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समय के साथ विकसित हुईं परंपरागत खाद्य प्रणालियां गुणकारी, ज्यादा संतुलित और पौष्टिक: उप-राष्ट्रपति
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समय के साथ विकसित हुईं परंपरागत खाद्य प्रणालियां गुणकारी, ज्यादा संतुलित और पौष्टिक: उप-राष्ट्रपति
देशभर में आज विभिन्न राज्यों और विविध संगठनों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस, 2019 मनाया गया। चेन्नई में विभिन्न हितधारकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ राष्ट्रीय स्तर का समारोह कलाईवनार आरंगम आयोजित किया गया। पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) के साथ समन्वय और तमिलनाडु सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भारतीय मानस और विश्वास का एक सहज पहलू है, जो धार्मिक प्रथाओं, लोककथाओं, कला एवं संस्कृति और दैनिक जीवन के हर पहलू में परिलक्षित होता है। मानव जाति के अस्तित्व के लिए जैव विविधता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने अन्य बातों के अलावा जैव विविधता से संबंधित बदलते प्रतिमानों के प्रति देश की सुविचारित प्रतिक्रियाओं, उपयुक्त नीतियों और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 जैसे कानूनों के विकास और उससे प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख किया।
अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस, 2019 के विषय का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में, समय के साथ विकसित हुई पारंपरिक खाद्य प्रणालियाँ अधिक गुणकारी, संतुलित और पौष्टिक साबित हुई हैं। उन्होंने श्रोताओं का ध्यान जैव विविधता और पारिस्थितिकी सेवाओं के बारे में हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से प्राप्त इस संदेश की ओर दिलाया कि इंसानों के कार्यकलापों के कारण प्रकृति मुसीबत में है। उन्होंने सभी से अनेक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण जैव विविधता के संरक्षण में योगदान देने का आग्रह किया, जो है।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस, 2019 का विषय ‘हमारी जैव विविधता, हमारा भोजन, हमारा स्वास्थय’ जैवविविधता पर खाद्य और स्वास्थ्य की नींव के रूप में ध्यान केंद्रित करता है और इसका लक्ष्य ज्ञान का लाभ उठाना तथा जैवविविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी प्रणालियों पर हमारी खाद्य प्रणालियों, पोषण और स्वास्थ्य की निर्भरता के बारे में जागरूकता फैलाना है।
आयोजन के दौरान, उपराष्ट्रपति ने कुछ दस्तावेज जारी किए जिनमें"भारत की राष्ट्रीय जैवविविधता कार्य योजना का कार्यान्वयन: एक अवलोकन" 2019, और ‘जैव विविधता वित्त योजना, कार्य दस्तावेज़, और कुछ अन्य संचार सामग्री शामिल थी। इस अवसर पर एक ब्रोशर और पोस्टर जारी करने के माध्यम से भारत जैवविविधता पुरस्कार 2020 का आह्वान किया गया। 30 से अधिक संस्थानों की भागीदारी के साथ कार्यक्रम स्थल पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में भोजन और स्वास्थ्य के लिए जैवविविधता की भूमिका पर प्रकाश डालने वाले दिलचस्प प्रदर्शक, पोस्टर, और अन्य ज्ञान उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। उपराष्ट्रपति ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उसमें प्रदर्शित प्रदर्शकों की सराहना की।
इस कार्यक्रम में श्री अनिल कुमार जैन, अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और अध्यक्ष, एनबीए, श्री हंसराज वर्मा, अपर मुख्य सचिव, तमिलनाडु सरकार; और श्री शंभु कालोलिकर, प्रमुख सचिव, तमिलनाडु सरकार भी उपस्थित थे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनबीए, तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु राज्य जैवविविधता बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों, अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों, केंद्र और राज्य सरकार की संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों और वैज्ञानिकों, छात्रों, स्थानीय समुदाय, महिला विकास समितियों और जैवविविधता के प्रति दिलचस्पी रखने वाले लोगों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
भारत की पहचान जैवविविधता की दृष्टि से समृद्ध देश की है। यहां लगभग 300 मिलियन लोग पोषण और आजीविका के लिए जैवविविधता पर आश्रित हैं। भारत भर में, समुदाय, सरकारें और सामाजिक संगठन जैवविविधता के संरक्षण, आजीविका को बनाए रखने और सतत विकास में योगदान देने के तरीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस का आयोजन सतत विकास के प्रति जैवविविधता के योगदान पर रोशनी डालते हुए उसके महत्व तथा उसके प्रति खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भारतीय मानस और विश्वास का एक सहज पहलू है, जो धार्मिक प्रथाओं, लोककथाओं, कला एवं संस्कृति और दैनिक जीवन के हर पहलू में परिलक्षित होता है। मानव जाति के अस्तित्व के लिए जैव विविधता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने अन्य बातों के अलावा जैव विविधता से संबंधित बदलते प्रतिमानों के प्रति देश की सुविचारित प्रतिक्रियाओं, उपयुक्त नीतियों और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 जैसे कानूनों के विकास और उससे प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख किया।
अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस, 2019 के विषय का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में, समय के साथ विकसित हुई पारंपरिक खाद्य प्रणालियाँ अधिक गुणकारी, संतुलित और पौष्टिक साबित हुई हैं। उन्होंने श्रोताओं का ध्यान जैव विविधता और पारिस्थितिकी सेवाओं के बारे में हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से प्राप्त इस संदेश की ओर दिलाया कि इंसानों के कार्यकलापों के कारण प्रकृति मुसीबत में है। उन्होंने सभी से अनेक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण जैव विविधता के संरक्षण में योगदान देने का आग्रह किया, जो है।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस, 2019 का विषय ‘हमारी जैव विविधता, हमारा भोजन, हमारा स्वास्थय’ जैवविविधता पर खाद्य और स्वास्थ्य की नींव के रूप में ध्यान केंद्रित करता है और इसका लक्ष्य ज्ञान का लाभ उठाना तथा जैवविविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी प्रणालियों पर हमारी खाद्य प्रणालियों, पोषण और स्वास्थ्य की निर्भरता के बारे में जागरूकता फैलाना है।
आयोजन के दौरान, उपराष्ट्रपति ने कुछ दस्तावेज जारी किए जिनमें"भारत की राष्ट्रीय जैवविविधता कार्य योजना का कार्यान्वयन: एक अवलोकन" 2019, और ‘जैव विविधता वित्त योजना, कार्य दस्तावेज़, और कुछ अन्य संचार सामग्री शामिल थी। इस अवसर पर एक ब्रोशर और पोस्टर जारी करने के माध्यम से भारत जैवविविधता पुरस्कार 2020 का आह्वान किया गया। 30 से अधिक संस्थानों की भागीदारी के साथ कार्यक्रम स्थल पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में भोजन और स्वास्थ्य के लिए जैवविविधता की भूमिका पर प्रकाश डालने वाले दिलचस्प प्रदर्शक, पोस्टर, और अन्य ज्ञान उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। उपराष्ट्रपति ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उसमें प्रदर्शित प्रदर्शकों की सराहना की।
इस कार्यक्रम में श्री अनिल कुमार जैन, अपर सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और अध्यक्ष, एनबीए, श्री हंसराज वर्मा, अपर मुख्य सचिव, तमिलनाडु सरकार; और श्री शंभु कालोलिकर, प्रमुख सचिव, तमिलनाडु सरकार भी उपस्थित थे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनबीए, तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु राज्य जैवविविधता बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों, अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों, केंद्र और राज्य सरकार की संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों और वैज्ञानिकों, छात्रों, स्थानीय समुदाय, महिला विकास समितियों और जैवविविधता के प्रति दिलचस्पी रखने वाले लोगों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
भारत की पहचान जैवविविधता की दृष्टि से समृद्ध देश की है। यहां लगभग 300 मिलियन लोग पोषण और आजीविका के लिए जैवविविधता पर आश्रित हैं। भारत भर में, समुदाय, सरकारें और सामाजिक संगठन जैवविविधता के संरक्षण, आजीविका को बनाए रखने और सतत विकास में योगदान देने के तरीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस का आयोजन सतत विकास के प्रति जैवविविधता के योगदान पर रोशनी डालते हुए उसके महत्व तथा उसके प्रति खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
समय के साथ विकसित हुईं परंपरागत खाद्य प्रणालियां गुणकारी, ज्यादा संतुलित और पौष्टिक: उप-राष्ट्रपति



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