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Showing posts from 2014

जांबाज़ बेटियां : सूर्य परमाल

सिंधी नाटक

जांबाज़ धीअरु : सूर्य परमाल

- Mohan Thanvi

सीन 1

कासिम जो दरबार

सूत्रधार: दाहरसेन जो सिन्धु जे लाय वीरगति प्राप्त करणि जो समाचार बुधी रनिवास में महाराणी लादीबाईअ तलवार हथनि में खरणि जो ऐलान कयो। इयो बुधी सिन्धुजा वीर जवान बीणे जोशो-खरोश सां दुश्मन जे मथूं चढ़ी विया। महारानी लादीबाई उननि जी अगुवा हुई। उनजो आवाज बुधी दुश्मन जे सैनिकनि जी हवा खराब पेई थे। ऐहड़े वक्त में कुछ देशद्रोही अरबनि सां मिली विया। महाराणीअ जे सलाहकारनि उनखे बचणि जा रस्ता बुधाया पर सिन्धुजी उवा वीर राणी बचणि जे लाय न बल्कि बियूनि खे बचायणि जे लाय जन्म वड़तो हूयो। उन दुश्मन जे हथ लगणि खां सुठो त भाय जे हवाले थियणि समझो। सभिनी सिन्धी ललनाउनि मुर्सनि जे मथूं दुश्मन जो मुकाबलो करणि जी जिम्मेवारी रखी। पाणि जौहर कयवूं। इन विच इनाम जी लालच एं पहिंजी जान बचायणि जे लाय देशद्रोहिनि राजकुमारी सूर्यदेवी एं परमाल खे कैद करे वड़तो। पर जुल्मी वधीक हूया। उवे किले में घिरी आहिया उननि कासिम जे दरबार में बिनी राजकुमारियूनि खे पेश कयो-

कासिम: सिन्धु जे किले ते फतह करणि में असांजा घणाइ जांबांज मारजी विया आहिनि।
हिक …

ये रास्ते हैं जीवन के...

ये रास्ते हैं जीवन के...
पुल से स्टेशन विहंगम दिखा । तीनों प्लेटफार्म मानो छू सकता था । वहां गाड़ी की प्रतीक्षा में मौजूद हुजूम से बतिया सकता था । देखते देखते प्लेटफार्म नं एक पर गाड़ी आन पहुंची। कोई खास हलचल नहीं । एक दो ही लोग गाड़ी में जा बैठे । ये पैसेंजर थी। गांव जाने के लिए जरूरी और मजबूरी में ही लोग इसमें यात्रा करते हैं । तभी तीन नं पर गाड़ी के पहुंचते पहुंचते लोग डिब्बों में घुसने लगे । पलक झपकी न झपकी 100-200 लोग गाड़ी में बैठे दिखे । ये बड़े शहरों में जाने वाली एक्सप्रेस है । इससे लोग बिना मकसद दिखावा करने या सिर्फ घूमने के लिए भी जाते हैं । दो नं प्लेटफार्म लऑगों के होते हुए भी शांत दिखा । वहां गाड़ी पहुंची तो कुछ देर तक लोग डिब्बों में झांकते रहे । पसंदीदा जगह दिखी तो 10-15 लोगों ने अपना सामान वहां जमाया फिर खुद भी बैठ गए । ये गाड़ी तीर्थयात्रा स्पेशल थी । इसमें जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर जीने वाले ही यात्रा करते हैं । अपना सामान यानी विचारों का आदान प्रदान कर तीर्थ करते हैं ।
पुल से आहिस्ता आहिस्ता उतर कर नाचीज ने अपना सामान इंजन से चौथे डिब्बे में जमा लिया ।
- मोह…

बिझनि जी उंञ अंञणु बाकी आहे / थानवी की कविताओं में परंपराओं के साथ आज की बात / मोहन थानवी के काव्य संग्रह ‘‘हालात’’ का लोकार्पण

काव्य संग्रह ‘‘हालात’’ का लोकार्पण
थानवी की कविताओं में परंपराओं के साथ आज के समय की बात
बीकानेर 13 जुलाई,
     नवयुवक कला मण्डल की ओर से आज विश्वास वाचनालय में बहुभाषी साहित्यकार मोहन थानवी के नवीनतम कविता संग्रह हालात का लोकार्पण अतिथियांे ने किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे मानुमल प्रेमज्याणी ने कहा कि नई पीढी सिंधी साहित्य से परिचित हो इसके लिये व्यापक प्रयास किये जाने चाहिये । मुख्य अतिथि सिंधी रचनाकार महादेव बालानी ने कहा कि थानवी ने सिंधी कविता में परम्पराओं के साथ आज के समय की बात को गंभीरता के साथ कहा है। मुख्य वक्ता हासानंद मंगवानी और किशन सदारंगानी ने कहा कि थानवी की कवितायें अपने समय के साथ कदम ताल करती हई सिंध के वैभवशाली अतीत से भी परिचित करवाती है । लोकार्पित कृति हालात पर पाठकीय टिप्पणी करते हुवे शीलू बालानी एंव टीकम पारवानी ने कहा कि संग्रह की कविताओं में विभाजन के दर्द को गहरायी के साथ प्रस्तुत किया गया है । सिंधी लोक गायक चन्द्र प्रकाश आहूजा ने परम्परागत सिंधी लोकगीत तथा थानवी की कविताओं की प्रस्तुति दी।  सिंधी अकादमी के पूर्व सदस्य सुरेश हिन्दुस्तानी ने कहा कि…
क्रिकेट: और भी हैं मुकाम । अंपायरिंग । सुरेश शास्त्री। आज से 23-24 साल पहले जब मैं उनसे पहली बार मिला था । उस समय भला हम यह कैसे जान सकते थे कि हैदराबाद में 30 दिसंबर 2013 का दिन उनके अंपायरिंग के कैरियर में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। वह दिन शास्त्री जी को 100 से अधिक प्रथम श्रेणी के मैचों में अंपायरिंग करने वाले पहले अंपायर बनने का सौभाग्य प्रदान करने वाला दिन है। अंपायर सुरेश शास्त्री 90 के दशक में एक बार बीकानेर आए थे। रेलवे स्टेडियम में क्रिकेट का मुकाबला हुआ था, रणजी। अंपायर सुरेश शास्त्री से अथवा क्रिकेट खेल से मेरा कोई सीधा नाता नहीं रहते हुए भी जब शास्त्री से मुलाकात हुई तो वे दिल में उतर गए और आज तक हमारे संबंध कायम हैं। सुरेश जी से मेरी मुलाकात आकाशवाणी बीकानेर के लिए श्री कुलविंदर सिंह कंग द्वारा लिए गए साक्षात्कार की प्रक्रिया के दौरान हुई। मैं अस्थाई कंपीयर/उद्घोषक के तौर पर आकाशवाणी से जुड़ा हुआ था, श्री कंग को जब बताया कि बीकानेर में अंपायर सुरेश शास्त्री जी आए हुए हैं तो उन्होंने शास्त्री जी की साक्षात्कार के लिए स्वीकृति लेने व उन्हें आकाशवाणी स्टूडियो तक लाने का…

मां के चरणों में मिला स्वर्ग

मां के चरणों में मिला स्वर्ग मां के वरदहस्त से हर्ष मां से पाया धरा ने धैर्य मां से देवों ने ली किलकारी मां ही देवी जगत जननी मां बिन नहीं स्वर्ग में सुख मां बिन नहीं हर्ष का स्पर्श मां का आशीष ही गर्व मां का आंचल ही सुख मां ही आन बान और शान मां ही देती ज्ञान मां गुरु मां ही भगवान मां ही जीवन की मुस्कान मोहन थानवी 13 मई 2012

samasya ka samadhan... ek... prayas

Samasya ka samadhan... Prayas... Ek Aadmi Apni ek samasya hal karane ek sadhu kke pas gaya . Use bataya ki Ek Aadmi use Apne bulata hai magar jab wo jata hai to vah ghar ka darwaja Andar se band kar leta hai. Sadhu bola Simpal... Ab wo bulaye to tum jana hi nahi... Agar jawo or darwaja bheetar se band ho to tab tak khatkhatawo jab tak khol n diya jaaye. Wo Aadmi bahut Khush Huwa... Kyun ? ........ Kyunki... Prqyas hi kamyab hote hain... Samasya koi bhi ho... Samadhan ek hi hai... Prayaas. :)

राजकला

राजकला                                                
राज की कला। राजनीति। राज कला। यूं राज कला मंदिर की फिल्में भी हिट हुई हैं। राजनीति तो हिट है ही। राजनीति को तो हिट किया ही जाता है। कुर्सीधारी भी राजनीति को हिट करते हैं। कुर्सी पूजक भी। कुर्सीधारी वो जो जनता के वोट जुटा कर कुर्सी पर विराजमान हो। कुर्सी पूजक वो जो कुर्सी पर विराजमान की पूजा करने से न चूकता हो। दोनों कार्य राज की कला है। राज करने की कला। राज में न होते हुए भी ऐसी कला जानने वाले राज करते हैं। जो राज नहीं कर पाते वे फुटबाल के जैसे हिट लगा कर हरफनमौला खिलाड़ी की तरह अपनी कलाकारी दिखाते हैं। नियुक्तियों में, पदोन्नतियों में, स्थानांतरण में, आबंटन उपाबंटन में ऐसे ही राज कलाकारों की तूती बोलती है। ये पांच वर्ष की अवधि से भी बंधे नहीं होते। हां, पांच वर्ष के संक्रमण काल में ऐसी कला के ज्ञाता कुछ राज खोलने पर आमादा दिखते हैं। खोलते नहीं। अपनी अपनी पार्टी से बंधे ऐसे राज दार पार्टी के खूंटे से खुलने के लिए छटपटाते हैं। कुछ राजनीति से, कुछ राज दारी से अपनी पार्टी के हित में दूसरी पार्टी से जुड़ने की कला का प्रदर्शन करते हैं।…

जब आम आदमी अधिकार मांगता है..

जब आम आदमी अधिकार मांगता है...
अफरातफरी की इस बेला में राजनीति से बोझिल माहौल में भी जब आम आदमी खुद के दम पर अपने वर्ग, अपने समाज के हित में अधिकार मांगने के लिए मुट्ठियां तान लेता है तब भी...,  नहीं चाहते हुए भी राजनीति की बू से घिरा लगता है। क्यों... ? सवाल यह है कि...जब आम आदमी अधिकार मांगता है तो कैसा महसूस होता है... ? उसे खुद को, उसके साथियों को, उसके अधिकारियों को, उसके परिवारजनों को ? उसके पड़ोसियों को... उसके... उसके... उसके और उसके उन सब को... जो उसके आसपास हैं... जिनके दायरे में वह है ? जरूरी नहीं कि हर कोई वाजिब अधिकारों की ही मांग करता हो... दूसरे पहलू भी गौरतलब होते हैं। क्योंकि... अधिकार की बात जहां आती है वहां शासन और समाज के नियम कायदे, कानून, परंपरागत जीवनशैली पहले से मौजूद होना स्वाभाविक है। राजनीति होना भी बड़ी बात नहीं। पिछले दिनों ( बीकानेर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार ) एक सेमिनार में सदियों पहले की परिस्थितियों में लोगों के एक रियासत से दूसरी रियासत की ओर पलायन पर विषय विशेषज्ञ की विवेचना सुनने का अवसर मिला। इन प्रखर वक्ता का कहना था, तत्कालीन परिस्थितियों में ज…

bahubhashi: कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले...

bahubhashi: कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले...: पंजाब केसरी राजस्थान संस्करण में ...  18 Dec 2012   (श्री राजेंद्र सैन)  ऐतिहासिक उपन्यास कूचु ऐं शिकस्त...1300 साल पहले का कथानक ...

मन कबूतर पंख पसारता यहां...

Aawo meet... Geet vahi gaate hain... ये रोषनी हमारे लिए है... हमारे लिए है... ये खुषियां हमारे लिए है... हमारे लिए है... आषाओं का सागर लहराता यहां... मन कबूतर पंख पसारता यहां... विष्वास की मजबूत डोर से बंधे हैं सभी... निराषा की जगह यहां नहीं है नहीं... ये रोषनी हमारे लिए है... हमारे लिए है... ये खुषियां हमारे लिए है... हमारे लिए है...

bahubhashi: गौरैया के घोंसले पे

bahubhashi: गौरैया के घोंसले पे: धूप ने दीवार को सहलाया ... उसे मिली राहत ... गौरैया के घोंसले पे जमी बर्फ भी पिघल गई ... मतवाली हुई हवा ... आशा क...

गौरैया के घोंसले पे

धूप ने दीवार को सहलाया ... उसे मिली राहत ... गौरैया के घोंसले पे जमी बर्फ भी पिघल गई ... मतवाली हुई हवा ... आशा के गीत गूंज उठे ... दूर हुआ निराशा का साया !..

होली पर... इश्क में... क्या हाल बना लिया

होली पर इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया

होली पर... इश्क में... क्या हाल बना लिया

होली पर इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया

होली पर... इश्क में... क्या हाल बना लिया

होली पर इश्क में मोहन ऐसा क्या हाल बना लिया होली आई मगर पानी मिलना दुश्वार हो गया न छोटों की आंख में बड़ों के लिए पानी न नलों में ही आता पीने योग्य साफ पानी होली पर इश्क के रंग में रंग गया मोहन दुनिया को भूल गया मोहन मोहन करती रही गोपियां मोहन पिचकारी संग ले गया

एक संपादक का सच...

एक संपादक का सच... मुझे नहीं लगता था कि मेरे प्रकाशक महोदय को कुछ कहानियों में से एक का यह शीर्षक संग्रह के लिए आकर्षक लगेगा... अब बारी प्रकाशन की है। देखते हैं कब नंबर लगता है। कहानी उस खबर पर केंद्रित है जो संपादक महोदय ने अपने पाक्षिक में छापी लेकिन फिर उस खबर को देने वाले संपादक के सूत्रों सहित हर पक्ष उसे झुठलाने में जुट गया... फिर ऐसा कुछ हुआ कि... संपादक का सच सभी को मानना ही पड़ा...।

कब से ताक रहा था परेशां सूरज कोहरे में सिमटा रास्ता जमीं चूमने को बेताब थी किरणें - शुभ मंगल दिवस साथियों... नमस्कार।

कब से ताक रहा था परेशां सूरज कोहरे में सिमटा रास्ता जमीं चूमने को बेताब थी किरणें - शुभ मंगल दिवस साथियों... नमस्कार।

दिल की सल्तनत के ये बेताज बादशाह

दिल की सल्तनत के ये बेताज बादशाह
( प्रमुख अंश ) - प्रदीप भटनागर,
... नगर बीकाणा में भी कई राजा भोज, शहंशाह अकबर और सम्राट कृष्णदेव राय हुए हैं। उनके पास सत्ता और साम्राज्य भी नहीं रहा। इनके रीते हाथों ने सृजन-धर्मियों की पीठ थपथपाकर उनके रचना संसार को पल्लवित और विकसित करने में महती भूमिका निभाई है। हां जी। मेरी मुराद उन रेस्टोरेंट और पान भंडार के मालिकों से है जहां संस्कृतिकर्मियों ने चाय/कॉफी की एक बटा दो प्याली के बाद पान के साथ जुगाली की है। एक-दूसरे से बतियाते हुए  रातें गुजारी है। सृजन किया है। सुना है-सुनाया है। आलोचनाएं-समालोचनाएं व समीक्षाएं की है। कई नाटकों के वाचन और पूर्वाभ्यास भी किए हैं। कोटगेट के भीतर जहां आज हिम्मत मेडिकोज है कभी वहां देर रात तक खुला रहने वाला लालचंद भादाणी का होटल ‘गणेश मिष्ठान्न भंडार’ था; एक ओर जहां होटल के अंदर बुलाकीदास ‘‘बावरा’’, ए वी कमल, वासु आचार्य और नवल बीकानेरी चाय की प्याली में कविताओं के तूफान उठाते थे, तो दूसरी ओर होटल के बाहर लगी बुलाकी दास भादाणी की पान की दुकान पर अभय प्रकाश भटनागर, मनोहर चावला, महबूब अली और मांगीलाल माथुर पान चबाते हु…

नूरजहां का फरमान और इतिहास देख मुस्कराता है भविष्य

नूरजहां का फरमान और इतिहास देख मुस्कराता है भविष्य
जहां शब्दों से होता है संवाद। ऐसे शिक्षा के मंदिर, शब्दों से संवाद करवाने वाले स्थल पर एक-दो मार्च 2014 को राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इतिहासकार जुटेंगे और भविष्य के लिए इतिहास का मंथन करेंगे।
नूरजहां के फरमान - मुगल बादशाह जहांगीर, शाहजहां, औरंगजेब, नूरजहां, बहादुरशाह द्वारा लिखे गए ऐतिहासिक फरमान, निशान और जयपुर, जोधपुर एवं सिरोही के राजाओं को लिखे पत्र इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। ये पत्र संरक्षित है और आनलाइन भी किए गए हैं।
रियासतकालीन 35 लाख से भी अधिक ऐतिहासिक दस्तावेजों से शोधार्थी इतिहास में झांकते हैं। शब्दों से संवाद स्थापित कर अपना भविष्य बनाते हैं। ऐसा स्थान है बीकानेर में राजस्थान राज्य अभिलेखागार।
यहां स्वतंत्रता संग्राम में अपना सबकुछ होम कर देने वाले 246 देशभक्तों के संस्मरण भी संरक्षित है और उन्हें सुना भी जा सकता है। इनमें गोकुल भाई भट्ट, सिद्धराज ढढ्ढा, रणछोड़दास गट्टाणी, मथुरादास माथुर, हीरालाल शास़्त्री शामिल हैं।
इतिहास के शोधार्थियों के लिए अभिलेखागार में अक…

शिव पर वैज्ञानिक-शोध ! शिव ही सत्य है... !

शिव पर वैज्ञानिक-शोध !
शिव ही सत्य है... !
शिवजी का डमरू और त्रिशूल। शिवजी की जटाओं से निकलती गंगा। शिवजी का तीसरा नेत्र। नटराज रूप। शिवजी का तांडव नृत्य। और... और... और... अनेकानेक प्रसंग। जिन पौराणिक कथाओं को कुछ लोग कपोलकल्पित करार देने में पल भर भी नहीं लगाते, उन्हीं कथाओं के लघु से लघु प्रसंगों पर कतिपय वैज्ञानिक गहन शोध कार्य भी कर रहे हैं। सभी शोध-परिणाम सार्वजनिक भी नहीं किए जा रहे। क्यों? खासतौर से सिंधु सभ्यता, सिंधु संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं पर किए जाने वाले शोधों की जानकारी, उनके परिणाम के बारे में हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग तो लगभग अनजान ही रह जाते हैं। क्यों ? शिवजी संबंधी ही नहीं बल्कि सभी देवी-देवताओं और संसार भर में देवतुल्य अथवा मानव जीवन से श्रेष्ठ माने जाने वाले चरित्रों और उनसे जुड़ी वस्तुओं पर ऐसे शोध आज से नहीं बल्कि बीती सदियों से जारी हैं। यह अलग बाल है है कि कतिपय वैज्ञानिकों ने ऐसी रोमांचक, अद्भुत और अचंभित कर देने वाली बातों, चीजों, जीवों को एलियन से भी जोड़ा है, जो कि इस तरह के वैज्ञानिक शोधों के कोटि कोटि पहलुओं में से एक है। ऐसे शोधों में इस तरह के पहलू ह…