तितली बन पंख लगा ...


फ़ूल और तितली की तरह /
मुस्कुरा /
पंख लगा  /
काँटों में भी जी /
प्रकृति - समभाव आत्मसात कर !
तितली !
फ़ूल और तितली की तरह /
मुस्कुरा कर जीयें हम /
तितली बन पंख लगा कर जीयें हम /
काँटों में भी मुस्कुराएँ और फ़ूल बनकर जीयें हम /
फ़ूल - कांटे और तितली जैसे हिलमिल कर रहें हम /
फ़ूल और तितली की तरह ...मुस्कुरा कर जीयें हम...

प्रकृति के साथ रह कर हम समभाव से जीवन जीने की कला को आत्मसात कर सकते हैं !
ऐसे जैसे तितली ! प्रकृति के साथ नृत्य करती तितली...। तितली को देखकर बच्चे ही
नहीं बल्हि हर आयुवर्ग के लोग प्रसन्न होते हैं। खासतौर से बच्चों को तो मानो
तितली अपने पास बुलाती है... इसीलिए बाग बगीचे का नाम आते ही बच्चे सबसे पहले
तितली को याद करें तो आष्चर्य कैसा...! और ... हम भी ऐसे बन जाएँ की हर कोई
हमारे और हम हर किसी के पास जाकर प्रसन्न हों !

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