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मौसमी बीमारियों को लेकर आशा-एएनएम रहें मुस्तैद: सीएमएचओ / शहरी स्वास्थ्य कर्मियों को दिया प्रशिक्षण
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दिनांक: 1 अप्रेल, 2019
मौसमी बीमारियों को लेकर आशा-एएनएम रहें मुस्तैद: सीएमएचओ
मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर शहरी स्वास्थ्य कर्मियों को दिया प्रशिक्षण
बीकानेर। मौसम बदलने के साथ ही एक ओर मच्छरों की तादाद बढ़ रही है वहीं उल्टी-दस्त के जोखिम भी मंडराने लगे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, डायरिया व अन्य मौसमी बीमारियों के खिलाफ स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंधन किया जा रहा है। सोमवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में पब्लिक हेल्थ मेनेजरों, शहरी क्षेत्र की एएनएम व आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर, डॉ. योगेन्द्र तनेजा, एपिडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह, अशोक व्यास व मनोज आचार्य द्वारा मौसमी बीमारियों से बचाव, रोकथाम व प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें लार्वा की पहचान, एमएलओ का संघटन, टेमीफोस उपयोग की मात्रा, पायरेथ्रम-बीटीआई छिडकाव, गम्बुसिया मछली के फायदे, बुखार रोगियों का सर्वे, केस फोलो अप, फोर्मेट भरने, रिपोर्टिंग व ओआरएस घोल बनाने इत्यादि की व्यवहारिक जानकरी दी गई।
सीएमएचओ डाॅ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। सभी चिकित्सा संस्थानों पर चिकित्सकों व पैरामेडिकल नर्सिंग स्टाॅफ का मुख्यालय पर ठहराव सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। सभी सीएचसी, पीएचसी व उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर सघन सर्वे व एंटी लार्वल एक्टिविटी के साथ-साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से आमजन को मलेरिया एवं मौसमी बीमारीयों के बचाव हेतु जानकारी प्रदान की जा रही है। मलेरिया-डेंगू रोगी पाये जाने पर आसपास के 50 घरों में पायरेथ्रम का फोकल स्प्रे करने के साथ ही आउटब्रेक की स्थिति में आवश्यक दवाईयां एवं चिकित्सकीय दल (रैपिड रेस्पोंस टीम) आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
एंटी लार्वल एक्टिविटी है सही
डाॅ. चौधरी ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका होता है एंटीलार्वल एक्टिीविटी जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। इस क्रम में गंदे पानी के इकट्ठा होने पर एमएलओ/काला तेल छिड़काव, पेयजल स्रोतों में टेमीफोस तथा जल स्त्रोंतो में मच्छर का लार्वा खाने वाली गम्बूशिया मछली डलवाने का कार्य किया जाता है। जिले में गम्बूशिया मछली की 392 हैचरियां कार्यरत हैं जिनमें गम्बूशिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए है।
मौसमी बीमारियों को लेकर आशा-एएनएम रहें मुस्तैद: सीएमएचओ / शहरी स्वास्थ्य कर्मियों को दिया प्रशिक्षण
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दिनांक: 1 अप्रेल, 2019
मौसमी बीमारियों को लेकर आशा-एएनएम रहें मुस्तैद: सीएमएचओ
मौसमी बीमारियों की रोकथाम पर शहरी स्वास्थ्य कर्मियों को दिया प्रशिक्षण
बीकानेर। मौसम बदलने के साथ ही एक ओर मच्छरों की तादाद बढ़ रही है वहीं उल्टी-दस्त के जोखिम भी मंडराने लगे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, डायरिया व अन्य मौसमी बीमारियों के खिलाफ स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंधन किया जा रहा है। सोमवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में पब्लिक हेल्थ मेनेजरों, शहरी क्षेत्र की एएनएम व आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में डिप्टी सीएमएचओ डॉ. इंदिरा प्रभाकर, डॉ. योगेन्द्र तनेजा, एपिडेमियोलोजिस्ट नीलम प्रताप सिंह, अशोक व्यास व मनोज आचार्य द्वारा मौसमी बीमारियों से बचाव, रोकथाम व प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें लार्वा की पहचान, एमएलओ का संघटन, टेमीफोस उपयोग की मात्रा, पायरेथ्रम-बीटीआई छिडकाव, गम्बुसिया मछली के फायदे, बुखार रोगियों का सर्वे, केस फोलो अप, फोर्मेट भरने, रिपोर्टिंग व ओआरएस घोल बनाने इत्यादि की व्यवहारिक जानकरी दी गई।
सीएमएचओ डाॅ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। सभी चिकित्सा संस्थानों पर चिकित्सकों व पैरामेडिकल नर्सिंग स्टाॅफ का मुख्यालय पर ठहराव सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। सभी सीएचसी, पीएचसी व उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर सघन सर्वे व एंटी लार्वल एक्टिविटी के साथ-साथ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से आमजन को मलेरिया एवं मौसमी बीमारीयों के बचाव हेतु जानकारी प्रदान की जा रही है। मलेरिया-डेंगू रोगी पाये जाने पर आसपास के 50 घरों में पायरेथ्रम का फोकल स्प्रे करने के साथ ही आउटब्रेक की स्थिति में आवश्यक दवाईयां एवं चिकित्सकीय दल (रैपिड रेस्पोंस टीम) आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
एंटी लार्वल एक्टिविटी है सही
डाॅ. चौधरी ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि मच्छरों की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका होता है एंटीलार्वल एक्टिीविटी जिसके तहत् मच्छरों को पनपने से ही रोक दिया जाता है। इस क्रम में गंदे पानी के इकट्ठा होने पर एमएलओ/काला तेल छिड़काव, पेयजल स्रोतों में टेमीफोस तथा जल स्त्रोंतो में मच्छर का लार्वा खाने वाली गम्बूशिया मछली डलवाने का कार्य किया जाता है। जिले में गम्बूशिया मछली की 392 हैचरियां कार्यरत हैं जिनमें गम्बूशिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए गए है।





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