-दिन एक करके अपनी कड़ी मेहनत और लगन से अपनी पारिवारिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को सुदृढ किया है | आपकी कविताओं में सामाजिक सरोकार झलकते हैं जो मानव मात्र के कल्याण हेतु सार्थक है | वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकरजी व्यास “विनोद” ने कहा कि कभी न थकने वाला आदमी अगर है तो वह केवल नेमचंद गहलोत ही हो सकता है | इनकी साहित्यिक पारी शुरू हुई है, पहली ही पुस्तक में इन्होंने शब्दों का ताना-बाना शानदार बुनने की कोशिश की है | डॉ.मदन सैनी ने नेमचन्दजी के रचना संसार को अद्भुत बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी कविताएँ हैं मगर इनका अर्थ बहुत गहरा निकलता है | इनकी कविताओं से सीख लेने की आवश्यकता है | जीवनी लेखक जगदीशचंद्र शर्मा ने कहा कि नेमचन्दजी जैसे विशाल व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना मुश्किल काम था लेकिन मैंने इसे किया है, इसमें मैं कहां तक सफल हुआ हूं आपके विचारों की प्रतीक्षा मुझे रहेगी |
कार्यक्रम के शुरुआत में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि कर दीप प्रज्ज्वलित किया | रामेश्वर बाडमेरा ने वंदना प्रस्तुत की | स्वागत भाषण देते हुए शहर जिला भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नंदकिशोर सोलंकी ने दोनों पुस्तकों के बारे में बताते हुए कहा कि नेमचन्दजी गहलोत के जीवन पर अपनी कलम चलाते हुए जगदीशप्रसाद शर्मा “उज्ज्वल” ने मेहनतकश इंसान की एक-एक बात को गौर से समझते हुए अपनी कलम चलाई है जो स्वागत योग्य है | मन्च ने जगदीशप्रसाद शर्मा “ उज्ज्वल द्वारा लिखित पुस्तक “गृहस्थ संत नेमचंद गहलोत” और कवि नेमचंद गहलोत द्वारा रचित काव्य संग्रह “क्यूं बांधो हो बैर” का लोकार्पण किया | पाठकीय टीप कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने की | कवि नेमचंद गहलोत ने अपनी पुस्तक में से कविताओं का वाचन करते हुए अपनी कविता - हंस हंसकर बतालावो सबने / मांगो सबकी खैर / करल्यो सबसूं हेत / नी तो थारी हो ज्यावै रेत / क्यूं करो हो बैर / चार दिनां रो जीणों जग में / जाणों जग सूं देर सबेर | सुनाकर तालियाँ बटोरी | मंच द्वारा पुरुषोतमलाल जोशी (परसा/परसिया)झुंझुनू, हुक्मीचंद शर्मा (लम्बीवाला)दिल्ली, दीनदयाल शर्मा सम्पादक “टाबर टोली” हनुमानगढ़ जंक्शन, पवन पहाड़िया नागौर का सम्मान माल्यार्पण, शोल, श्रीफल, सम्मान-पत्र, साहित्य भेंटकर किया गया | सम्मान पत्रों का वाचन संजय आचार्य ‘वरुण’, राजाराम स्वर्णकार, मीनाक्षी स्वर्णकार, रामेश्वर बाडमेरा ने किया | स्वामी सोमगिरीजी महाराज एवं विमर्शानंद गिरी का सम्मान गहलोत परिवार से श्रीमती जानी देवी, जुगलकिशोर, अनिलकुमार, श्रीमती मंजुश्री, श्रीमती विमिता श्री, उमाशंकर, डालचंद, रेणु ने किया | कार्यक्रम में महेंद्रसिंह देवड़ा, कमलसिंह राठौड तुलसीराम मोदी, किशंनाथ, सरदार अली पडिहार, जब्बार बीकाणवी, गौरीशंकर प्रजापत ने अपने विचार व्यक्त किए | क्यूं बांधो हो बैर पुस्तक की टाईप, आकर्षक आवरण कवर बनाने एवं पुस्तक की सैटिंग करने पर कुमारी माधुरी सोनी का सम्मान मंच द्वारा किया गया |
कवि नेमचंद गहलोत का सम्मान शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के सदस्यों अशफाक कादरी, बी.एल.नवीन. चतुर्भुज शर्मा, लोकगायिका राजकुमारी मारू, श्रीमती झंवरा स्वर्णकार, बाबूलाल छंगाणी, हनुमान कच्छावा, ऋषिकुमार अग्रवाल द्वारा माल्यार्पण, शोल, सम्मान पट्टिका भेंटकर किया गया | राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी के नितिन गोयल, महात्मा ज्योतिबा फुले सैनी संस्थान की तरफ से संयोजिका श्रीमती संतोष कच्छावा ने सम्मान किया | स्वर्ण संस्कार की तरफ से श्रीकांत आर्य, विजयलक्ष्मी, हीरल, भारती और माधुरी ने सम्मान किया | श्रद्धा साहित्य संस्थान, होमियो सेवा संस्थान, ओम एक्सप्रेस, सखा संगम की तरफ से एन.डी.रंगा ने सम्मान किया | दीपचंद सांखला, डॉ.ए.के.गहलोत, कमल रंगा, हरीश बी.शर्मा, कौशलेष गोस्वामी, घनश्यामसिंह, मधुरिमासिंह, डॉ.प्रकाश वर्मा, कृष्णा वर्मा, गिरिराज पारीक, सौरभ स्वर्णकार, नृसिंह सोनी, रामेश्वर सोनी, नृत्यांगना डॉ.राजभारती शर्मा, बुनियाद हुसैन ‘जहीन बीकानेरी, कासिम बीकानेरी, मइनुदीन कोहरी, असद अली असद, शकील गौरी, प्रभा भार्गव, डॉ.एस.एन.हर्ष, बसंती हर्ष, प्रेरणा प्रतिष्ठान के प्रेमनारायण व्यास, नरपतसिंह सांखला, महेशसिंह बडगूजर, जुगल पुरोहित, सरोज भाटी, आशा भार्गव, चंद्रेश गहलोत, सीमा भाटी, गायक ज्ञानेश्वर सोनी और रचाव संस्था के शिवशंकर भादाणी ने मालाओं, पुष्पगुच्छों से कवि नेमचंद गहलोत का स्वागत-अभिनंदन किया | कवि चौपाल की तरफ से हनुमंत गौड़ ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया | संचालन युवा कवि-कथाकार, सम्पादक संजय आचार्य ‘वरुण’ ने किया |
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नेमचंद गहलोत और जगदीश प्रसाद शर्मा "उज्ज्वल" की पुस्तकों का लोकार्पण
. बीकानेर 04 जुलाई | “क्यूं बांधो हो बैर” काव्य संग्रह और रचना संसार ग्रन्थ “गृहस्थ संत नेमचंद गहलोत (अजीत भाई)” दो पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में स्वामी सोमगिरीजी महाराज ने कहा कि नेकी के रास्ते पर चलने से ही आदमी इतिहास रचता है | यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि नेमचंद गहलोत ने रात-दिन एक करके अपनी कड़ी मेहनत और लगन से अपनी पारिवारिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को सुदृढ किया है | आपकी कविताओं में सामाजिक सरोकार झलकते हैं जो मानव मात्र के कल्याण हेतु सार्थक है | वरिष्ठ साहित्यकार भवानीशंकरजी व्यास “विनोद” ने कहा कि कभी न थकने वाला आदमी अगर है तो वह केवल नेमचंद गहलोत ही हो सकता है | इनकी साहित्यिक पारी शुरू हुई है, पहली ही पुस्तक में इन्होंने शब्दों का ताना-बाना शानदार बुनने की कोशिश की है | डॉ.मदन सैनी ने नेमचन्दजी के रचना संसार को अद्भुत बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी कविताएँ हैं मगर इनका अर्थ बहुत गहरा निकलता है | इनकी कविताओं से सीख लेने की आवश्यकता है | जीवनी लेखक जगदीशचंद्र शर्मा ने कहा कि नेमचन्दजी जैसे विशाल व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना मुश्किल काम था लेकिन मैंने इसे किया है, इसमें मैं कहां तक सफल हुआ हूं आपके विचारों की प्रतीक्षा मुझे रहेगी |
कार्यक्रम के शुरुआत में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि कर दीप प्रज्ज्वलित किया | रामेश्वर बाडमेरा ने वंदना प्रस्तुत की | स्वागत भाषण देते हुए शहर जिला भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नंदकिशोर सोलंकी ने दोनों पुस्तकों के बारे में बताते हुए कहा कि नेमचन्दजी गहलोत के जीवन पर अपनी कलम चलाते हुए जगदीशप्रसाद शर्मा “उज्ज्वल” ने मेहनतकश इंसान की एक-एक बात को गौर से समझते हुए अपनी कलम चलाई है जो स्वागत योग्य है | मन्च ने जगदीशप्रसाद शर्मा “ उज्ज्वल द्वारा लिखित पुस्तक “गृहस्थ संत नेमचंद गहलोत” और कवि नेमचंद गहलोत द्वारा रचित काव्य संग्रह “क्यूं बांधो हो बैर” का लोकार्पण किया | पाठकीय टीप कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने की | कवि नेमचंद गहलोत ने अपनी पुस्तक में से कविताओं का वाचन करते हुए अपनी कविता - हंस हंसकर बतालावो सबने / मांगो सबकी खैर / करल्यो सबसूं हेत / नी तो थारी हो ज्यावै रेत / क्यूं करो हो बैर / चार दिनां रो जीणों जग में / जाणों जग सूं देर सबेर | सुनाकर तालियाँ बटोरी | मंच द्वारा पुरुषोतमलाल जोशी (परसा/परसिया)झुंझुनू, हुक्मीचंद शर्मा (लम्बीवाला)दिल्ली, दीनदयाल शर्मा सम्पादक “टाबर टोली” हनुमानगढ़ जंक्शन, पवन पहाड़िया नागौर का सम्मान माल्यार्पण, शोल, श्रीफल, सम्मान-पत्र, साहित्य भेंटकर किया गया | सम्मान पत्रों का वाचन संजय आचार्य ‘वरुण’, राजाराम स्वर्णकार, मीनाक्षी स्वर्णकार, रामेश्वर बाडमेरा ने किया | स्वामी सोमगिरीजी महाराज एवं विमर्शानंद गिरी का सम्मान गहलोत परिवार से श्रीमती जानी देवी, जुगलकिशोर, अनिलकुमार, श्रीमती मंजुश्री, श्रीमती विमिता श्री, उमाशंकर, डालचंद, रेणु ने किया | कार्यक्रम में महेंद्रसिंह देवड़ा, कमलसिंह राठौड तुलसीराम मोदी, किशंनाथ, सरदार अली पडिहार, जब्बार बीकाणवी, गौरीशंकर प्रजापत ने अपने विचार व्यक्त किए | क्यूं बांधो हो बैर पुस्तक की टाईप, आकर्षक आवरण कवर बनाने एवं पुस्तक की सैटिंग करने पर कुमारी माधुरी सोनी का सम्मान मंच द्वारा किया गया |
कवि नेमचंद गहलोत का सम्मान शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के सदस्यों अशफाक कादरी, बी.एल.नवीन. चतुर्भुज शर्मा, लोकगायिका राजकुमारी मारू, श्रीमती झंवरा स्वर्णकार, बाबूलाल छंगाणी, हनुमान कच्छावा, ऋषिकुमार अग्रवाल द्वारा माल्यार्पण, शोल, सम्मान पट्टिका भेंटकर किया गया | राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी के नितिन गोयल, महात्मा ज्योतिबा फुले सैनी संस्थान की तरफ से संयोजिका श्रीमती संतोष कच्छावा ने सम्मान किया | स्वर्ण संस्कार की तरफ से श्रीकांत आर्य, विजयलक्ष्मी, हीरल, भारती और माधुरी ने सम्मान किया | श्रद्धा साहित्य संस्थान, होमियो सेवा संस्थान, ओम एक्सप्रेस, सखा संगम की तरफ से एन.डी.रंगा ने सम्मान किया | दीपचंद सांखला, डॉ.ए.के.गहलोत, कमल रंगा, हरीश बी.शर्मा, कौशलेष गोस्वामी, घनश्यामसिंह, मधुरिमासिंह, डॉ.प्रकाश वर्मा, कृष्णा वर्मा, गिरिराज पारीक, सौरभ स्वर्णकार, नृसिंह सोनी, रामेश्वर सोनी, नृत्यांगना डॉ.राजभारती शर्मा, बुनियाद हुसैन ‘जहीन बीकानेरी, कासिम बीकानेरी, मइनुदीन कोहरी, असद अली असद, शकील गौरी, प्रभा भार्गव, डॉ.एस.एन.हर्ष, बसंती हर्ष, प्रेरणा प्रतिष्ठान के प्रेमनारायण व्यास, नरपतसिंह सांखला, महेशसिंह बडगूजर, जुगल पुरोहित, सरोज भाटी, आशा भार्गव, चंद्रेश गहलोत, सीमा भाटी, गायक ज्ञानेश्वर सोनी और रचाव संस्था के शिवशंकर भादाणी ने मालाओं, पुष्पगुच्छों से कवि नेमचंद गहलोत का स्वागत-अभिनंदन किया | कवि चौपाल की तरफ से हनुमंत गौड़ ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया | संचालन युवा कवि-कथाकार, सम्पादक संजय आचार्य ‘वरुण’ ने किया |
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