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सम्पूर्ण जगत की मां है गौमाता
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सम्पूर्ण जगत की मां है गौमाता
ब्रह्मसागर मंदिर प्रांगण में गो कृपा कथा प्रारम्भ
बीकानेर, 9 अप्रैल। गाय सिर्फ जानवर नहीं सम्पूर्ण सृष्टि की जान है। यह प्राणी नहीं प्राण है। आज मनुष्य गाय की महत्ता समझने की भूल कर रहा है। यही हमारे दुःखों का मूल है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के समस्त संस्कार गौमाता के बिना संभव नहीं है। गौमाता सम्पूर्ण जगत की मां है।
राष्ट्रीय गो क्रांतिकारी ‘गोपाल परम्परा’ के आचार्य ग्वाल संत गुरुदेव भगवान ने सोमवार को डूडी पेट्रोल पंप के पीछे स्थित ब्रह्मसागर मंदिर प्रांगण में आयोजित सप्तदिवसीय भव्य गो कृपा कथा के दूसरे दिन यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कलयुग में गोसेवा को अपनी सेवा बताया, लेकिन मनुष्य इसे भूल चुका है। गोमाता की सेवा मनुष्य जीवन में आने वाली समस्त परेशानियों का समाधान है। गोमाता के दर्शन मात्र से हमारे मन-मस्तिष्क में दिव्य तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जब रोगी गोमाता को प्रेम भरी दृष्टि से निहारता है, तो नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। उन्होंने गोमाता की परिक्रमा, गोमाता के स्पर्श, गोमाता के सुवास, गोमाता के श्वास, गौमूत्र स्नान तथा पान से ठीक होने वाली बीमारियों के बारे में बताया।
ऐतिहासिक है गो-पर्यावरण एवं आध्यात्म चेतना पद यात्रा
संपूर्ण भारतवर्ष में गोमाता की महिमा को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से 31 वर्ष लम्बी गो-पर्यावरण एवं आध्यात्म चेतना पद यात्रा 4 दिसम्बर 2012 को हल्दीघाटी मेवाड़ से प्रारम्भ हुई। यह यात्रा 31 वर्षों में भारत में 2.50 लाख किलोमीटर तक लगभग 51 हजार गांवों का भ्रमण करेगी। अब तक लगभग सवा छह वर्षों में राजस्थान के 22 जिलों में 50 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 10 हजार से अधिक गांवों में गो माता, पर्यावरण एवं भारतीय संस्कृति की अलख जगाने के प्रयास हुए हैं। इसी श्रृंखला में यह यात्रा 7 अप्रैल को गोकुल सर्किल के पास पहुंची। जहां से कलश यात्रा के रूप में पहुंचने के बाद श्री गोकृपा कथा महोत्सव प्रारम्भ हुआ। यह 13 अप्रेल तक चलेगा। प्रतिदिन सायं 6ः30 से रात्रि 9ः30 तक गोकथा होगी।










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