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वरिष्ठ अध्यापक एवं व्याख्याता पदोन्नति में आरक्षित वर्गो के हितों पर कुठाराघात, नहीं मिला रहा उचित प्रतिनिधित्व
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वरिष्ठ अध्यापक एवं व्याख्याता पदोन्नति में आरक्षित वर्गो के हितों पर कुठाराघात,नहीं मिला रहा उचित प्रतिनिधित्व
बीकानेर... राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग में सत्र 12-13 से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ की जो अनवरत जारी है प्रतिवर्ष विभिन्न विषयों में अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक व वरिष्ठ अध्यापक से प्राध्यापक पद पर पदोन्नति होती है लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं हो पाई रही थी किंतु सत्र 12-13 से ही सरकार ने पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ कर चुकी है ,शिक्षक नेता मोहरसिंह सलावद व अम्बेडकर शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता सीपी वर्मा ने बताया कि पदोन्नति यह देखा गया कि प्रारंभ में जिस प्रकार की पदोन्नति य हुई है उनमें बहुत अधिक विसंगतियां थी यह विसंगतियां अनवरत रूप से अभी तक जारी है सत्र 15-16 की डीपीसी से आरआर सूची का अनुमोदन नए शिक्षण सत्र 19-20 तक नहीं हो पाया है ऐसे में जब इस मामले का बारीकी से अनुसंधान किया तो पाया कि पदोन्नति में आरक्षण का प्रस्ताव केवल हवाई बातें हैं आरक्षित वर्ग को पदोन्नति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला ओर वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापक से प्राध्यापक पद पर हो रही पदोन्नती में हिंदी विषय के कुल 412 पदों पर हो रही जिसने अनुसूचित जनजाति के केवल 12 वरिष्ठ अध्यापकों को शामिल किया है जबकि राज्य सरकार के आरक्षण के अनुसार 49 पदों पर पदोन्नती होनी चाहिए लेकिन नहीं हो रही साथ राजनीति विज्ञान में 309 में अनुसूचित जाति के 35 एवं जनजाति के 30 इसी प्रकार इतिहास में 199 सीटों में अनुसूचित जाति के 27 एवं जनजाति के 12 वरिष्ठ अध्यापकों को शामिल किया गया इसी प्रकार अन्य विषयों में भी आरक्षित वर्ग को नियमानुसार उनका हक नहीं मिला साथ ही बीकानेर मंडल की सूची में अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक की पदोन्नति में सामाजिक विज्ञान में कुल 67, हिंदी में 73,संस्कृत में 43 में एवं गणित में 33 पदों में अनुसूचित जनजाति वर्ग का एक भी अध्यापक को शामिल नहीं किया गया साथ ही वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक के 30 पदों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति का एक भी अध्यापक शामिल नहीं है जो गलत है,पूर्व सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण की एक अलग ही संकल्पना विकसित कर ली इसके अंतर्गत किसी वित्तीय वर्ष में रिक्त होने वाले आरक्षित वर्गों के पदों के विरुद्ध ही आरक्षण दिया जा रहा है और यह संकल्पना भी पूर्ण इमानदारी से पूरी नहीं की जा रही है ऐसे में कई विषय में आरक्षित वर्ग के पद रिक्त रह जाने पर भी अगली पदोन्नति वर्ष में उन्हें सामान्य पदों में बदल दिया जाता है । शिक्षक नेता मोहरसिंह सलावद ने डीपीसी की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाले सत्र 12-13 से अब तक के वर्षों की पदोन्नति के आरक्षण के विरुद्ध रिव्यू हेतु राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत,उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट,शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ,माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डीडेल से की है कि इस प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाकर के आरक्षित और वंचित वर्ग के हित में एक बड़ा फैसला किया जाएं नहीं तो सहन नहीं किया जाएगा ओर राज्य में आरक्षित वर्ग के अध्यापक आंदोलन पर उतारू होगे।
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वरिष्ठ अध्यापक एवं व्याख्याता पदोन्नति में आरक्षित वर्गो के हितों पर कुठाराघात, नहीं मिला रहा उचित प्रतिनिधित्व
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बीकानेर... राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग में सत्र 12-13 से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ की जो अनवरत जारी है प्रतिवर्ष विभिन्न विषयों में अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक व वरिष्ठ अध्यापक से प्राध्यापक पद पर पदोन्नति होती है लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं हो पाई रही थी किंतु सत्र 12-13 से ही सरकार ने पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ कर चुकी है ,शिक्षक नेता मोहरसिंह सलावद व अम्बेडकर शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता सीपी वर्मा ने बताया कि पदोन्नति यह देखा गया कि प्रारंभ में जिस प्रकार की पदोन्नति य हुई है उनमें बहुत अधिक विसंगतियां थी यह विसंगतियां अनवरत रूप से अभी तक जारी है सत्र 15-16 की डीपीसी से आरआर सूची का अनुमोदन नए शिक्षण सत्र 19-20 तक नहीं हो पाया है ऐसे में जब इस मामले का बारीकी से अनुसंधान किया तो पाया कि पदोन्नति में आरक्षण का प्रस्ताव केवल हवाई बातें हैं आरक्षित वर्ग को पदोन्नति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला ओर वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापक से प्राध्यापक पद पर हो रही पदोन्नती में हिंदी विषय के कुल 412 पदों पर हो रही जिसने अनुसूचित जनजाति के केवल 12 वरिष्ठ अध्यापकों को शामिल किया है जबकि राज्य सरकार के आरक्षण के अनुसार 49 पदों पर पदोन्नती होनी चाहिए लेकिन नहीं हो रही साथ राजनीति विज्ञान में 309 में अनुसूचित जाति के 35 एवं जनजाति के 30 इसी प्रकार इतिहास में 199 सीटों में अनुसूचित जाति के 27 एवं जनजाति के 12 वरिष्ठ अध्यापकों को शामिल किया गया इसी प्रकार अन्य विषयों में भी आरक्षित वर्ग को नियमानुसार उनका हक नहीं मिला साथ ही बीकानेर मंडल की सूची में अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक की पदोन्नति में सामाजिक विज्ञान में कुल 67, हिंदी में 73,संस्कृत में 43 में एवं गणित में 33 पदों में अनुसूचित जनजाति वर्ग का एक भी अध्यापक को शामिल नहीं किया गया साथ ही वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक के 30 पदों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति का एक भी अध्यापक शामिल नहीं है जो गलत है,पूर्व सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण की एक अलग ही संकल्पना विकसित कर ली इसके अंतर्गत किसी वित्तीय वर्ष में रिक्त होने वाले आरक्षित वर्गों के पदों के विरुद्ध ही आरक्षण दिया जा रहा है और यह संकल्पना भी पूर्ण इमानदारी से पूरी नहीं की जा रही है ऐसे में कई विषय में आरक्षित वर्ग के पद रिक्त रह जाने पर भी अगली पदोन्नति वर्ष में उन्हें सामान्य पदों में बदल दिया जाता है । शिक्षक नेता मोहरसिंह सलावद ने डीपीसी की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाले सत्र 12-13 से अब तक के वर्षों की पदोन्नति के आरक्षण के विरुद्ध रिव्यू हेतु राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत,उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट,शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ,माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डीडेल से की है कि इस प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाकर के आरक्षित और वंचित वर्ग के हित में एक बड़ा फैसला किया जाएं नहीं तो सहन नहीं किया जाएगा ओर राज्य में आरक्षित वर्ग के अध्यापक आंदोलन पर उतारू होगे।
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